असम में आगामी जनगणना की तैयारियों के बीच बराक डेमोक्रेटिक फ्रंट ने राज्य के सभी नागरिकों से अपनी वास्तविक मातृभाषा को सही ढंग से दर्ज कराने की अपील की है। संगठन ने लोगों से आग्रह किया है कि वे घर-घर आने वाले प्रगणकों को जानकारी देते समय किसी भी व्यक्ति, राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन या प्रभावशाली नेता के दबाव या प्रलोभन में न आएं और अपनी मूल भाषा की जानकारी निडर होकर दें।
मुख्यमंत्री की अपील का समर्थन और स्वागत
बराक डेमोक्रेटिक फ्रंट के मीडिया सेल संयोजक जयदीप भट्टाचार्य ने एक प्रेस बयान जारी कर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अपील का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने हाल ही में बराक घाटी के निवासियों और जनजातीय समुदायों से जनगणना में अपनी-अपनी मातृभाषा दर्ज कराने का आग्रह किया था। जयदीप भट्टाचार्य ने कहा कि जनगणना एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से देश की आर्थिक, सामाजिक, भाषाई और जातीय संरचना का एक विस्तृत डेटाबेस तैयार किया जाता है।
नीति निर्माण और विकास योजनाओं में जनगणना का महत्व
संगठन ने स्पष्ट किया कि जनगणना में एकत्रित आंकड़े केवल संख्या मात्र नहीं होते, बल्कि सरकारी नीतियों और विकास योजनाओं की नींव होते हैं। सरकार द्वारा बनाई जाने वाली अल्पकालिक और दीर्घकालिक विकास योजनाएं इन्हीं आंकड़ों पर आधारित होती हैं। नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी से प्रशासनिक योजनाएं, सामाजिक-आर्थिक पहल, भाषा नीतियां और राजनीतिक प्रतिनिधित्व तय होते हैं। इसलिए, गणना प्रक्रिया के दौरान नागरिकों द्वारा सटीक और सत्य जानकारी दिया जाना अत्यंत आवश्यक है।
मातृभाषा, सांस्कृतिक पहचान और गलत जानकारी के जोखिम
मातृभाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए जयदीप भट्टाचार्य ने कहा कि मातृभाषा केवल बातचीत का साधन नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति और उसके समुदाय की ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है। यह आत्मसम्मान और पहचान से सीधी जुड़ी होती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लोग किसी दबाव या बहकावे में आकर अपनी वास्तविक मातृभाषा के बजाय किसी अन्य भाषा को दर्ज कराते हैं, तो इसके गंभीर परिणाम वर्तमान पीढ़ी और आने वाली पीढ़ियों को भुगतने पड़ सकते हैं।
जनगणना अधिनियम 1948 के तहत कानूनी प्रावधान
जयदीप भट्टाचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस मामले में किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने ध्यान दिलाया कि जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत नागरिकों को गलत जानकारी देने के लिए उकसाना या दबाव बनाना एक दंडनीय अपराध है। इसके साथ ही, उन्होंने नागरिकों को सलाह दी कि वे अपनी मूल मातृभाषा के अलावा अन्य सभी भाषाओं की जानकारी भी प्रगणकों को स्पष्ट रूप से दें, ताकि बहुभाषी दक्षता का सही रिकॉर्ड तैयार हो सके।
सजकता और गड़बड़ी के खिलाफ कानूनी विकल्प
नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे प्रगणक के फॉर्म भरते समय पूरी तरह सतर्क रहें और यह जांचें कि उनके द्वारा दी गई जानकारी को सही तरीके से दर्ज किया जा रहा है या नहीं। यदि किसी भी प्रकार का जानबूझकर बदलाव, हेरफेर या गलत प्रविष्टि दिखाई देती है, तो नागरिक इसके खिलाफ उपलब्ध कानूनी उपायों और संवैधानिक प्रावधानों का सहारा ले सकते हैं।



















