नेपाल में तिब्बत की ओर से अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के कारण भयंकर तबाही का मंजर बना हुआ है। अब तक इस त्रासदी में 350 से अधिक लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जबकि 900 से ज्यादा लोग लापता हैं। लापता लोगों में 290 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। भोटेकोशी नदी में आए इस भयंकर जलप्रलय ने नेपाल के आठ जिलों को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है। राहत और बचाव कार्यों के बीच गुरुवार, 27 अगस्त 2026 को नेपाल और पड़ोसी तिब्बत के इलाकों में भूकंप के झटकों ने लोगों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं। बाढ़ से पस्त इलाके में धरती हिलने से नागरिकों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।
नेपाल में 3.2 तीव्रता का भूकंप, 10 किलोमीटर गहराई में था केंद्र
नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार 27 अगस्त 2026 की रात नेपाल के कुछ हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 3.2 दर्ज की गई। भूकंप का समय रात 9 बजकर 18 मिनट दर्ज किया गया, और इसका केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर नीचे स्थित था। हालांकि कम तीव्रता के कारण भूकंप से किसी बड़े प्रत्यक्ष नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन लगातार आ रही प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे स्थानीय लोगों के बीच दहशत का माहौल बन गया है। भूकंप के इन आंकड़ों की पुष्टि के लिए एक्स पर पोस्ट की गई आधिकारिक जानकारी भी जारी की गई है।
तिब्बत क्षेत्र में आया 4.9 तीव्रता का तेज भूकंप
नेपाल में झटके महसूस होने से कुछ समय पहले ही पड़ोसी तिब्बत के इलाके में भी भूकंप का तेज झटका दर्ज किया गया था। सिस्मोलॉजी सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक तिब्बत में गुरुवार रात 8 बजकर 15 मिनट पर यह भूकंप आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.9 मापी गई। इस भूकंप का केंद्र भी धरती की सतह से 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। हिमालयी क्षेत्र में बार-बार हो रही ऐसी भूगर्भीय हलचलों ने वैज्ञानिकों और प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि बाढ़ की विभीषिका झेल रहे इस पहाड़ी इलाके की भूगर्भीय संरचना काफी संवेदनशील बनी हुई है। तिब्बत में आए इस भूकंप की विस्तृत जानकारी के लिए एक्स पर पोस्ट जारी किया गया है।
ग्लेशियर टूटने से भोटेकोशी नदी में कैसे मची तबाही?
नेपाल और तिब्बत की सीमा पर स्थित लैंगटांग लिरुंग पर्वत श्रृंखला में अचानक हुए ग्लेशियर हादसे ने इस भारी तबाही को जन्म दिया। लगभग 5200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का एक विशाल हिस्सा टूटकर नीचे घाटी में आ गिरा। ग्लेशियर के निचले हिस्से के लगभग 1200 मीटर नीचे गिरने से भारी मात्रा में बर्फ, कीचड़ और मलबे का ढेर लग गया, जिसने ल्हेंडे नदी के प्राकृतिक प्रवाह को अवरुद्ध कर दिया। नदी का पानी रुकने से वहां एक बड़ा अस्थायी बांध बन गया। लगातार पानी जमा होने से उस पर अत्यधिक दबाव बनता गया। आखिरकार, पानी का दबाव न झेल पाने के कारण यह अस्थायी बांध अचानक टूट गया। इसके परिणाम स्वरूप विशालकाय मलबे और पानी का तीव्र सैलाब निचले क्षेत्रों की ओर तेजी से बह निकला।
त्रिशूली नदी में अचानक बढ़ा जलस्तर, नुवाकोट और रसुवा में भारी नुकसान
ल्हेंडे नदी तिब्बत से निकलने वाली एक सहायक नदी है, जो नेपाल-चीन सीमा के समीप रसुवागढ़ी और तिमुरे के पास भोटेकोशी नदी में मिलती है। ग्लेशियर का पूरा मलबा और पानी भोटेकोशी नदी में प्रविष्ट हुआ, जो तिब्बत से नेपाल में प्रवेश करती है और रसुवा जिले से होकर बहती है। आगे चलकर यह भोटेकोशी नदी त्रिशूली नदी में जाकर मिलती है। इस कारण पूरा उफान त्रिशूली नदी में पहुंच गया। केवल 30 मिनट के भीतर त्रिशूली नदी का जलस्तर 7 से 9 मीटर तक बढ़ गया, जिससे रसुवा और नुवाकोट जिलों में अभूतपूर्व तबाही हुई। आठ जिलों में घर, सड़कें और पुल बह गए, जिससे राहत कार्यों में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।



















