काठमांडू में प्राकृतिक आपदा के प्रकोप के बीच बचाव और राहत कार्यों का सिलसिला बेहद तेज गति से आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में नुवाकोट के त्रिशूली स्थित कृषि विकास बैंक की शाखा से लगभग 50 करोड़ रुपये का सोना और डेढ़ करोड़ रुपये नकद सुरक्षित बरामद किए गए हैं। भोटेकोशी नदी में आए भयंकर उफान के कारण बैंक की यह शाखा पूरी तरह जलमग्न हो गई थी। स्थानीय पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, रविवार को करीब 8 घंटे तक लगातार चले रेस्क्यू अभियान के बाद बैंक के भीतर से यह कीमती सामान, नकदी और अन्य जरूरी दस्तावेज बाहर निकाले जा सके। बाढ़ प्रभावित इस इलाके में बचाव टीमों ने बेहद सावधानी के साथ इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया।
8 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मिली सफलता
नुवाकोट के त्रिशूली इलाके में स्थित कृषि विकास बैंक की यह शाखा भोटेकोशी नदी के तट के बेहद करीब है। गत 26 अगस्त को आए विनाशकारी सैलाब ने इस पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी, जिसकी चपेट में बैंक की यह इमारत भी आ गई थी। शुरुआती दौर में इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि नदी के तेज बहाव में बैंक के भीतर रखा सोना, चांदी और नकदी पूरी तरह बह गए होंगे। हालांकि, पानी का स्तर कम होने और बाढ़ का प्रभाव घटने के बाद जब बचाव दल ने बैंक परिसर की गहन तलाशी ली, तो वहां रखा भारी खजाना सुरक्षित मिल गया। करीब 8 घंटे की लगातार मशक्कत के बाद प्रशासन को यह बड़ी सफलता हासिल हुई। अधिकारियों ने बताया कि इस भारी मात्रा में बरामद किए गए सोने और नकदी को पूरी सुरक्षा के साथ एक सुरक्षित ठिकाने पर स्थानांतरित कर दिया गया है।
आपदा में 800 से ज्यादा लोगों की मौत और राहत कार्य
दूसरी ओर, नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने देश के भीतर पिछले पांच दिनों से जारी इस भीषण प्राकृतिक संकट को लेकर राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों का एक विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक किया है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि रसुवा की भोटेकोशी नदी में आई प्रलयकारी बाढ़ के कारण हुई जानमाल और बुनियादी ढांचे की क्षति का पूरा आकलन करना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। बेहद प्रतिकूल मौसम, कठिन भौगोलिक बनावट और लगातार मंडराते खतरों के बावजूद सरकार नागरिकों की अमूल्य जिंदगियां बचाने के लिए पूरी ताकत से जुटी हुई है। इस आपदा में अब तक करीब 800 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवानों की सहायता से बरामद शवों का नियमानुसार प्रबंधन किया जा रहा है। जिन शवों की पहचान सुनिश्चित हो चुकी है, उन्हें उनके शोकाकुल परिजनों को सौंपा जा रहा है। वहीं जिनकी शिनाख्त नहीं हो पाई है, उनके मामलों में डीएनए नमूनों समेत पहचान से जुड़े तमाम साक्ष्यों को पूरी सुरक्षा के साथ संरक्षित करते हुए कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।
हजारों लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए व्यापक अभियान
प्रधानमंत्री शाह के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अब तक कुल 9,435 नागरिकों को हवाई मार्गों और सड़क मार्गों के जरिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा चुका है। जरूरतमंदों तक राहत पहुंचाने और फंसे लोगों को निकालने के लिए अब तक कुल 394 उड़ानों का संचालन किया गया है, जिनमें अकेले रविवार के दिन की 72 उड़ानें भी शामिल हैं। इन तमाम प्रभावित इलाकों में कानून व्यवस्था और बचाव कार्यों को सुचारू रखने के लिए नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के कुल 20,618 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है।
जलविद्युत परियोजनाओं में बचाव अभियान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
विभिन्न जलविद्युत परियोजना क्षेत्रों से भी लोगों को बाहर निकालने का काम जारी है। नेपाली सेना के हेलीकॉप्टरों की मदद से इन पॉवर प्रोजेक्ट्स से कुल 279 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। रसुवा स्थित अपर त्रिशूली-1 परियोजना के आसपास भारतीय विशेषज्ञ जांच टीम के सहयोग से महज दो दिनों के भीतर 250 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। भारत के अलावा चीनी और कोरियाई विशेषज्ञ दल भी नेपाली सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर राहत अभियानों में जुटे हुए हैं।
भारतीय विशेषज्ञों की टीम सुरंग के भीतर लगभग तीन किलोमीटर की गहराई तक जाकर खोजबीन कर रही है। इसके अलावा नुवाकोट की अपर त्रिशूली-3 ‘ए' परियोजना की सुरंग के भीतर भी रेस्क्यू ऑपरेशन पूरी रफ्तार से चलाया जा रहा है। नेपाली सेना के इंजीनियर नियंत्रित ब्लास्टिंग के जरिए रास्ता साफ करने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। सेना, सशस्त्र पुलिस के प्रशिक्षित श्वानों और नेपाल पुलिस के विशेषज्ञों समेत कुल 90 लोगों की एक संयुक्त टीम इस मोर्चे पर तैनात है।
सुरंग के अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए दो बाई तीन फीट का एक छोटा छेद भी बनाया गया था, लेकिन भीतर की तरफ से किसी भी तरह की प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद भारी मशीनरी उपकरणों, ब्लास्टिंग और सुरंग को चौड़ा करने की प्रक्रिया को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके साथ ही अपर त्रिशूली-3 ‘बी', चिलिमे, लांगटांग खोला और मैलुंग खोला जलविद्युत परियोजनाओं में भी युद्धस्तर पर बचाव अभियान जारी हैं। इन तमाम अभियानों में भारतीय विशेषज्ञ दल नेपाली सेना के साथ मिलकर आपसी तालमेल के साथ काम कर रहे हैं। बाढ़ की चपेट में आए इलाकों से कुल 267 घायल नागरिकों को निकालकर स्थानीय अस्पतालों के साथ-साथ काठमांडू के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से 156 लोग उपचार के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं। प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और मनोपरामर्श के लिए काठमांडू से विशेष डॉक्टरों की टीमें भी भेजी गई हैं।



















