अरुणाचल प्रदेश की खूबसूरत ज़ीरो घाटी में स्थानीय कारीगरों और बुनकरों को प्रोत्साहन देने के लिए पहली बार जनजातीय कारीगर एम्पैनलमेंट मेले का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्वदेशी हस्तशिल्प को बढ़ावा देना था। इस मेले में बड़ी संख्या में स्थानीय कारीगरों ने भाग लिया और अपने पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँच बनाने के अवसरों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
राष्ट्रीय बाज़ारों और ट्राइब्स इंडिया से जोड़ने की पहल
यह मेला भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास महासंघ यानी ट्राइफेड (TRIFED) के सहयोग से आयोजित किया गया था। मेले के दौरान भाग लेने वाले कारीगरों का औपचारिक रूप से एम्पैनलमेंट यानी पंजीकरण किया गया, जिससे उन्हें देश भर में फैले ट्राइब्स इंडिया आउटलेट्स और राष्ट्रीय विपणन मंचों से जोड़ा जाएगा। इस पहल से दूर-दराज के जनजातीय कारीगरों को स्थानीय बाज़ारों से बाहर निकलकर अपनी कला को बड़े व्यावसायिक मंचों और प्रदर्शनियों में बेचने का मौका मिलेगा। इससे न केवल उनके उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी और उन्हें उचित मूल्य मिलेगा, बल्कि केंद्र सरकार के 'वोकल फॉर लोकल' अभियान को भी मजबूती मिलेगी।
प्रशासनिक अधिकारी और आयोजक मंडल
मेले का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद निचले सुबनसिरी की उपायुक्त (डीसी) ओली परमे ने किया। वहीं, सहकारिता समितियों के उप रजिस्ट्रार (डीआरसीएस) हेज कोमो ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम के सुचारू संचालन का दायित्व वरिष्ठ कार्यक्रम कार्यकारी आसिफ इकबाल हुसैन और सहायक प्रबंधक प्रभा चौधरी ने निभाया। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों, जिनमें सहायक रजिस्ट्रार दानी यामांग और सुबनसिरी एलएएमपीएस के प्रबंध निदेशक ताखे ताडो शामिल थे, के साथ मिलकर इस मेले को सफल बनाया।
उत्पाद प्रदर्शनी और पंजीकरण की प्रक्रिया
मेले में स्थानीय कारीगरों ने पारंपरिक हैंडलूम वस्त्र, हस्तशिल्प कलाकृतियाँ और जैविक यानी ऑर्गेनिक उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की, जिसने अरुणाचल प्रदेश की पारंपरिक कला का बेहतरीन उदाहरण पेश किया। इसके साथ ही, आयोजकों ने कारीगरों को एम्पैनलमेंट की प्रक्रिया समझाई और पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी दी। पंजीकरण पूरा करने के लिए कारीगरों से वैध अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, बैंक पासबुक, पासपोर्ट साइज फोटो और उनके उत्पादों के भौतिक नमूने जमा कराए गए। इस व्यवस्था से कारीगरों के लिए भविष्य की व्यावसायिक प्रदर्शनियों में भाग लेने का रास्ता साफ हो गया है।





















