पश्चिम एशिया में सुरक्षा संकट गहराने के बीच यमन के हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों ने नए कूटनीतिक गठजोड़ की जमीन तैयार कर दी है। सऊदी अरब समर्थित ठिकानों पर बढ़ते हमलों के बीच यह संभावना तेज हो गई है कि रियाद हूतियों का मुकाबला करने के लिए इजरायल से रक्षा सहयोग ले सकता है। अमेरिकी नेतृत्व की ओर से आए बयानों ने इस ऐतिहासिक और कूटनीतिक बदलाव की चर्चा को दुनिया भर में हवा दे दी है।
डोनाल्ड ट्रंप ने रक्षा तालमेल पर क्या कहा
16 अक्टूबर को एक प्रेस वार्ता के दौरान जब डोनाल्ड ट्रंप से पूछा गया कि क्या सऊदी अरब को यमन के हूती विद्रोहियों से निपटने के लिए इजरायल की सुरक्षा सहायता स्वीकार करनी चाहिए, तो उन्होंने इस पर सहमति जताई। उन्होंने संकेत दिया कि सऊदी अरब इस तरह के प्रस्ताव पर विचार कर सकता है और इसे मान भी सकता है। हालांकि, उन्होंने इस बात की पुष्टि नहीं की कि सऊदी नेतृत्व और इजरायल के बीच इस मुद्दे पर किसी ठोस समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं या नहीं।
पश्चिम एशिया में बदलते कूटनीतिक समीकरण
सऊदी अरब और इजरायल के बीच रक्षा तालमेल की चर्चा ऐसे समय में उभरी है जब लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। अमेरिकी मध्यस्थता में अब्राहम समझौते के विस्तार और गुप्त वार्ताओं की चर्चाएं पहले भी सामने आती रही हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि सऊदी अरब और इजरायल रक्षा मोर्चे पर एक साथ आते हैं, तो ईरान के प्रभाव को सीमित करने के साथ-साथ तुर्की और पाकिस्तान जैसे देशों के पारंपरिक कूटनीतिक रुख पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा।


















