अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में मीडिया से चर्चा के दौरान संकेत दिए हैं कि रूस इस वर्ष अमेरिका की मेजबानी में होने वाली जी-20 बैठकों में सक्रिय भागीदारी दर्ज करा सकता है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने व्लादिमीर पुतिन के इस सम्मेलन में शामिल होने की संभावना पर बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि रूसी राष्ट्रपति इस आयोजन में शिरकत करते हैं, तो वह उनका गर्मजोशी से स्वागत करेंगे। हालांकि, अभी तक यह स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है कि व्लादिमीर पुतिन व्यक्तिगत रूप से इस वैश्विक मंच पर पहुंचेंगे या फिर मास्को की तरफ से किसी अन्य प्रतिनिधि को भेजा जाएगा।
अमेरिका इस बार वर्ष 2026 के लिए जी-20 की कमान संभाल रहा है और विभिन्न बैठकों की रूपरेखा तैयार की जा चुकी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो जॉर्जिया के अटलांटा शहर में 30 और 31 अक्टूबर को जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी संभालेंगे। इसके बाद साल के अंत में यानी 14 और 15 दिसंबर को फ्लोरिडा के मियामी स्थित ट्रंप नेशनल डोराल में मुख्य जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन का आयोजन होगा। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में समूह के तमाम सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं के जुटने की पूरी उम्मीद है। भारत और रूस दोनों ही इस प्रभावशाली वैश्विक संगठन के अहम सदस्य देश हैं। इससे पहले सितंबर, 2023 में नई दिल्ली ने इस समूह की ऐतिहासिक शिखर बैठक की मेजबानी सफलतापूर्वक पूरी की थी।
परमाणु हथियारों के नियंत्रण को लेकर ट्रंप ने अपनी मंशा जाहिर करते हुए कहा है कि वह रूस और चीन के साथ एक नए परमाणु समझौते पर काम करने के इच्छुक हैं। हालांकि, उन्होंने खुद इस बात को स्वीकार किया कि मौजूदा साल के भीतर इस तरह के किसी समझौते पर मुहर लगने के आसार बेहद कम हैं। इसके बावजूद उनके बयानों से यह साफ झलकता है कि अमेरिका इन दोनों प्रमुख देशों के साथ परमाणु सुरक्षा और सामरिक मामलों पर बातचीत के द्वार खुले रखना चाहता है।
जब बातचीत के दौरान रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष का जिक्र आया और ट्रंप से पूछा गया कि क्या उन्हें इस बात की जानकारी है कि इस तबाही की शुरुआत व्लादिमीर पुतिन ने की थी, तो उन्होंने कहा कि उन्हें पूरी स्थिति का इल्म है और वह सही समय आने पर इससे जुड़ी तमाम बातें सार्वजनिक करेंगे। डोनाल्ड ट्रंप ने जोर देकर कहा कि इस युद्ध को समाप्त कराना उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। उनके अनुसार इस खूनी संघर्ष में हर महीने औसतन करीब 25 हजार सैनिक अपनी जान गंवा रहे हैं, जबकि बीते महीने यह आंकड़ा बढ़कर 32 हजार तक पहुंच गया था। इसके अलावा यूक्रेन द्वारा स्टारशील्ड तकनीक के इस्तेमाल पर किसी भी तरह के प्रतिबंध लगाने की बात को खारिज करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है।



















