टेक दिग्गज ऐप्पल ने सप्ताहांत में अपनी डेवलपर गाइडलाइंस को और अधिक सख्त बनाते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके आपत्तिजनक सामग्री तैयार करने वाले ऐप्स पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके साथ ही उन ऐप्स को भी निशाना बनाया गया है जो ऐप स्टोर की समीक्षा प्रक्रिया को पार करने के लिए खुद को सामान्य उपयोग वाले ऐप्स के रूप में पेश करते हैं और बाद में न्यूडिफाई ऐप्स में बदल जाते हैं या अपनी उन विशेषताओं को प्रमुखता से सामने लाते हैं।
कंपनी ने एआई और यूजर जनरेटेड कंटेंट से जुड़े नियमों में कड़े शब्दों को शामिल किया है। इसके तहत ऐप डेवलपर्स के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे आपत्तिजनक या आक्रामक सामग्री की निगरानी के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करें।
ऐप्पल ने अपनी एक ब्लॉग पोस्ट में स्पष्ट किया कि यूजर जनरेटेड कंटेंट की मेजबानी करने वाले ऐप्स के लिए आपत्तिजनक सामग्री को फ़िल्टर करना, उपयोगकर्ताओं को आपत्तिजनक सामग्री की रिपोर्ट करने का विकल्प देना और अपमानजनक खातों को ब्लॉक करने की सुविधा देना आवश्यक है। स्टोर पर छिपी हुई या बिना दस्तावेज़ वाली विशेषताओं वाले ऐप्स प्रतिबंधित हैं, जिसमें ऐसे ऐप्स भी शामिल हैं जो समीक्षा के दौरान अपने वास्तविक उद्देश्य को छिपाते हैं और अनुमोदन मिलने के बाद ही न्यूडिफ़िकेशन जैसी हानिकारक क्षमताओं को उजागर करते हैं। इस रणनीति को आमतौर पर बेट एंड स्विच कहा जाता है।
कंपनी की ओर से यह भी कहा गया है कि ऐप स्टोर समीक्षा के समय प्रस्तुत किए गए संस्करण में मौजूद न होने वाली विशेषताओं को बाद में जोड़ने वाले ऐप्स को सीधे तौर पर हटा दिया जाएगा।
आईफोन निर्माता कंपनी ने अपने कानूनी खंड की भाषा में भी बदलाव किया है ताकि इस बात को मजबूती से लागू किया जा सके कि मानव तस्करी और बाल शोषण को बढ़ावा देने वाले किसी भी ऐप को अनुमति नहीं दी जाएगी।
इससे पहले पिछले साल ऐप्पल ने जानकारी दी थी कि उसकी समीक्षा प्रक्रिया के माध्यम से धोखाधड़ी और दुरुपयोग के कारण 1,50,000 से अधिक ऐप्स को उपयोगकर्ताओं तक पहुँचने से रोका गया था और 1,93,000 डेवलपर खातों को हटाया गया था।
गौरतलब है कि जुलाई में सैन फ्रांसिस्को शहर के प्रशासन ने ऐप्पल और गूगल दोनों को अपने स्टोर से न्यूडिफ़िकेशन ऐप्स को हटाने और साफ़ करने का आदेश दिया था। सिटी अटॉर्नी डेविड चिउ ने दोनों कंपनियों पर इन ऐप्स से मिलने वाले स्टोर शुल्क के जरिए मुनाफा कमाने का आरोप लगाया था। इसके अलावा अप्रैल में टेक ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट की एक रिपोर्ट में सामने आया था कि दोनों तकनीकी दिग्गजों के स्टोर पर कई न्यूडिफाई ऐप्स मौजूद थे, जिनमें से कुछ को नाबालिगों के लिए भी उपयुक्त के रूप में रेट किया गया था।



















