संयुक्त राज्य अमेरिका में आगामी तीन नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले डाक मतपत्रों की प्रक्रिया में व्यापक फेरबदल करने की योजना को बड़ा कानूनी अवरोध झेलना पड़ा है। देश की शीर्ष अदालत ने सोमवार को प्रशासन की उस आपातकालीन याचिका को खारिज कर दिया, जिसके जरिए निचली अदालत द्वारा डाक मतदान के नए नियमों पर लगाई गई अंतरिम रोक को हटाने की गुहार लगाई गई थी। इस न्यायिक निर्णय के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि प्रतिनिधि सभा और सीनेट के राजनीतिक नियंत्रण का फैसला करने वाले इन बेहद अहम चुनावों के दौरान मतदान की पुरानी व्यवस्था ही प्रभावी रहेगी।
शीर्ष अदालत का आपातकालीन राहत से इनकार
अदालत ने अपने बिना हस्ताक्षर वाले आदेश में स्पष्ट किया कि प्रशासन यह ठोस आधार पेश करने में असमर्थ रहा कि निचली जिला अदालत के शुरुआती आदेश के खिलाफ उसकी कानूनी स्थिति इतनी मजबूत है जिससे तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत पड़े। पीठ ने रेखांकित किया कि आपातकालीन न्यायिक राहत प्रदान करने के लिए निर्धारित वैधानिक मानदंड इस मामले में रोक हटाने के पक्ष में नहीं जाते हैं। हालांकि इस निर्णय ने यह अंतिम संवैधानिक व्याख्या तय नहीं की है कि भविष्य के आम चुनावों में डाक सेवा ऐसे दिशा-निर्देश लागू कर सकती है या नहीं, लेकिन तीन नवंबर के मतदान के लिए नए प्रावधानों के इस्तेमाल पर पूरी तरह विराम लग गया है।
लागू किए गए नए डाक नियमों की रूपरेखा
डाक सेवा ने अगस्त के महीने में इन कड़े नियमों की घोषणा की थी, जिसकी पृष्ठभूमि मार्च में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित एक कार्यकारी आदेश से जुड़ी थी। इन प्रावधानों के तहत प्रत्येक राज्य को अपने मतपत्र लिफाफों का प्रारूप अनिवार्य रूप से बदलना था। नए प्रारूप में आधिकारिक चुनावी डाक लोगो, स्वचालित मशीनों से पढ़े जा सकने वाले सुरक्षा फीचर तथा प्रत्येक मतदाता के लिए अलग विशिष्ट बारकोड दर्ज करना अनिवार्य किया गया था। इसके अतिरिक्त सभी राज्यों को मतपत्र डिजाइनों की संघीय स्तर पर पूर्व स्वीकृति लेना और मतदाताओं के नाम, पते व बारकोड से जुड़ी संवेदनशील जानकारी एक नए डाक सेवा पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य बनाया गया था। निर्धारित मानकों पर खरा न उतरने वाली सामग्री को डाक सेवा द्वारा अस्वीकार कर सीधे राज्य निर्वाचन कार्यालयों को वापस लौटाने का प्रावधान भी रखा गया था।
राज्य निर्वाचन अधिकारियों की आपत्तियां और प्रतिक्रिया
मतदान का समय अत्यंत नजदीक होने के कारण दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों से संबंध रखने वाले चुनाव अधिकारियों ने 2026 के चुनावी चक्र में इन परिवर्तनों को तत्काल प्रभाव से रोकने का कानूनी आग्रह किया था। अधिकारियों का रुख था कि एक दर्जन से अधिक राज्य इसी सप्ताह के अंत तक मतदाताओं को मतपत्र प्रेषित करने की अंतिम तैयारियों में जुटे थे, लिहाजा अंतिम क्षणों में पूरी व्यवस्था बदलना जमीनी तौर पर असंभव था। न्यायिक फैसले का यूटा और मिशिगन के रिपब्लिकन अधिकारियों ने खुला स्वागत करते हुए कहा कि इससे प्रशासनिक भ्रम पूरी तरह दूर हो गया है और चुनावी तैयारियों को आवश्यक स्पष्टता मिल गई है।
संवैधानिक अधिकार क्षेत्र और विभाजित न्यायिक राय
इस फैसले के दौरान नौ सदस्यीय पीठ में वैचारिक मतभेद भी खुलकर सामने आए, जहां जस्टिस सैमुअल एलिटो और जस्टिस क्लेरेंस थॉमस ने बहुसंख्यक आदेश से लिखित असहमति व्यक्त की। कानूनी बहस के दौरान प्रशासन का तर्क था कि ये नियम देश के संविधान के दायरे में हैं और इनका एकमात्र उद्देश्य पूरी मतदान प्रणाली की सुरक्षा तथा विश्वसनीयता को मजबूती प्रदान करना है। इसके विपरीत डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले राज्यों तथा मतदान अधिकार संगठनों ने दलील दी कि डाक सेवा अप्रत्यक्ष रूप से मतदान प्रक्रिया पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है, जबकि अमेरिकी संवैधानिक व्यवस्था के तहत चुनावों का आयोजन और संचालन प्राथमिक तौर पर राज्यों का विशेष क्षेत्राधिकार है। आंकड़ों के अनुसार 2024 के चुनाव में लगभग एक तिहाई अमेरिकी नागरिकों ने डाक के माध्यम से अपने मताधिकार का प्रयोग किया था, जो इस प्रणाली के विशाल आकार को रेखांकित करता है।


















