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ध्रुवा डैम पर कॉलेज के बाद मोमोज बेचती हैं दो बहनें, आत्मनिर्भर बनकर खुद उठा रहीं पढ़ाई का खर्चझारखंड
24 अक्तू॰ 2026, 8:08 am (24 मिनट पहले)· 0

ध्रुवा डैम पर कॉलेज के बाद मोमोज बेचती हैं दो बहनें, आत्मनिर्भर बनकर खुद उठा रहीं पढ़ाई का खर्च

रांची की निशा और अनीशा ने इंटरनेट से मोमो बनाना सीखकर अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाने की ठानी और अब हर शाम महज तीन घंटे में उनके 500 से ज्यादा मोमोज बिक जाते हैं।

झारखंड की राजधानी रांची में ध्रुवा डैम के पास शाम ढलते ही एक छोटे से फूड स्टॉल पर लोगों की कतार लगनी शुरू हो जाती है। यह स्टॉल दो सगी बहनों, अनीशा और निशा का है, जो अपनी उच्च शिक्षा का पूरा खर्च खुद निकालने के लिए हर रोज शाम को बाजार में उतरती हैं। उनके पिता पेशे से राजमिस्त्री हैं और घर की आर्थिक तंगी को देखते हुए दोनों बहनों ने किसी के आगे हाथ फैलाने की बजाय खुद के पैरों पर खड़ा होने का फैसला किया। अनीशा इस समय इंटरमीडिएट की छात्रा हैं, जबकि उनकी बड़ी बहन निशा बीकॉम की पढ़ाई कर रही हैं।

यूट्यूब से सीखा मोमो बनाने का हुनर

व्यापार शुरू करने से पहले दोनों बहनों के पास मोमो बनाने का कोई पुराना अनुभव नहीं था। बाजार जैसा स्वाद और गुणवत्ता सीखने के लिए दोनों ने यूट्यूब का सहारा लिया। लगभग एक महीने तक लगातार अभ्यास करने के बाद उन्होंने बाजार की तरह जूसी, क्रिस्पी और टाइट फिलिंग वाले मोमोज तैयार करने की कला में महारत हासिल की। इसके साथ वे ग्राहकों को दो से तीन तरह की खास चटनी भी परोसती हैं, जिससे उनके मोमोज का स्वाद लोगों की जुबान पर चढ़ गया। दोनों बहनें अपने काम में स्वच्छता और हाइजीन का विशेष ध्यान रखती हैं, जिससे ग्राहकों का भरोसा तेजी से बढ़ा है।

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कॉलेज के बाद शुरू होती है कड़ी मेहनत की दिनचर्या

निशा और अनीशा की दिनचर्या बेहद व्यस्त और अनुशासित रहती है। दोपहर 2:00 बजे तक दोनों बहनें अपने कॉलेज में पढ़ाई करती हैं। कॉलेज खत्म होते ही वे सीधे घर पहुंचती हैं और मोमो तैयार करने की सामग्री जुटाने और पकाने की तैयारी में जुट जाती हैं। शाम 4:00 बजे तक ध्रुवा डैम के सामने उनका स्टॉल लग जाता है। स्वाद और साफ-सफाई की वजह से शाम 7:00 बजे तक, यानी केवल तीन घंटे के भीतर ही उनका सारा माल खत्म हो जाता है। अगर कोई ग्राहक 7:00 बजे के बाद पहुंचता है, तो उसे खाली हाथ ही लौटना पड़ता है।

दैनिक बिक्री और परिवार को आर्थिक संबल

निशा बताती हैं कि स्टॉल पर हर दिन कम से कम 500 पीस से अधिक मोमोज की बिक्री आसानी से हो जाती है। यहां एक प्लेट मोमो की कीमत 40 रुपये रखी गई है, जो आम लोगों की जेब के बिल्कुल अनुकूल है। इस कमाई से न केवल दोनों बहनों की कॉलेज की फीस और किताबों का खर्च आसानी से निकल रहा है, बल्कि वे घर के खर्चों में अपने पिता की आर्थिक मदद भी कर रही हैं। परिवार का पूरा समर्थन मिलने से घर की माली हालत पहले से काफी बेहतर हुई है। निशा का कहना है कि उनके सपने बहुत बड़े हैं और वे आगे चलकर जीवन में कुछ और बेहतर करना चाहती हैं, जिसके लिए वे पूरी शिद्दत से पसीना बहा रही हैं।

सवाल-जवाब

अनीशा और निशा का मोमो स्टॉल रांची में कहां स्थित है?
यह स्टॉल रांची के प्रसिद्ध ध्रुवा डैम के ठीक सामने शाम 4:00 बजे से लगाया जाता है।
दोनों बहनें कौन सी कक्षा में पढ़ाई कर रही हैं?
अनीशा इंटरमीडिएट की छात्रा हैं, जबकि उनकी बड़ी बहन निशा बीकॉम की पढ़ाई कर रही हैं।
उन्होंने मोमोज बनाना कहां से सीखा?
दोनों बहनों ने यूट्यूब वीडियो देखकर करीब एक महीने तक अभ्यास किया और फिर बाजार जैसा मोमो बनाना सीखा।
स्टॉल पर मोमोज की एक प्लेट की कीमत कितनी है?
उनके स्टॉल पर एक प्लेट मोमो की कीमत 40 रुपये रखी गई है।
प्रतिदिन कितने मोमोज की बिक्री हो जाती है?
स्टॉल पर हर दिन 500 से अधिक पीस मोमोज शाम 7:00 बजे तक पूरी तरह बिक जाते हैं।
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