असम के प्रसिद्ध नदी द्वीप माजुली को हवाई संपर्क से जोड़ने की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू हो गई है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के विशेषज्ञों के एक विशेष दल ने द्वीप पर प्रस्तावित नए हवाई अड्डे के लिए शुरुआती सर्वेक्षण और जमीन की समीक्षा का काम पूरा कर लिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य दुनिया के सबसे बड़े नदी द्वीपों में शामिल माजुली को देश के विमानन मानचित्र पर लाना है।
सर्वेक्षण दल और निरीक्षण किए गए क्षेत्र
विमानन प्राधिकरण की छह सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने माजुली के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया और संभावित निर्माण स्थलों का बारकी से जायजा लिया। इस निरीक्षण के दौरान टीम ने जेंगराईमुख से लेकर कमलाबारी दरबार चापोरी तक के विस्तृत क्षेत्रों को कवर किया। दल ने इन इलाकों में जमीन की बनावट, आसपास के भौगोलिक माहौल और रनवे निर्माण के लिए उपयुक्त परिस्थितियों की गहराई से पड़ताल की।
तकनीकी पहलू और स्थानीय प्रशासन का सहयोग
सर्वेक्षण के दौरान केवल जमीन ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी और रणनीतिक पहलुओं का भी आकलन किया गया। इसमें इलाके की मौजूदा कनेक्टिविटी, पहुंच मार्ग, मौसम संबंधी स्थितियां और परिचालन से जुड़ी लॉजिस्टिक जरूरतों का विस्तृत विश्लेषण शामिल रहा। इस पूरी प्रक्रिया में माजुली के जिला आयुक्त रतुल चंद्र पाठक (ACS) के साथ-साथ जिला प्रशासन, पुलिस, परिवहन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी AAI टीम के साथ मौजूद रहे।
प्रशासनिक राय और स्थल चयन की प्रक्रिया
जिला आयुक्त रतुल चंद्र पाठक ने इस शुरुआती सर्वे को माजुली के विकास के लिए एक बेहद उत्साहजनक कदम करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक अभ्यास के दौरान कई अलग-अलग स्थानों की जांच की गई है। हालांकि, किसी एक अंतिम स्थान का चयन तुरंत नहीं किया जाएगा। आगे के तकनीकी मूल्यांकन और विस्तृत प्रशासनिक प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही सबसे उपयुक्त जगह पर मुहर लगाई जाएगी।
राज्य की विमानन योजना और आर्थिक प्रभाव
यह प्रस्तावित हवाई अड्डा उन चार नए एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में शामिल है, जिनकी घोषणा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने फरवरी के महीने में की थी। राज्य सरकार का उद्देश्य असम के दूर-दराज के इलाकों में हवाई संपर्क को मजबूत करना है। यदि यह प्रोजेक्ट धरातल पर उतरता है, तो इससे न केवल द्वीप के निवासियों और आने-जाने वाले यात्रियों का सफर आसान होगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी भारी बढ़ावा मिलेगा। फिलहाल निर्माण कार्य शुरू होने से पहले अभी कुछ और प्रशासनिक मंजूरी और तकनीकी जांच होना बाकी है।



















