पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी सीमावर्ती इलाके में टीकाकरण अभियान के दौरान तैनात सुरक्षाकर्मियों पर मंगलवार को अचानक जानलेवा हमला हुआ। अफगानिस्तान सीमा से सटे खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मोहम्मंद जिले में घर-घर जाकर पोलियो की खुराक पिलाने वाली स्वास्थ्य टीम की सुरक्षा संभाल रहे दो पुलिसकर्मियों को दोपहिया वाहन पर आए संदिग्ध आतंकवादियों ने गोलियां मारकर मौत के घाट उतार दिया। इस गोलीबारी की चपेट में आकर एक अन्य पुलिस जवान गंभीर रूप से घायल हो गया।
ड्यूटी पर जा रहे दस्ते पर अचानक अंधाधुंध गोलीबारी
स्थानीय पुलिस अधिकारी अयाज खान के अनुसार, पुलिसकर्मी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के दल को सुरक्षा देने के लिए पास के एक गांव की तरफ जा रहे थे। उसी दौरान रास्ते में घात लगाए हमलावरों ने उन पर अचानक गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। हमले को अंजाम देने के तुरंत बाद हमलावर मौके से भाग निकले। इस खूनी वारदात के तुरंत बाद किसी भी विद्रोही या आतंकवादी गुट ने हमले की सीधी जिम्मेदारी नहीं ली है।
टीकाकरण टीमों को निशाना बनाने के पीछे की दुर्भावना
अयाज खान ने इस बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि पाकिस्तानी तालिबान और उससे जुड़े अन्य चरमपंथी गिरोह अक्सर इस प्रकार के पोलियो उन्मूलन अभियानों को अपना निशाना बनाते रहे हैं। वे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और उनकी हिफाजत के लिए तैनात पुलिस बल पर लगातार हमले करते हैं। इन चरमपंथी संगठनों द्वारा समाज में यह मनगढ़ंत और झूठा प्रचार किया जाता है कि बच्चों को दी जाने वाली पोलियो की दवा दरअसल पश्चिमी देशों की एक साजिश है, जिसका मकसद बच्चों को बांझ बनाना है।
अफवाहों से खड़ा होता भारी सामाजिक विरोध
टीकाकरण मुहिम को लेकर दूरदराज के इलाकों में जाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को लंबे समय से इस तरह के दुष्प्रचार का सामना करना पड़ता है। इलाके में जानबूझकर फैलाई जाने वाली अफवाहों में यह दावा किया जाता है कि पोलियो की दवा मुस्लिम बच्चों को नपुंसक बनाने का जरिया है। इस निराधार झूठ के चलते रूढ़िवादी आबादी के बीच टीमों को तीखे विरोध का सामना करना पड़ता है, जिससे स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा बेहद जोखिम भरी बन जाती है।
हमले पर सरकार का रुख
इस्लामाबाद में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने इस हिंसक वारदात की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे असहनीय करार दिया। मोहसिन नकवी ने कर्तव्य पथ पर जान गंवाने वाले दोनों पुलिसकर्मियों के परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। गृह मंत्री ने रेखांकित किया कि ये सुरक्षाकर्मी देश की आने वाली पीढ़ी के स्वस्थ भविष्य की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे थे।
देशभर में 2.4 करोड़ बच्चों को खुराक देने का लक्ष्य
इस जानलेवा हमले से ठीक एक दिन पहले, सोमवार को पाकिस्तान सरकार ने इस संक्रामक बीमारी को जड़ से मिटाने के संकल्प के साथ 2.4 करोड़ बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाने का राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पूरी दुनिया में अब केवल पाकिस्तान और उसका पड़ोसी मुल्क अफगानिस्तान ही ऐसे दो देश बचे हैं, जहां पोलियो का जंगली वायरस आज भी स्थानिक रूप से मौजूद है और पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है।
स्वास्थ्यकर्मियों के सामने लगातार बना हुआ जान का खतरा
खैबर पख्तूनख्वा और आसपास के इलाकों में पोलियो अभियान से जुड़े रहना भारी जानलेवा जोखिम का काम बन चुका है। अतीत में भी इस प्रांत के भीतर हिंसक घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां अज्ञात हथियारबंद तत्वों ने टीकाकरण करने वाले दो कर्मियों का अपहरण कर लिया था। सुरक्षा बलों और स्वास्थ्य टीमों पर लगातार होते ऐसे हमलों के बीच पाकिस्तान पोलियो उन्मूलन की जटिल और खतरनाक जंग लड़ रहा है।



















