अमेरिकी सेना के भीतर कोविड-19 टीकाकरण अभियान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वर्जीनिया की एक संघीय अदालत में दायर किए गए दस्तावेजों और बयानों से यह बात सामने आई है कि सैन्य बलों के बीच हुई मौतों के कारणों की नए सिरे से गहन छानबीन की जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया के केंद्र में एक सैन्य चिकित्सक का वह दावा है जिसमें टीकों के कारण सुरक्षा बलों के जवानों की जान जाने की आशंका जताई गई है। यह विवाद उस वक्त से चला आ रहा है जब महामारी के दौर में प्रशासनिक स्तर पर टीकाकरण को अनिवार्य बना दिया गया था, जिसके बाद से ही इसे लेकर सैनिकों के एक वर्ग में लगातार असंतोष और कानूनी चुनौतियां बनी हुई थीं।
अनिवार्य टीकाकरण और नीतिगत विवाद
साल 2021 में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल के दौरान अमेरिकी सेना के तमाम जवानों के लिए कोविड-19 रोधी टीका लगवाना अनिवार्य कर दिया गया था। इस सरकारी आदेश के लागू होने के बाद जिन सैनिकों ने व्यक्तिगत या चिकित्सीय कारणों से टीका लगवाने से इनकार कर दिया था, उन्हें गंभीर प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। उस समय के नियमों के तहत करीब 9000 सैनिकों को सेना से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। इस नीति ने न केवल सैन्य अनुशासन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच एक तीखी बहस को जन्म दिया था, बल्कि चिकित्सा समुदाय के भीतर भी इसको लेकर खासी खींचतान देखने को मिली थी।
डॉ. थेरेसा लोंग को सौंपी गई विशेष जिम्मेदारी
इस पूरे घटनाक्रम में एक नया मोड़ तब आया जब डॉ. थेरेसा लोंग को रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की ओर से स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर का वरिष्ठ सैन्य चिकित्सा सलाहकार नियुक्त किया गया। अपने रिटायरमेंट से ठीक 10 दिन पहले मिली इस विशेष जिम्मेदारी के तहत वे अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग के वैक्सीन एडवर्स इवेंट रिपोर्टिंग सिस्टम के आंकड़ों की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। इस डेटाबेस में कुल 2544 ऐसे सैनिकों की मौत के मामले दर्ज हैं जिनके सटीक कारणों की अब तक आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हो पाई है। अदालत के समक्ष दिए गए बयानों में डॉ. लोंग ने यह उम्मीद जताई है कि वे अगले एक साल के भीतर टीकों के संभावित प्रतिकूल प्रभावों पर अपनी इस विस्तृत जांच को पूरा कर लेंगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके संज्ञान में कम से कम 28 ऐसे मामले आए हैं जहां मौत का संबंध सीधे तौर पर टीके के प्रभाव से हो सकता है, हालांकि उनके पास उस समय इस पर विस्तार से बात करने के लिए सीमित अधिकार थे।
स्वास्थ्य नेतृत्व और टीकों की सुरक्षा पर बहस
वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर अपनी नियुक्ति से पहले से ही टीकों की सुरक्षा और उनकी प्रभावशीलता को लेकर मुखर आलोचक रहे हैं। हाल ही में उन्होंने कोविड टीकों से जुड़ी सालाना सरकारी सिफारिशों को भी समाप्त कर दिया था, जिस पर देश के कई वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञों ने कड़ी आपत्ति जताई थी। डॉ. लोंग की इस जांच का एक बड़ा आधार मायोकार्डिटिस यानी हृदय की मांसपेशियों में सूजन की समस्या है। पूर्व में अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन और रक्षा विभाग की कुछ रिपोर्टों में भी इस बात की पुष्टि हुई थी कि युवा पुरुषों में टीका लगने के तुरंत बाद हृदय से जुड़ी सूजन के मामले सामान्य से थोड़े अधिक दर्ज किए गए थे। हालांकि पेंटागन की तरफ से जारी की गई साल 2026 की रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया था कि टीकों के कारण किसी भी सैनिक की मौत की पुष्टि नहीं हुई है।
डेटा विसंगतियां और पेंटागन का रुख
मामले की जांच के दौरान सेना के एक मेडिकल डेटाबेस में साल 2021 के दौरान बीमारियों के आंकड़ों में आए अचानक और भारी उछाल ने कई सवाल खड़े किए थे। उस समय पेंटागन ने इस विसंगति को केवल आंकड़ों की गिनती में हुई एक तकनीकी चूक या गलती करार दिया था। इसके बावजूद डॉ. लोंग ने अदालत में यह बात साफ तौर पर कही कि वे इस प्रशासनिक स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हैं और पूरे सिस्टम की फिर से बारीकी से जांच कर रही हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके।
निकाले गए सैनिकों की वापसी के प्रयास
एक तरफ जहां टीकों से हुई मौतों की तकनीकी जांच चल रही है, वहीं दूसरी तरफ रक्षा मंत्रालय ने एक विशेष टास्क फोर्स का भी गठन किया है। इस टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य साल 2021 के उस आदेश के तहत टीका लगवाने से इनकार करने के कारण सेना से बर्खास्त किए गए लगभग 9000 सैनिकों को सम्मान के साथ वापस सेवा में लाना है। यह पूरी कानूनी और प्रशासनिक कवायद ऐसे वक्त में हो रही है जब अमेरिकी नागरिकों और विशेषकर वयस्कों के बीच कोविड टीका लगवाने की दर गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी है।



















