राजस्थान की राजधानी जयपुर में इन्फ्लूएंजा और स्वाइन फ्लू के मामलों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए राज्य का स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से सतर्क हो गया है। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता की सुरक्षा और बीमारी के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से एक विस्तृत स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने नागरिकों को सलाह दी है कि यदि उन्हें बुखार, लगातार खांसी अथवा गले में खराश जैसी शारीरिक परेशानियां महसूस हों, तो वे तुरंत सतर्कता बरतें। ऐसे व्यक्तियों को भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर जाने से बचना चाहिए और आवश्यकता होने पर मास्क का प्रयोग अनिवार्य रूप से करना चाहिए। स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि स्वाइन फ्लू सांस के जरिए फैलने वाला एक संक्रामक रोग है, लेकिन सही समय पर डॉक्टरी सलाह और उचित देखभाल के माध्यम से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं।
स्वाइन फ्लू के मुख्य लक्षण और मौसमी फ्लू की पहचान
मौसम में बदलाव के साथ सांस से जुड़े संक्रमणों का जोखिम बढ़ जाता है। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने मौसमी फ्लू और अन्य श्वसन संक्रमणों से बचाव के संदर्भ में आवश्यक दिशा-निर्देश साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि इस बीमारी के सामान्य लक्षणों को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। स्वाइन फ्लू के प्राथमिक लक्षणों में तेज बुखार आना, लगातार खांसी रहना, गले में दर्द या खराश होना, नाक का बहना अथवा बंद होना, सिरदर्द, पूरे शरीर में तेज ऐंठन व दर्द और अत्यधिक थकान महसूस होना शामिल हैं। हालांकि ये लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही प्रतीत होते हैं, लेकिन इनकी अनदेखी करना खतरनाक साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश मरीजों में यह संक्रमण हल्का होता है और सही देखभाल से ठीक हो जाता है, परंतु समय पर ध्यान न देने पर यह गंभीर रूप भी ले सकता है।
उच्च जोखिम वाले समूहों के लिए विशेष सावधानी की जरूरत
स्वास्थ्य विभाग की इस एडवाइजरी में समाज के कुछ विशेष वर्गों को लेकर अत्यधिक सावधानी बरतने की हिदायत दी गई है। प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ के मुताबिक छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं तथा पहले से किसी गंभीर अथवा लंबे समय से चले आ रहे पुराने रोगों से पीड़ित व्यक्तियों में इस संक्रमण के कारण स्थिति बिगड़ने की आशंका बहुत अधिक रहती है। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण इन उच्च जोखिम वाले समूहों में वायरल इंफेक्शन का असर जल्दी और गहरा होता है। इसलिए, यदि घर के किसी भी सदस्य में फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखाई दें, तो परिवार को तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। ऐसे संवेदनशील व्यक्तियों को किसी भी संभावित संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क से दूर रखना और उनकी सेहत पर लगातार नजर बनाए रखना बेहद आवश्यक है।
श्वसन स्वच्छता और व्यक्तिगत दूरी के कड़े नियम
संक्रमण के फैलाव को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने रोजमर्रा की जिंदगी में स्वच्छता से जुड़ी छोटी-छोटी आदतों को अपनाने पर विशेष जोर दिया है। एडवाइजरी के अनुसार खांसते या छींकते समय हमेशा रूमाल, टिश्यू पेपर अथवा अपनी कोहनी को मोड़कर मुंह और नाक को पूरी तरह ढकना चाहिए। इस्तेमाल किए गए टिश्यू या रूमाल को खुले में फेंकने के बजाय तुरंत सही स्थान पर निस्तारित करना चाहिए। इसके अलावा, हाथों की सफाई पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया है। लोगों को थोड़ी-थोड़ी देर में साबुन और साफ पानी से हाथों को अच्छी तरह धोने की सलाह दी गई है, और पानी उपलब्ध न होने की स्थिति में अल्कोहल युक्त हैंड सैनिटाइजर का प्रयोग करने को कहा गया है। लक्षण वाले व्यक्तियों को दूसरों से उचित दूरी बनाए रखनी चाहिए और भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाते समय मास्क पहनना अनिवार्य समझना चाहिए।
पर्याप्त आराम, तरल पदार्थ और चिकित्सीय परामर्श का महत्व
स्वाइन फ्लू अथवा मौसमी फ्लू की चपेट में आने पर शरीर को आराम देना इलाज की प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वास्थ्य विभाग ने सलाह दी है कि पीड़ित व्यक्ति को पर्याप्त नींद और भरपूर आराम करना चाहिए। इसके साथ ही, शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए पानी सहित अन्य स्वास्थ्यवर्धक तरल पदार्थों का लगातार सेवन करते रहना आवश्यक है। विभाग ने चेतावनी दी है कि फ्लू जैसे लक्षण उभरने पर अपनी मर्जी से दवा लेने की गलती बिल्कुल न करें। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक अथवा एंटीवायरल दवाओं का सेवन करना सेहत के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है। दवाओं की खुराक स्वयं तय करके लंबे समय तक उनका इस्तेमाल करने से शरीर पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। इसलिए लक्षण दिखते ही किसी पंजीकृत चिकित्सक से परामर्श लेना ही एकमात्र सुरक्षित उपाय है।
आपातकालीन संकेत और सार्वजनिक स्थानों से दूरी
यदि मरीज की हालत बिगड़ने लगे तो तुरंत आपातकालीन कदम उठाना जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई हो रही हो, लगातार तेज बुखार बना रहे, शरीर में बहुत अधिक कमजोरी आ जाए, या शरीर में ऑक्सीजन का स्तर घटने लगे, तो बिना किसी देरी के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र अथवा डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, संक्रमण को सामाजिक स्तर पर फैलने से रोकने के लिए अस्वस्थ व्यक्तियों को स्कूल, ऑफिस, सार्वजनिक समारोहों या किसी भी भीड़भाड़ वाले स्थान पर जाने से पूरी तरह बचना चाहिए। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे बीमारी को लेकर घबराएं नहीं और न ही किसी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान दें, बल्कि केवल आधिकारिक सलाह का पालन करते हुए सतर्कता और संयम बरतें।



















