पूर्वी चीन में बीते कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने भूस्खलन को जन्म दे दिया है। ट्रॉपिकल साइक्लोन साउडेल के असर से बरसे पानी की वजह से जमीन धंसने से कम से कम 2 लोगों की जान चली गई, जबकि 10 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। रविवार को सरकारी मीडिया ने बताया कि इस हादसे में करीब 12 घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।
सुइचुआन में गांव का हिस्सा मलबे में तब्दील
अधिकारियों की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, जियांग्शी प्रांत के सुइचुआन काउंटी में स्थित एक गांव का एक हिस्सा शनिवार सुबह अचानक भूस्खलन की चपेट में आ गया। हादसे की सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंच गईं। आगे और नुकसान की आशंका को देखते हुए आसपास रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया गया।
मलबे से एक शव और दो जिंदा लोग निकाले गए
बचाव दल ने मलबा हटाने के दौरान एक व्यक्ति को बाहर निकाला, लेकिन उसकी पहले ही मौत हो चुकी थी। वहीं दो अन्य लोगों को सही सलामत बाहर निकाल लिया गया और अब उनकी हालत ठीक बताई जा रही है। सरकारी प्रसारक सीसीटीवी के अनुसार रविवार सुबह बचावकर्मियों को लापता लोगों में से एक और शख्स मिला, मगर तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं।
साउडेल की यह तीसरी दस्तक थी
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के हवाले से पता चला है कि चक्रवात साउडेल ने 28 अगस्त को झेजियांग प्रांत के तट पर दो बार लैंडफॉल किया था। इसके कुछ दिन बाद गुरुवार को यह उष्णकटिबंधीय तूफान के स्वरूप में फुजियान प्रांत के तट से तीसरी बार टकराया। जियांग्शी, झेजियांग और फुजियान तीनों आपस में पड़ोसी प्रांत हैं, इसलिए एक के बाद एक हुई इन दस्तकों का असर पूरे इलाके में लगातार भारी बारिश के तौर पर देखने को मिला।
फुजियान में सैकड़ों घर धराशायी
शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक फुजियान के लोकल प्रशासन ने बताया कि लगातार कई दिनों तक हुई भारी बारिश के बाद वहां भी कई लोग लापता हो गए हैं, हालांकि लापता लोगों की सही गिनती अभी सामने नहीं आई है। पुतियान शहर के हुआतिंग कस्बे में तो 100 से ज्यादा मकान पूरी तरह ढह गए। गुरुवार दोपहर एक तटबंध पर पानी का दबाव इतना बढ़ गया कि वह ऊपर से बहने लगा और आखिरकार टूट गया, जिससे आसपास के कई गांवों में पानी भर गया और लोग वहीं फंस गए।
छह लाख लोगों को पहुंचाया गया सुरक्षित स्थानों पर
हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। शुक्रवार रात तक समंदर किनारे और जमीन पर मौजूद खतरे वाले इलाकों से करीब 6 लाख लोगों को निकालकर सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिया गया था। बता दें कि इससे पहले नेपाल में भी एक बड़ा भूस्खलन देखने को मिला था, जिससे वहां नदी का बहाव आंशिक रूप से बाधित हो गया था और प्रशासन को हाई अलर्ट जारी करना पड़ा था।


















