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गंभीर खाद्य संकट से जूझ रहे शीर्ष 10 देशों में पाकिस्तान शामिल, करोड़ों नागरिकों पर भुखमरी का सायाएशिया
18 अक्तू॰ 2026, 2:53 am (1 घंटे पहले)· 0

गंभीर खाद्य संकट से जूझ रहे शीर्ष 10 देशों में पाकिस्तान शामिल, करोड़ों नागरिकों पर भुखमरी का साया

वैश्विक मानवीय आकलन के अनुसार पाकिस्तान दुनिया के दस सबसे भीषण खाद्य संकट वाले राष्ट्रों में शामिल हो गया है, जहाँ 2026 में 1.06 करोड़ से अधिक लोगों को तत्काल सहायता की आवश्यकता होगी।

गहराते आर्थिक गतिरोध और कुदरती मार के बीच पाकिस्तान में भुखमरी की समस्या गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। विश्व खाद्य दिवस से ठीक पहले सामने आए अंतरराष्ट्रीय आकलन 'टेन लार्जेस्ट ग्लोबल फूड क्राइसिस' में पाकिस्तान को दुनिया के उन दस प्रमुख देशों में शामिल किया गया है, जहाँ के लोग सबसे विकट भोजन अभाव का सामना कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता संस्था एक्शन अगेंस्ट हंगर के निष्कर्षों के अनुसार, व्यापक कंगाली, चरम मौसम और अंतरराष्ट्रीय राहत कोष में कमी के सम्मिलित प्रहार से मुल्क के करोड़ों बाशिंदों के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना मुश्किल हो गया है।

वर्ष 2026 में 1.06 करोड़ लोगों को तत्काल मानवीय मदद की दरकार

इस आकलन में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2026 के दौरान पाकिस्तान में करीब 1.06 करोड़ व्यक्तियों को अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए आपात मानवीय सहायता की आवश्यकता पड़ेगी। यह चिंताजनक स्थिति ऐसे दौर में भी बरकरार है जब देश के भीतर वृहद आर्थिक सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं और कुछ चुनिंदा वित्तीय पैमानों पर मामूली बेहतरी दर्ज हुई है। इसके विपरीत, इन सांख्यिकीय सुधारों का लाभ समाज के सबसे निचले तबके, विशेषकर कमजोर और निर्धन तबकों तक पहुंचने में नाकाम रहा है। अर्थव्यवस्था के कुछ क्षेत्रों में स्थिरता की बातों के बावजूद आम नागरिकों के लिए दैनिक गुजर-बसर का संकट बदस्तूर गहराता जा रहा है।

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दुनिया भर के दस सबसे भीषण भूख संकट वाले राष्ट्र

वैश्विक भूख और पोषण सुरक्षा के विश्लेषण में दस ऐसे देशों को रेखांकित किया गया है, जहाँ दुनिया की खाद्य असुरक्षा का सबसे घना जमावड़ा मौजूद है। इन शीर्ष दस देशों में लगभग 17.7 करोड़ आबादी इस भयंकर संकट के साए में जी रही है। ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले दस वर्षों के दौरान अत्यंत गंभीर भुखमरी से त्रस्त लोगों की संख्या दोगुनी हो चुकी है। खाद्य सुरक्षा के लिहाज से सबसे बदहाल इन दस देशों की सूची इस प्रकार है

  • नाइजीरिया
  • डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो
  • सूडान
  • यमन
  • अफगानिस्तान
  • म्यांमार
  • बांग्लादेश
  • पाकिस्तान
  • दक्षिण सूडान
  • सीरिया

विश्व के 47 देशों में 26.6 करोड़ नागरिक गंभीर भूख के शिकार

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाद्य सुरक्षा की तस्वीर बेहद भयावह दिखाई दे रही है, जहाँ 47 राष्ट्रों में लगभग 26.6 करोड़ लोग गंभीर भूख की मार झेल रहे हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि इतनी बड़ी वैश्विक आबादी अपने शरीर के लिए जरूरी न्यूनतम कैलोरी और पोषक तत्वों से वंचित है। आवश्यक वस्तुओं की आसमान छूती कीमतों के चलते सबसे भारी आघात सीमित आमदनी वाले परिवारों पर हुआ है, जो बुनियादी खाद्य पदार्थों को खरीदने में भी पूरी तरह असमर्थ साबित हो रहे हैं। वैश्विक स्तर पर मानवीय सहायता के बजट में आई रुकावटों ने इस आपात स्थिति को और अधिक जानलेवा बना दिया है।

महंगाई, बेरोजगारी और कमजोर घरेलू आमदनी का दोहरा वार

पाकिस्तान के आंतरिक हालात पर नजर डालें तो बुनियादी खाद्य पदार्थों के बेतहाशा बढ़े हुए दाम, घरेलू दैनिक लागतों में तीव्र उछाल, चौतरफा बेरोजगारी और लगातार घटती वास्तविक आय ने भुखमरी के इस चक्र को बेकाबू कर दिया है। लगातार बनी हुई आर्थिक अस्थिरता के कारण सामान्य परिवारों की रोजमर्रा की बुनियादी खरीद क्षमता घट गई है। इसके साथ ही कृषि जिंसों के अनपेक्षित और प्रतिकूल बाजार भावों ने सीधे तौर पर ग्रामीण काश्तकारों और कृषि कार्य से जुड़े मजदूरों की आजीविका को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे निचले तबके के घर पूरी तरह टूट चुके हैं।

खर्च संभालने के लिए भोजन में कटौती और संपत्तियों की बिक्री

विदेशी मदद और मानवीय राहत अनुदान की उपलब्धता जरूरतमंदों की भारी तादाद की तुलना में काफी कम पड़ रही है। इस आर्थिक विवशता के चलते लाखों परिवार अपना पेट भरने के लिए दैनिक भोजन की खुराक घटाने पर विवश हो रहे हैं। कई परिवार तो अपना चूल्हा जलाने के लिए अपनी उत्पादक परिसंपत्तियों और आजीविका के बुनियादी साधनों को औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हैं। जीवन यापन के इस असहनीय दबाव के कारण माता-पिता अपने बच्चों को स्कूलों से निकालने लगे हैं ताकि घरेलू खर्चों को सीमित किया जा सके। आपातकालीन कदम के रूप में यह उपाय क्षणिक राहत भले दें, लेकिन भविष्य में यह पीढ़ीगत गरीबी, स्थायी कुपोषण और तालीम से पूर्ण बेदखली के गंभीर संकट को जन्म दे रहे हैं।

स्वास्थ्य तंत्र, पोषण सेवा और स्वच्छ पेयजल का घोर अभाव

पाकिस्तान के दूरदराज के ग्रामीण इलाकों और प्राकृतिक विपदाओं से तबाह क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं, विशेष पोषण परियोजनाओं, पीने के साफ पानी, स्वच्छता सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा तंत्र की पहुंच बेहद कमजोर है। बुनियादी जीवनरक्षक सुविधाओं के इस अभाव ने बच्चों और महिलाओं के पोषण व स्वास्थ्य को अत्यंत संवेदनशील स्तर पर ला खड़ा किया है। आजीविका संबंधी राहत पैकेजों और अनिवार्य जनसेवाओं में की गई कटौती ने आपदा ग्रस्त बस्तियों के अपने पैरों पर दोबारा खड़े होने की संभावनाओं को लगभग समाप्त कर दिया है।

प्राकृतिक आपदाओं और अनियंत्रित मौसम का कहर

जलवायु परिवर्तन के झटके पाकिस्तान की समूची खाद्य व्यवस्था की कमर तोड़ रहे हैं। एक के बाद एक आने वाली विभीषिका पूर्ण बाढ़, बार-बार पड़ता सूखा, लू के जानलेवा थपेड़े, हिमनद झीलों के अप्रत्याशित फटने से होने वाली जल तबाही और मानसून के अनिश्चित व्यवहार ने देश भर में तबाही मचाई है। इन लगातार झटकों से परिवहन व भंडारण के बुनियादी ढांचे को गहरा नुकसान हुआ है और फसलों की उत्पादकता बुरी तरह गिर गई है। इसके अलावा मवेशी पालन पर निर्भर चरवाहों और पशुपालकों की समूची आजीविका चौपट हो गई है, जिससे पोषण सुरक्षा का संकट आने वाले समय में और अधिक विकराल होने की आशंका है।

सवाल-जवाब

पाकिस्तान को खाद्य संकट वाले देशों में कौन सा स्थान मिला है?
एक्शन अगेंस्ट हंगर की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान दुनिया के दस सबसे गंभीर खाद्य संकट वाले देशों की सूची में शामिल हो गया है।
वर्ष 2026 में पाकिस्तान में कितने लोगों को मानवीय मदद की जरूरत होगी?
अनुमान के मुताबिक 2026 के दौरान पाकिस्तान में लगभग 1.06 करोड़ लोगों को आपात मानवीय सहायता की आवश्यकता होगी।
दुनिया भर के शीर्ष दस संकटग्रस्त देशों में कुल कितने लोग भूख से प्रभावित हैं?
इन दस सबसे गंभीर संकटग्रस्त देशों में करीब 17.7 करोड़ आबादी भूख और खाद्य असुरक्षा के साए में जी रही है।
दुनिया भर में कुल कितने लोग गंभीर भूख का सामना कर रहे हैं?
वैश्विक स्तर पर 47 देशों के करीब 26.6 करोड़ लोग वर्तमान में गंभीर भुखमरी का सामना कर रहे हैं।
पाकिस्तानी परिवार इस संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं?
लोग अपने दैनिक भोजन में कटौती कर रहे हैं, जरूरी संपत्तियों को बेच रहे हैं और बच्चों को स्कूलों से हटा रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन ने पाकिस्तान की खाद्य सुरक्षा को कैसे प्रभावित किया है?
भीषण बाढ़, सूखे, अनिश्चित मानसून और हिमनद झीलों के फटने से कृषि भूमि और मवेशियों को भारी नुकसान पहुंचा है।
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टिप्पणियाँ 2

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·37 मिनट पहले

आर्थिक आंकड़े सुधरने की बात तो ठीक है, पर मुझे यकीन नहीं होता कि स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि करोड़ों लोगों को दो वक्त की रोटी के लाले पड़ जाएं। थोड़ी अतिशयोक्ति सी लगती है।

Li Wei@li-wei·37 मिनट पहले

कार्लोस, 2026 तक एक करोड़ से ज्यादा लोगों को मदद की जरूरत पड़ना कोई छोटी बात नहीं है, आंकड़े डराने वाले हैं।

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