काठमांडू घाटी और आसपास के क्षेत्रों में बुधवार को नेपाल-तिब्बत सीमा के करीब एक ग्लेशियर टूटने की वजह से आई आपदा ने भारी तबाही मचाई है। बर्फ और चट्टानों के बड़े मलबे के साथ पानी तथा कीचड़ की उफनती धारा मध्य नेपाल के कई इलाकों में फैल गई। इस कुदरती कहर के चलते कस्बों और गांवों में बड़े पैमाने पर बर्बादी हुई है। इस भयंकर बाढ़ के पानी में अनगिनत घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए हैं, जबकि कई प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी क्षति पहुंची है। इस संकट के इस दौर में नेपाल के शीर्ष नेतृत्व ने भारत द्वारा दिए जा रहे सहयोग के लिए आभार जताया है।
बचाव अभियान और लापता लोगों की तलाश
आपदा के बाद से ही प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं। नेपाल के विभिन्न हिस्सों में रुक-रुककर हो रही मूसलाधार बारिश के बावजूद बचाव दल लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस दर्दनाक आपदा में अब भी लगभग 2,400 लोग लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है। वहीं, इस विकट स्थिति में अब तक 2,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है, जबकि इस महाआपदा की चपेट में आने से 600 से अधिक लोगों की जान चली गई है।
भारत की ओर से भेजी गई राहत सामग्री और विशेषज्ञ टीम
संकट की इस घड़ी में पड़ोसी देश भारत ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाते हुए बुधवार से अब तक कुल 57.6 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी है। इसके अलावा काठमांडू के आधिकारिक अनुरोध पर भारत से 11 सदस्यों का एक विशेष सहायता दल भी नेपाल पहुंच गया है। इस भारतीय दल में चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ-साथ सुरंगों के भीतर बचाव अभियान चलाने में दक्ष पेशेवर भी शामिल हैं। यह दल स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत कार्यों को गति दे रहा है और अपनी विशेषज्ञता से अभियानों में मदद कर रहा है। वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने मौजूदा संकट से निपटने के लिए कई चरणों की रूपरेखा साझा की है। उन्होंने एक्स पर साझा की गई जानकारियों के मुताबिक बताया कि उनकी प्राथमिकता अभी भी उन लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की है जिन्हें बचाया जा सकता है, जिसमें जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे लोग भी शामिल हैं।
पुनर्निर्माण और राहत के अगले चरण की चुनौतियां
नेपाल सेना के जवानों ने अब तक हवाई मार्ग के जरिए 1,930 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया है। वहीं, सड़क मार्ग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त होने के कारण धुंचे, रसुवा और स्याफ्रुबेसी जैसे दुर्गम इलाकों में हेलीकॉप्टरों के माध्यम से राहत सामग्रियां पहुंचाई जा रही हैं। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि तात्कालिक बचाव कार्यों के पूरा होने के बाद फौरन राहत और शुरुआती पुनर्वास का दौर शुरू होगा, जिसमें प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी आश्रय स्थलों का निर्माण और काम के बदले मजदूरी जैसी योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा। इसके बाद बाढ़ से पूरी तरह तबाह हुए बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण की बहुत बड़ी चुनौती देश के सामने खड़ी होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की उदारता का जिक्र
जब वित्त मंत्री से यह सवाल किया गया कि क्या नेपाल अन्य देशों से भी मदद की गुहार लगाएगा, तो उन्होंने साफ किया कि आवश्यकता पड़ने पर ऐसा किया जाएगा, लेकिन उन्होंने भारत के सहयोग को सर्वोपरि बताते हुए इसकी विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेहद उदार रहे हैं, और जब साल 2015 में विनाशकारी भूकंप आया था, तब भी वह सरकार का हिस्सा थे और उन्हें भली-भांति याद है कि तब नई दिल्ली की तरफ से कितनी remarkable उदारता दिखाई गई थी। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आपदा के तत्काल बाद भारत ने विशेष राहत सामग्री विमानों के जरिए भेजी और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए भी बहुत उदार सहायता देने का संकेत दिया है। इसके साथ ही उन्होंने अन्य पड़ोसी देशों से भी मिल रहे सहयोग का जिक्र किया।
राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल द्वारा आभार व्यक्त
नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने इस हालिया आपदा के दौरान भारत की ओर से दिखाई गई एकजुटता और सहायता के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तथा भारत सरकार का हृदय से धन्यवाद किया है। एक्स पर जारी अपने संदेश में उन्होंने कहा कि नेपाल सरकार और यहां की पूरी जनता की तरफ से वह राष्ट्रपति मुर्मू की गहरी चिंता और भारत द्वारा उपलब्ध कराई गई उदार सहायता के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं। इसके साथ ही राष्ट्रपति पौडेल ने 26 अगस्त 2026 की इस आपदा के दौरान कुछ भारतीय नागरिकों की भी असामयिक मौत पर गहरा शोक जताया। उन्होंने भारत सरकार और वहां के नागरिकों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि इस त्रासदी में जान गंवाने वाले भारतीयों का गम नेपाल के लोग भी महसूस कर रहे हैं।
सुरक्षा बलों की तैनाती और प्रशासन के समक्ष कठिनाइयां
नेपाल के हुक्मरानों और स्थानीय प्रशासन के सामने इस समय लापता नागरिकों को खोजना, मलबे में फंसे लोगों को निकालना और दूर-दराज के कटे हुए इलाकों तक भोजन व दवाइयां पहुंचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है। बुनियादी ढांचे के भारी नुकसान के कारण यह पुनर्निर्माण प्रक्रिया काफी लंबी और जटिल होने के आसार हैं। इस बड़े राहत और तलाश अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए नेपाल सरकार ने 11 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को मैदान में उतारा है, जिनमें अकेले नेपाल सेना के 5 हजार से अधिक जवान मुस्तैदी से काम कर रहे हैं।



















