अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ हुई सैन्य कार्रवाई में अपने ही सहयोगियों की भूमिका पर खुलकर नाराजगी जता दी। व्हाइट हाउस में नाटो के महासचिव मार्क रुटे के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने दो टूक कहा कि अमेरिका को किसी की मदद की जरूरत नहीं थी, लेकिन सहयोगी देशों से थोड़े समर्थन और वफादारी की उम्मीद जरूर थी। दिलचस्प बात यह रही कि जिस नाटो को ट्रंप नसीहत देने बैठे थे, उसी के महासचिव ने सामने बैठकर आंकड़ों के साथ बता दिया कि यूरोप ने अमेरिका की कितनी मदद की।
‘हमें किसी की मदद की जरूरत नहीं थी’
बैठक में ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका ने अकेले दम पर ईरान को घुटनों पर ला दिया। उन्होंने कहा, ‘हमने ईरान को पहले ही हफ्ते में पूरी तरह तबाह कर दिया था। हमें किसी की मदद की जरूरत नहीं थी, लेकिन अच्छा लगता अगर हमारे सहयोगी कहते कि हम आपके साथ हैं।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या यूरोपीय देशों ने अमेरिका का समर्थन किया, तो ट्रंप का जवाब बेहद छोटा और सख्त था, ‘नहीं।’
रुटे का जवाब: यूरोप से उड़े हजारों अमेरिकी विमान
ट्रंप के इन आरोपों के बाद मार्क रुटे ने मोर्चा संभाला और यूरोप का बचाव किया। उन्होंने ट्रंप के सामने ही आंकड़े रखे और बताया कि ईरान के खिलाफ छह सप्ताह तक चले इस अभियान में, अप्रैल के मध्य में युद्ध विराम होने तक, यूरोप के सैन्य ठिकानों से करीब 4,000 से 5,000 अमेरिकी विमानों ने उड़ान भरी। रुटे ने यह भी बताया कि अमेरिकी सैन्य विमानों को बिना रुकावट उड़ान भरने का मौका देने के लिए रोमानिया के बुखारेस्ट एयरपोर्ट तक को कुछ समय के लिए आम उड़ानों के वास्ते बंद करना पड़ा। रुटे ने कहा, ‘कुछ अलग घटनाएं जरूर हुई होंगी, जिनसे आप निराश हैं, लेकिन कुल मिलाकर यूरोपीय सहयोगी आपके साथ खड़े रहे।’
स्पेन, इटली से लेकर फ्रांस तक पर निशाना
ट्रंप यहीं नहीं रुके और एक-एक कर कई यूरोपीय देशों का नाम लेकर उन पर बरस पड़े। उन्होंने कहा, ‘स्पेन तो पूरी तरह निराशाजनक है। मैं इटली से निराश हूं। ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस से भी निराश हूं। ज्यादातर देश कुछ भी खर्च नहीं करना चाहते। उन्हें लगता है कि अमेरिका हमेशा उनकी सुरक्षा करता रहेगा और उन्हें मुफ्त की सवारी मिलती रहेगी।’ ट्रंप ने याद दिलाया कि अमेरिका के हजारों सैनिक यूरोप में तैनात हैं और अकेले जर्मनी में ही करीब 50 हजार अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। इसके बावजूद, उनके मुताबिक, सहयोगी देशों से उन्हें वह समर्थन नहीं मिला जिसकी उम्मीद थी।
‘पैसा नहीं, बस वफादारी चाहिए’ और ‘ट्रंप ट्रिलियन’
ट्रंप ने यह भी साफ किया कि उन्हें सहयोगियों के पैसे की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हमारे पास दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है। हमें सिर्फ वफादारी चाहिए। हम हमेशा उनके लिए लड़ते हैं, लेकिन बदले में थोड़ा समर्थन भी नहीं मिलता।’ इसी बैठक में रुटे ने ‘ट्रंप ट्रिलियन’ शब्द का इस्तेमाल किया और दावा किया कि ट्रंप के दबाव की वजह से ही यूरोप और कनाडा ने अपने रक्षा खर्च में करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी की है। इतना ही नहीं, इसके चलते अमेरिकी रक्षा कंपनियों को भी अरबों डॉलर के नए ऑर्डर मिले हैं।













