भारतीय थलसेना और यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी के बीच द्विपक्षीय सैन्य साझेदारी को मजबूत करने के मकसद से वार्षिक साझा अभ्यास का 22वां संस्करण आरंभ हो चुका है। इस बड़े रक्षा अभ्यास का औपचारिक शुभारंभ देवभूमि उत्तराखंड के सीमावर्ती पर्वतीय क्षेत्र औली स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड पर आयोजित एक भव्य समारोह के साथ किया गया। इस बार के युद्धाभ्यास की रूपरेखा बेहद व्यापक रखी गई है, जिसमें उत्तरी हिमालयी ढलानों से लेकर पश्चिमी रेगिस्तानी भूभाग तक एक साथ समन्वित गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
शीर्ष सैन्य कमान की मौजूदगी और भागीदारी का पैमाना
प्रशिक्षण सत्र की शुरुआत के अवसर पर दोनों देशों के उच्च सैन्य अधिकारियों ने शिरकत की। भारतीय दल का नेतृत्व 14 इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल अमरेश गुंजन ने किया, जबकि अमेरिकी सैन्य टुकड़ी की कमान 11वीं एयरबोर्न डिवीजन से संबद्ध पहली इन्फैंट्री ब्रिगेड कॉम्बैट टीम के कमांडर कर्नल बेंजामिन जैकमैन के हाथों में रही। सैन्य मोर्चे पर दोनों ही पक्षों की बराबरी सुनिश्चित करते हुए भारत और अमेरिका ने लगभग 600-600 जांबाज जवानों को मैदान में उतारा है। इस तरह कुल 1200 प्रशिक्षित सैनिक मिलकर युद्ध कौशल का साझा प्रदर्शन कर रहे हैं।
पर्वतीय और ऊंचे ढलानों पर एकीकृत रणनीति
इस संयुक्त ड्रिल का प्राथमिक लक्ष्य विषम, पहाड़ी तथा अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स के व्यावहारिक संचालन की साझा दक्षता को नई ऊंचाई देना है। दुर्गम चोटियों पर पैदल सेना की त्वरित तैनाती, आक्रामक अभियानों और सामरिक मोर्चेबंदी पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। प्रशिक्षण गतिविधियों के माध्यम से दोनों सशस्त्र बल अपने पुराने रणनीतिक अनुभवों का आदान-प्रदान कर रहे हैं, ताकि किसी भी अप्रत्याशित संकट के समय साझा नियोजन और धरातल पर सटीक कार्रवाई का समन्वय त्रुटिहीन बना रहे।
ड्रोन, स्वायत्त प्रणालियां और आधुनिक हथियारों का परीक्षण
बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप इस संस्करण में अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों के एकीकरण को प्राथमिकता दी गई है। टोही गतिविधियों, अग्रिम निगरानी तथा वास्तविक समय की खुफिया जानकारी जुटाने के लिए मानव रहित ड्रोन और ऑटोनॉमस प्रणालियों का सघन अभ्यास किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, राजस्थान के बीकानेर स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में अत्याधुनिक मारक हथियार प्रणालियों की लाइव फायरिंग और तकनीकी क्षमता का व्यापक प्रदर्शन तय किया गया है।
मल्टी-डोमेन वॉरफेयर और भविष्य की संयुक्त चुनौतियां
रेगिस्तानी और बर्फीले दोनों प्रकार के भूगोल में एक साथ युद्धाभ्यास आयोजित करने का उद्देश्य बहुआयामी वातावरण में अंतर-संचालनीयता का विस्तार करना है। दोनों देशों के रक्षा रणनीतिकार मल्टी-डोमेन वॉरफेयर की नई बारीकियों और आधुनिक युद्धकला के आयामों पर गंभीर विचार-विमर्श में जुटे हैं। इस रणनीतिक साझेदारी से सैनिकों को एक-दूसरे की मानक संचालन प्रक्रियाओं और युद्ध प्रणालियों को गहराई से समझने का अवसर मिल रहा है, जिससे भविष्य के संयुक्त अभियानों में सैन्य तालमेल को नई मजबूती मिलेगी।


















