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मध्य अलास्का में मिला 13,800 साल पुराना इंसानी ठिकाना, प्राचीन हथियारों और पालतू कुत्तों के मिले अवशेषअमेरिका
18 अक्तू॰ 2026, 1:48 am (41 मिनट पहले)· 0

मध्य अलास्का में मिला 13,800 साल पुराना इंसानी ठिकाना, प्राचीन हथियारों और पालतू कुत्तों के मिले अवशेष

पुरातत्वविदों को मध्य अलास्का में पश्चिमी गोलार्ध का सबसे पुराना इंसानी रिहायशी ठिकाना मिला है, जहां से हजारों प्राचीन हथियार, दुर्लभ सिलाई किट और शुरुआती पालतू कुत्तों के अवशेष बरामद हुए हैं।

अमेरिकी राज्य अलास्का के बर्फीले और दुर्गम क्षेत्र में पुरातत्वविदों ने मानव इतिहास से जुड़ी एक असाधारण खोज की है। मध्य अलास्का के सुदूर इलाके में जमीन की खुदाई के दौरान शोधकर्ताओं को करीब 13,800 वर्ष पुराना एक विशाल बेस कैंप मिला है। ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से यह स्थल पश्चिमी गोलार्ध में अब तक खोजा गया सबसे पुराना इंसानी ठिकाना माना जा रहा है। इस प्राचीन जगह से वैज्ञानिकों को हजारों की तादाद में पत्थरों से तराशे गए हथियार, जानवरों के कंकाल और उस दौर के इंसानों की दैनिक जिंदगी में काम आने वाली कई वस्तुएं मिली हैं। इस खोज की सबसे रोमांचक बात यह है कि यहां से ऐसे जानवरों की हड्डियां भी सुरक्षित मिली हैं, जो पूरे अमेरिकी महाद्वीप के सबसे शुरुआती पालतू कुत्तों के होने का पुख्ता संकेत देती हैं। इसके अतिरिक्त कपड़ों की सिलाई के लिए इस्तेमाल की जाने वाली हड्डी की बेहद बारीक सुई भी बरामद की गई है, जो इस पूरे गोलार्ध में अब तक की सबसे प्राचीन सुई मानी जा रही है।

शैग एक्स्टडाल्थी: उस प्राचीन स्थल की पहचान और भौगोलिक स्थिति

यह ऐतिहासिक पुरातात्विक स्थल अलास्का के फेयरबैंक्स शहर से लगभग 34 मील यानी तकरीबन 55 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व दिशा में मौजूद है। स्थानीय क्षेत्र में इस स्थान को अथाबास्कन भाषा के पारंपरिक नाम शैग एक्स्टडाल्थी के रूप में जाना जाता है। अलास्का की मूल अथाबास्कन जुबान में इस नाम का सीधा अर्थ होता है कि वे वहां मौजूद थे। भौगोलिक दृष्टि से यह इलाका पूर्वी बेरिंगिया के अंतर्गत आता है।

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इतिहासकारों और भूवैज्ञानिकों के अनुसार, बेरिंगिया वह विशाल भूभाग था जो पिछले हिमयुग के दौर में पूर्वोत्तर एशिया और पश्चिमोत्तर उत्तरी अमेरिका को आपस में जमीनी रास्ते से जोड़ता था। इसे आमतौर पर बेरिंग लैंड ब्रिज के नाम से पुकारा जाता है। आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययनों और शोधों से स्पष्ट हुआ है कि आज के मूल अमेरिकी निवासियों के पूर्वज करीब 21,000 साल पहले इसी प्राकृतिक भूमि गलियारे से गुजरकर अमेरिकी महाद्वीप में दाखिल हुए थे। इस पूरे उत्खनन और शोध के विस्तृत परिणाम प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका साइंस एडवांसेज में प्रकाशित किए गए हैं।

जमीन के नीचे दफन बेस कैंप और चौंकाने वाली कलाकृतियां

कैनसस यूनिवर्सिटी की पुरातत्वविद और इस पूरे शोध अध्ययन की मुख्य शोधकर्ता केली ग्राफ ने इस खोज के शुरुआती पलों का ब्योरा साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब इस स्थल पर खुदाई शुरू की गई थी, तब पुरातत्व दल को केवल शिकार से जुड़े कुछ सामान्य औजार और एक या दो चूल्हे मिलने की उम्मीद थी। हालांकि, जब जमीन की परतों को सावधानीपूर्वक हटाया गया, तो वहां उम्मीद से कहीं अधिक विशाल और सुव्यवस्थित बेस कैंप सामने आ गया। इस ठिकाने से हजारों की संख्या में प्राचीन कलाकृतियां, शिकार के नुकीले औजार और रोजमर्रा के बर्तन जैसी चीजें सुरक्षित पाई गईं।

उत्खनन दल को जमीन के भीतर एक प्राचीन चूल्हा, एक छोटा भंडारण गड्ढा और मिट्टी में धंसे हुए लकड़ी के खंभे का स्पष्ट निशान दिखाई दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खंभा उस काल में बनाए गए किसी टेंट अथवा मजबूत रिहायशी ढांचे का प्रमुख हिस्सा रहा होगा। इसी रिहायशी ढांचे के पास जमीन को खोदकर बनाया गया एक विशाल प्राकृतिक ओवन भी मिला है। इस भूमिगत ओवन के भीतर बड़ी मात्रा में कोयला और विभिन्न जानवरों की जली हुई हड्डियां भरी हुई मिलीं। पुरातत्वविदों का अनुमान है कि इस खास भूमिगत चूल्हे का उपयोग एक बड़े पारिवारिक समूह के लिए धीमी आंच पर लंबे समय तक मांस पकाने के मकसद से किया जाता था।

साइबेरियाई बनावट वाले हथियार और दूरदराज का व्यापारिक नेटवर्क

शैग एक्स्टडाल्थी से बरामद किए गए पत्थर के हथियार अपनी कारीगरी के लिहाज से बेहद दुर्लभ हैं। पुरातत्व विज्ञान में इन खास औजारों को डायमंड-शेप हाफ्टेड बिफेस कहा जाता है। इन सभी औजारों को बेसाल्ट और रियोलाइट जैसे बेहद कठोर और टिकाऊ पत्थरों को तराश कर तैयार किया गया था। आश्चर्यजनक रूप से इन हथियारों की बनावट और तकनीकी शैली बिल्कुल वैसी ही है, जैसी आधुनिक उत्तरी साइबेरिया यानी एशियाई क्षेत्र में पाए जाने वाले प्रागैतिहासिक हथियारों में देखने को मिलती है।

इसके साथ ही, इस जगह से ओब्सीडियन नामक काले ज्वालामुखीय कांच के पत्थर से बने धारदार हथियार भी खुदाई में मिले हैं। भूगर्भीय जांच दर्शाती है कि ओब्सीडियन पत्थर उस खुदाई स्थल पर प्राकृतिक रूप से नहीं मिलता, बल्कि यह इलाका वहां से सैकड़ों मील दूर उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित है। यह तथ्य इस बात को सिद्ध करता है कि 13,800 वर्ष पहले भी इस क्षेत्र के शिकारी मानव समूह लंबी दूरी तय करते थे और अपने साथ उच्च गुणवत्ता वाले बहुमूल्य पत्थरों और हथियारों को लेकर सैकड़ों मील का दुर्गम सफर तय किया करते थे।

अमेरिका में कुत्ता पालने का सबसे पुराना ऐतिहासिक प्रमाण

खुदाई के दौरान वैज्ञानिकों के हाथ एक दर्जन से अधिक ऐसे जानवरों की हड्डियां लगीं, जो दिखने में भेड़ियों जैसी थीं। जब शोधकर्ताओं ने इनमें से एक जबड़े की हड्डी की आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों से गहन जांच की, तो एक बेहद चौंकाने वाला परिणाम सामने आया। यह जबड़ा न तो प्रागैतिहासिक काल के विशाल डायर वुल्फ का था और न ही उस दौर में पाए जाने वाले सामान्य ग्रे वुल्फ से मेल खाता था। यह मध्य अलास्का के वन्यजीवों की एक सर्वथा भिन्न और अनूठी नस्ल थी।

वर्तमान समय के आनुवंशिक शोध यह प्रमाणित करते हैं कि उत्तरी अमेरिका के शुरुआती पालतू कुत्ते साइबेरियाई भेड़ियों की ही वंश परंपरा से जुड़े थे। ऐसे में शैग एक्स्टडाल्थी से मिले ये शारीरिक अवशेष दृढ़ता से संकेत देते हैं कि यहां रहने वाले लोग शायद पूरे अमेरिकी महाद्वीप के सबसे पहले कुत्ता पालने वाले इंसानों में शामिल थे। मानव समूहों के समान ही ये वफादार कुत्ते भी एशियाई बेरिंगिया के दुर्गम रास्ते को पार करके इंसानों के साथ अमेरिकी धरती पर पहुंचे थे।

सिलाई किट और हिरण के सींग का सजावटी पेंडेंट

शैग एक्स्टडाल्थी की खुदाई केवल पत्थरों और हड्डियों के औजारों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि वहां से उस दौर की एक पूरी सिलाई किट भी बरामद हुई। वैज्ञानिकों को जानवरों की हड्डियों से तराशी गई सुइयों के आठ अलग-अलग टुकड़े मिले हैं। इससे पहले इस किस्म की सिलाई सुइयां उत्तरी अमेरिका के अपेक्षाकृत कम ठंडे और शीतोष्ण इलाकों से ही प्राप्त हुई थीं। हालांकि, इस बर्फीले ठिकाने से मिली ये सुइयां पूरे पश्चिमी गोलार्ध की सबसे पुरानी सिलाई सुइयों का ऐतिहासिक दर्जा हासिल कर चुकी हैं।

सिलाई किट के साथ ही हिरण के सींग से तराशा गया एक खूबसूरत पेंडेंट भी खोजा गया है, जिसके एक सिरे पर धागा पिरोने के लिए सावधानी से छेद किया गया था। इस पेंडेंट की डिजाइन और निर्माण शैली दक्षिणी उत्तरी अमेरिका के शुरुआती इलाकों में पाए गए प्राचीन गहनों और ताबीजों से काफी मिलती-जुलती है। ये सभी पुरातात्विक साक्ष्य यह साबित करने के लिए पर्याप्त हैं कि अलास्का के प्राचीन बाशिंदों के संबंध एशिया के साथ-साथ सुदूर अमेरिकी भूभागों की संस्कृतियों से भी गहरे तौर पर जुड़े हुए थे।

अलास्का के बर्फीले इतिहास में आगे के शोध की संभावनाएं

केली ग्राफ के अनुसार, अलास्का एक अत्यंत विशाल और बेहद दुर्गम भूभाग है, जिसके चलते अब तक इसके बहुत ही सीमित हिस्से का वैज्ञानिक उत्खनन संभव हो पाया है। उनकी शोध टीम आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में और अधिक व्यापक स्तर पर खुदाई अभियान चलाने की योजना बना रही है। इस महत्वपूर्ण परियोजना में अलास्का के मूल निवासियों और स्थानीय बुजुर्गों का सक्रिय सहयोग भी लिया जा रहा है, जिससे उनकी वाचिक परंपराओं और सांस्कृतिक समझ के जरिए इस इतिहास को बेहतर ढंग से समझा जा सके। बेरिंगिया के 14,000 साल से भी अधिक पुराने रहस्यों और इंसानी जीवन के सफर को लेकर अभी दुनिया के सामने बहुत कुछ उजागर होना बाकी है।

सवाल-जवाब

अलास्का में मिला यह प्राचीन इंसानी ठिकाना कितना पुराना है?
रेडियोकार्बन डेटिंग और पुरातात्विक अध्ययनों के अनुसार यह इंसानी बेस कैंप लगभग 13,800 वर्ष पुराना है।
इस पुरातात्विक स्थल को क्या नाम दिया गया है और इसका क्या अर्थ है?
इस स्थल को स्थानीय अथाबास्कन भाषा में 'शैग एक्स्टडाल्थी' नाम दिया गया है, जिसका अर्थ होता है 'वे वहां थे'।
खुदाई में पालतू कुत्तों से जुड़ा क्या सबूत मिला है?
शोधकर्ताओं को भेड़िए जैसे जानवरों की हड्डियों में एक विशिष्ट जबड़ा मिला है, जो आनुवंशिक रूप से साइबेरियाई भेड़ियों से निकले शुरुआती पालतू कुत्तों से संबंधित माना जा रहा है।
हड्डी की सिलाई सुइयों का क्या ऐतिहासिक महत्व है?
यहां मिली जानवरों की हड्डी की आठ सुइयां पूरे पश्चिमी गोलार्ध में अब तक खोजी गई सबसे पुरानी सिलाई सुइयां साबित हुई हैं।
हथियारों का साइबेरिया से क्या संबंध पाया गया है?
खुदाई में मिले डायमंड-शेप हाफ्टेड बिफेस हथियारों की बनावट आधुनिक उत्तरी साइबेरिया में पाए जाने वाले प्रागैतिहासिक हथियारों जैसी ही है।
यह शोध किस प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है?
इस पूरी खोज और वैज्ञानिक विश्लेषण से जुड़ा शोध साइंस एडवांसेज जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
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