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कोलकाता परिसर से तृणमूल का नामपट्ट हटाने पहुंची पुलिस, सीढ़ियों पर संतुलन बिगड़ने से गिरे सांसद डेरेक ओ'ब्रायनपश्चिम बंगाल
27 अग॰ 2026, 10:10 pm (1 घंटे पहले)· 2

कोलकाता परिसर से तृणमूल का नामपट्ट हटाने पहुंची पुलिस, सीढ़ियों पर संतुलन बिगड़ने से गिरे सांसद डेरेक ओ'ब्रायन

कोलकाता के कैमैक स्ट्रीट स्थित तृणमूल कांग्रेस कार्यालय से साइनबोर्ड हटाने पहुंची नगर निगम और पुलिस टीम के दौरान भारी हंगामा हुआ, जिसमें पार्टी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन सीढ़ियों पर गिर पड़े और 12 लोगों को हिरासत में लिया गया।

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के कैमैक स्ट्रीट स्थित तृणमूल कांग्रेस कार्यालय में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब निकाय प्रशासन और पुलिस की एक संयुक्त टीम इमारत पर लगा पार्टी का आधिकारिक नामपट्ट हटाने पहुंच गई। इस पूरी कार्रवाई का तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध किया, जिसके बाद परिसर के भीतर तीखी धक्कामुक्की शुरू हो गई। इस गहमागहमी के बीच तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ'ब्रायन इमारत की सीढ़ियों पर असंतुलित होकर गिर पड़े। पार्टी की ओर से इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया मंच पर जारी किया गया है। घटना के वक्त मौके पर तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी मौजूद थे। पुलिस ने इस विवाद के बाद कार्रवाई करते हुए 12 व्यक्तियों को अपनी हिरासत में ले लिया है।

कैमैक स्ट्रीट स्थित पार्टी कार्यालय में हुआ हंगामा

गुरुवार की दोपहर लगभग 3:30 बजे कोलकाता नगर निगम के कर्मचारी कोलकाता पुलिस के बल के साथ कैमैक स्ट्रीट स्थित बहुमंजिला इमारत में पहुंचे। इसी इमारत में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का कार्यालय संचालित होता है। निकाय कर्मचारियों ने इमारत के बाहरी हिस्से में लगे 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' लिखे बड़े साइनबोर्ड को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। इस कदम की सूचना मिलते ही इमारत के भीतर मौजूद पार्टी के नेता और कार्यकर्ता बाहर निकल आए और प्रशासनिक टीम का रास्ता रोक दिया।

तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने अधिकारियों से कार्रवाई के विधिक आधार के संबंध में सवाल किए और प्रक्रिया को रोकने का अनुरोध किया। नेताओं का दावा है कि उन्होंने करीब डेढ़ घंटे तक बातचीत के जरिए अधिकारियों को समझाने का प्रयास किया। हालांकि, जब बातचीत से समाधान नहीं निकला, तो पुलिस बल इमारत के अंदरूनी हिस्सों में दाखिल होने लगा। इसी दौरान मुख्य सीढ़ियों के पास पुलिसकर्मियों और कार्यकर्ताओं के बीच भारी खींचतान शुरू हो गई, जिसमें धक्का लगने से सांसद डेरेक ओ'ब्रायन सीढ़ियों पर नीचे जा गिरे।

प्रशासनिक नोटिस और पुलिस कार्रवाई पर उठाए गए सवाल

घटना के तुरंत बाद मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने प्रशासनिक कदम की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम की टीम जो नोटिस लेकर आई थी, वह पूरी तरह अवैध था क्योंकि उस पर किसी भी सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर मौजूद नहीं थे। नोटिस के विवरण में एक तस्वीर संलग्न होने का उल्लेख किया गया था, लेकिन दस्तावेज के साथ कोई फोटो संलग्न नहीं थी। इसके अतिरिक्त, उसमें कार्रवाई की वजह का कोई स्पष्ट ब्योरा भी नहीं दिया गया था।

डेरेक ओ'ब्रायन ने दावा किया कि बातचीत की प्रक्रिया के बीच ही 150 से अधिक पुलिसकर्मी बिना किसी पूर्व अनुमति के जबरन इमारत में घुस आए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने सीढ़ियों पर मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं के साथ अभद्रता की और धक्कामुक्की की। तृणमूल सांसद ने इस पूरी कार्रवाई के समय पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि तृणमूल कांग्रेस की वार्षिक छात्र रैली का आयोजन अगले दिन होना तय है, और इस महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रम से ठीक एक दिन पहले पार्टी को मानसिक और संगठनात्मक रूप से परेशान करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। उन्होंने इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी और उसकी सहयोगी इकाइयों का हाथ होने का आरोप लगाया।

अभिषेक बनर्जी का बयान और कोलकाता पुलिस का रुख

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी इस प्रशासनिक कार्रवाई के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था का क्षरण हो रहा है।

"पश्चिम बंगाल संवैधानिक शासन के लगातार कमजोर होने और चिंताजनक तरीके से पुलिस स्टेट की ओर बढ़ने का गवाह बन रहा है।"

अभिषेक बनर्जी ने अपनी टिप्पणी में आगे कहा कि जब राज्य की प्रशासनिक शक्तियां संवैधानिक सीमाओं की परवाह किए बिना काम करने लगती हैं, तब नागरिकों और राजनीतिक संस्थाओं के पास न्यायपालिका ही एकमात्र सहारा रह जाती है। इस बीच, कोलकाता पुलिस के अधिकारियों ने घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि कैमैक स्ट्रीट स्थित परिसर में हुए हंगामे और सरकारी कार्य में बाधा डालने के सिलसिले में 12 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और जल्द ही इससे जुड़े कानूनी विवरण सार्वजनिक किए जाएंगे।

हालिया राजनीतिक पृष्ठभूमि और बढ़ता तनाव

कैमैक स्ट्रीट में हुई यह घटना पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल और प्रशासनिक संस्थाओं के बीच चल रहे लंबे राजनीतिक टकराव की एक और कड़ी है। इससे पहले पिछले महीने भी तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व से जुड़ा एक ऐसा ही मामला सामने आया था, जब दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित अभिषेक बनर्जी के एक अन्य दफ्तर पर प्रशासनिक अमले ने बुलडोजर चलाकर ढांचे को ध्वस्त कर दिया था। उस समय प्रशासन की ओर से कहा गया था कि कार्रवाई से कुछ दिन पूर्व नियमानुसार नोटिस जारी किया गया था।

दूसरी तरफ, कानूनी मोर्चे पर अभिषेक बनर्जी को हाल ही में एक बड़ी राहत भी मिली है। उच्चतम न्यायालय ने उनकी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें अपनी आंखों के आवश्यक इलाज के सिलसिले में तीन सप्ताह के लिए विदेश यात्रा करने की अनुमति प्रदान की है। हालांकि, कोलकाता के मुख्य पार्टी कार्यालय में साइनबोर्ड हटाए जाने और सांसद के साथ हुई धक्कामुक्की के बाद आगामी छात्र रैली के दौरान राजनीतिक सरगर्मी और बयानबाजी बेहद तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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सवाल-जवाब

कैमैक स्ट्रीट स्थित तृणमूल कांग्रेस दफ्तर में क्या हुआ?
कोलकाता नगर निगम की टीम पुलिस के साथ साइनबोर्ड हटाने पहुंची, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं के विरोध और धक्कामुक्की के दौरान सांसद डेरेक ओ'ब्रायन सीढ़ियों पर गिर पड़े।
सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने क्या आरोप लगाए हैं?
उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम का नोटिस बिना हस्ताक्षर का था और 150 से अधिक पुलिसकर्मी बिना अनुमति इमारत में घुसकर धक्कामुक्की करने लगे।
इस मामले में पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
कोलकाता पुलिस ने कैमैक स्ट्रीट की घटना के संबंध में 12 लोगों को हिरासत में लिया है।
अभिषेक बनर्जी ने घटना पर क्या प्रतिक्रिया दी?
अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर कहा कि पश्चिम बंगाल में संवैधानिक शासन कमजोर हो रहा है और राज्य पुलिस स्टेट की ओर बढ़ रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·59 मिनट पहले

यह घटना प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक टकराव के बीच की कानूनी पेचीदगियों को उजागर करती है। बिना हस्ताक्षर और बिना फोटो वाले नोटिस के आधार पर पुलिस बल का प्रयोग कानून-व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन के बीच टकराव को और बढ़ा सकता है। यदि इस मामले में नोटिस की वैधता और पुलिस की कार्रवाई के कानूनी पहलुओं की स्वतंत्र न्यायिक समीक्षा नहीं की गई, तो यह विवाद राज्य में बड़े राजनीतिक संघर्ष का रूप ले सकता है और दोनों पक्षों के बीच तनाव को लंबे समय तक कायम रखेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·58 मिनट पहले

यह पूरी घटना पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में प्रशासनिक मशीनरी के इस्तेमाल पर बड़े सवाल खड़े करती है। बिना हस्ताक्षर वाले नोटिस के बल पर मुख्य विपक्षी दल के कार्यालय पर ऐसी अचानक कार्रवाई और वरिष्ठ सांसद का गिरना सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव को खतरनाक स्तर पर ले जा रहा है। यदि इस मामले की न्यायिक या स्वतंत्र जांच नहीं हुई, तो यह प्रशासनिक कदम आने वाले दिनों में राज्य की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।

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