सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए असम के जोरहाट जिला प्रशासन ने असम-नागालैंड अंतरराज्यीय सीमा से लगे क्षेत्रों में रात का कर्फ्यू लागू कर दिया है। जिला मजिस्ट्रेट जय शिवानी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अंतरराज्यीय सीमा पर असम की ओर 5 किलोमीटर के दायरे में लोगों और वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यह प्रतिबंध रोजाना रात 8 बजे से सुबह 5 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी अनहोनी को रोकना है।
इंटेलिजेंस इनपुट और उग्रवादी घुसपैठ की आशंका
प्रशासन ने यह फैसला इंटेलिजेंस ब्रांच और जिला पुलिस से मिले संवेदनशील इनपुट के बाद लिया है। खुफिया रिपोर्टों में चेतावनी दी गई थी कि उग्रवादी संगठन नागालैंड सीमा के रास्ते असम में दाखिल होने की कोशिश कर सकते हैं। वे जोरहाट जिले में शांति और सार्वजनिक व्यवस्था को भंग करने वाली गतिविधियों को अंजाम दे सकते हैं।
प्रशासनिक आदेश में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि उग्रवादी संगठन उल्फा-आई (ULFA-I) ने नए सदस्यों की भर्ती की है। यह आशंका जताई गई है कि ये नए सदस्य अपनी आवाजाही और अन्य गतिविधियों के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों का इस्तेमाल कर सकते हैं। अधिकारियों का मानना है कि रात के समय सीमावर्ती इलाकों में बिना किसी रोक-टोक के होने वाली आवाजाही से सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है।
कर्फ्यू का दायरा, छूट और दंडात्मक प्रावधान
यह निषेधाज्ञा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों के तहत लागू की गई है। हालांकि, आवश्यक सेवाओं और सुरक्षा अभियानों में लगे कर्मियों को इस प्रतिबंध से मुक्त रखा गया है। आधिकारिक ड्यूटी पर तैनात भारतीय सेना, सुरक्षा बलों, पुलिस, मजिस्ट्रेटों, वन विभाग के अधिकारियों और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के कर्मियों को सीमा क्षेत्र में आवाजाही की अनुमति रहेगी।
जिला प्रशासन का कहना है कि अतीत में भी असम-नागालैंड सीमा पर लागू किए गए नाइट कर्फ्यू बेहद प्रभावी साबित हुए हैं। ऐसे प्रतिबंधों से अंतरराज्यीय अपराधों और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को रोकने में मदद मिली है, क्योंकि अपराधी अक्सर सीमावर्ती इलाकों को सुरक्षित रास्ते के रूप में इस्तेमाल करते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कर्फ्यू के नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



















