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शाम के नाश्ते में बनाएं मिथिलांचल स्टाइल कद्दू की कचरी, चूड़ा फ्राई के साथ चखें अनोखा स्वादखानपान
31 अग॰ 2026, 12:31 pm (54 मिनट पहले)· 2

शाम के नाश्ते में बनाएं मिथिलांचल स्टाइल कद्दू की कचरी, चूड़ा फ्राई के साथ चखें अनोखा स्वाद

पारंपरिक प्याज या आलू के पकौड़ों की जगह इस सीजन मिथिलांचल की प्रसिद्ध कद्दू की कचरी ट्राई करें। कद्दूकस की हुई लौकी, बेसन और चावल के आटे से तैयार यह नाश्ता चूड़ा फ्राई के साथ बेहद स्वादिष्ट लगता है।

चाय के साथ आमतौर पर आलू, प्याज या फिर पनीर के पकौड़े खूब खाए जाते हैं, लेकिन अगर आप एक ही तरह के स्वाद से ऊब चुके हैं तो मिथिलांचल की खास पारंपरिक रेसिपी आपकी शाम के नाश्ते को बेहद लजीज बना सकती है। मधुबनी की गृहिणी अंजू देवी के अनुसार, लौकी यानी कद्दू के ताजे मौसम में इसके क्रिस्पी पकौड़े बनाना बेहद आसान और बेहतरीन विकल्प है। स्थानीय मैथिली बोली में इन स्वादिष्‍ट पकौड़ों को कचरी के नाम से जाना जाता है। इसे न सिर्फ झटपट तैयार किया जा सकता है, बल्कि यह स्वाद और सेहत दोनों के लिहाज से एक नया जायका पेश करता है।

स्वादिष्ट कचरी के लिए जरूरी सामग्री और तैयारी

इस मिथिलांचल स्टाइल पकौड़े को बनाने की शुरुआत कद्दू की सही तैयारी से होती है। सबसे पहले ताजे कद्दू का छिलका अच्छी तरह से उतार लें और उसे कद्दूकस कर लें। अब इस कद्दूकस किए हुए कद्दू में बारीक कटी हुई हरी मिर्च और ताजा हरा धनिया मिलाएं। मसालों के रूप में इसमें स्वादानुसार नमक, हल्दी पाउडर और लाल मिर्च पाउडर डाला जाता है। बाइंडिंग के लिए इसमें बेसन मिलाया जाता है। अगर आप पकौड़ों को बाजार जैसा अतिरिक्त कुरकुरा बनाना चाहते हैं, तो बेसन के साथ थोड़ा सा चावल का पिसा हुआ आटा मिलाना एक बेहद कारगर तरीका है। इसके अलावा, जायके को और अधिक चटपटा और खुशबूदार बनाने के लिए आप कुटा हुआ अदरक, लहसुन और बारीक हरी मिर्च का पेस्ट भी इस मिश्रण में शामिल कर सकते हैं।

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डीप फ्राई करने का तरीका

सभी सामग्रियों को एक साथ मिलाकर एक गाढ़ा मिश्रण तैयार कर लें। कड़ाही में पर्याप्त तेल गर्म करें और जब तेल अच्छी तरह गर्म हो जाए, तब तैयार मिश्रण से छोटे-छोटे पकौड़े बनाकर कड़ाही में डालें। इन्हें मध्यम आंच पर तब तक डीप फ्राई करें जब तक कि पकौड़ों का रंग सुनहरा और बाहरी परत एकदम क्रंची न हो जाए। कद्दू में मौजूद प्राकृतिक नमी के कारण यह अंदर से नरम और बाहर से बेहद कुरकुरे बनते हैं। सही तापमान पर तलने के बाद इन्हें तेल से बाहर निकाल लें और गरमागरम परोसें।

परोसने के विभिन्न तरीके और अनोखी खासियतें

मिथिलांचल में इन कद्दू के पकौड़ों को खाने का अपना एक अलग अंदाज है। इन्हें अक्सर फ्राई किए हुए चूड़े के साथ नाश्ते में परोसा जाता है, जो इसका स्वाद दोगुना कर देता है। इसके अलावा, जो लोग हल्का या पूरा भोजन करना चाहते हैं, वे इसे गर्म रोटियों के साथ भी खा सकते हैं। यही नहीं, इन पकौड़ों का इस्तेमाल कढ़ी या रसेदार सब्जी बनाने में भी किया जाता है, जिसे चावल या रोटी के साथ आसानी से खाया जा सकता है। इस डिश की एक बड़ी खासियत यह है कि यह बिना प्याज के भी बेहद स्वादिष्ट बनती है, इसलिए जो लोग शुद्ध शाकाहारी भोजन पसंद करते हैं या प्याज नहीं खाते, उनके लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है। बच्चों के टिफिन के लिए भी यह एक बढ़िया आईडिया है, क्योंकि जो बच्चे आमतौर पर कद्दू की सब्जी खाने से कतराते हैं, वे भी इन क्रिस्पी पकौड़ों को बड़े चाव से खा लेते हैं।

सवाल-जवाब

कद्दू के पकौड़ों को स्थानीय भाषा में क्या कहा जाता है?
मिथिलांचल की मैथिली भाषा में इन कद्दू के पकौड़ों को 'कचरी' कहा जाता है।
पकौड़ों को अधिक कुरकुरा (क्रिस्पी) बनाने के लिए क्या मिलाना चाहिए?
बेसन के साथ थोड़ा सा चावल का पिसा हुआ आटा मिलाने से पकौड़े अधिक कुरकुरा बनते हैं।
इन पकौड़ों को किस नाश्ते के साथ परोसना पारंपरिक माना जाता है?
मिथिलांचल में इन पकौड़ों को मुख्य रूप से फ्राई किए हुए चूड़े (पोहा) के साथ परोसा जाता है।
क्या यह डिश बिना प्याज के बनाई जा सकती है?
हां, इस रेसिपी में बिल्कुल भी प्याज का इस्तेमाल नहीं होता, इसलिए यह शुद्ध शाकाहारी और सात्विक आहार के अनुकूल है।
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