इंटरनेट फोरम प्लेटफॉर्म रेडिट ने ओपन वेब के दो सबसे पुराने और लोकप्रिय टूल्स को बंद करने का बड़ा फैसला लिया है। कंपनी अपने प्लेटफॉर्म पर 13 नवंबर से आरएसएस फीड्स की सुविधा हमेशा के लिए बंद कर देगी। इसके अलावा, डेवलपर्स और रिसर्चर्स द्वारा लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे पब्लिक एपीआई एक्सेस को भी मार्च 2027 तक पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। इस फैसले की मुख्य वजह प्लेटफॉर्म पर बड़े पैमाने पर हो रही अनधिकृत एआई डेटा स्क्रेपिंग और ऑटोमेटेड बॉट्स की गतिविधियां बताई गई हैं। रेडिट का कहना है कि यह खुला ढांचा अब ऑटोमेटेड दुरुपयोग का एक बड़ा जरिया बन चुका था, जिसके चलते इन सेवाओं को समेटना जरूरी हो गया।
खुले वेब के दौर के टूल आरएसएस की विदाई
आरएसएस यानी रियली सिंपल सिंडिकेशन अथवा रिच साइट समरी लंबे समय से ओपन वेब का एक अहम हिस्सा रहा है। ब्लॉगिंग के सुनहरे दौर में यह फॉर्मेट काफी लोकप्रिय हुआ था, क्योंकि इसकी मदद से यूजर्स अलग-अलग वेबसाइट्स के नए आर्टिकल्स और पोस्ट्स को बिना वेबसाइट खोले सीधे न्यूज-रीडर ऐप्स में पढ़ सकते थे। गूगल ने कभी इस क्षेत्र में बेहद लोकप्रिय गूगल रीडर सर्विस चलाई थी, लेकिन वर्ष 2013 में उसे बंद कर दिया गया था। इसके बाद फीडली और कई स्वतंत्र डेवलपर्स के ऐप्स ने इस बाजार को संभाला। रेडिट ने अपने आधिकारिक बयान में स्वीकार किया कि आरएसएस लंबे समय तक खुले वेब का एक पसंदीदा माध्यम रहा है, लेकिन अब बॉट्स द्वारा इसका अनुचित लाभ उठाया जा रहा है।
डेटा लाइसेंसिंग से होने वाली कमाई की सुरक्षा
रेडिट के इस कड़े रुख के पीछे एक बड़ा आर्थिक पहलू भी है। प्लेटफॉर्म पर मौजूद करोड़ों यूज़र्स की बातचीत और फोरम डिस्कशंस अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों के लिए मॉडल्स को ट्रेन करने का सबसे कीमती डेटा बन चुके हैं। रेडिट इन चर्चाओं के डेटा को एआई कंपनियों को बेचकर भारी मुनाफा कमा रहा है। कंपनी के दूसरे क्वार्टर के नतीजों के मुताबिक, विज्ञापनों के अलावा होने वाला उसका अन्य राजस्व साल-दर-साल 24% बढ़कर 43 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। यही वजह है कि कंपनी अब अपने इस मूल्यवान यूजर डेटा को किसी भी बाहरी बॉट या टूल को बिना पैसे दिए मुफ्त में लेने की इजाजत नहीं देना चाहती।
पब्लिक एपीआई पर मार्च 2027 की समयसीमा
कंपनी के बुधवार को घोषित किए गए नए अपडेट्स में पब्लिक एपीआई को खत्म करने की योजना भी शामिल है। मार्च 2027 के बाद पब्लिक एपीआई का एक्सेस बंद होते ही वे सभी टूल्स काम करना बंद कर देंगे जो रेडिट के कंटेंट को प्रोग्रामिंग के जरिए पढ़ते थे। इनमें सोशल लिसनिंग प्रोडक्ट्स, शोधकर्ताओं के टूल्स और ऐसे एआई असिस्टेंट शामिल हैं जो सवालों के जवाब देने के लिए रेडिट की चर्चाओं का उपयोग करते हैं। इस बदलाव के बाद, किसी भी एआई प्रोडक्ट या कंपनी को रेडिट के डेटा तक पहुंचने के लिए उसके साथ औपचारिक वाणिज्यिक समझौते करने होंगे।
कम्युनिटी मॉडरेटरों की चिंताएं और ओल्ड रेडिट पर पाबंदी
रेडिट के इस कदम से कम्युनिटी चलाने वाले वॉलंटियर मॉडरेटर काफी चिंतित हैं। जब कंपनी ने पहले इस तरह का बदलाव करने के संकेत दिए थे, तब कई मॉडरेटरों ने शिकायत की थी कि आरएसएस फीड्स हटने से उनके लिए सबरेडिट्स और कम्युनिटीज को मैनेज करना असंभव जैसा हो जाएगा। कई आम यूज़र्स ने भी यह बात रखी कि वे प्लेटफॉर्म को ब्राउज करने के लिए मुख्य रूप से आरएसएस का ही उपयोग करते थे।
इसके साथ ही, रेडिट ने अपने रूल्स हब और ऑटो-मॉड टूल्स में सुधार करने की जानकारी दी है। प्लेटफॉर्म के क्लासिक और टेक्स्ट-आधारित इंटरफेस 'ओल्ड रेडिट' पर भी सुरक्षा के नए कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं। आगामी महीनों में ओल्ड रेडिट का एक्सेस सिर्फ लॉग-इन किए हुए मॉडरेटरों और ऐसे यूज़र्स तक सीमित कर दिया जाएगा जिन्होंने पिछले 6 महीनों के भीतर इसका इस्तेमाल किया हो। पहले कंपनी ने यह समय सीमा 90 दिनों की तय की थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 6 महीने कर दिया गया। कंपनी के मुताबिक, यह पाबंदी भी अनधिकृत स्क्रेपिंग और ऑटोमेटेड ट्रैफिक को रोकने के लिए जरूरी थी।



















