असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने मंगलवार को तिनसुकिया जिले में नशीले पदार्थों के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से आयोजित एक बड़े पैदल मार्च का नेतृत्व किया। इस दौरान उन्होंने राज्य भर में नशीले पदार्थों के खतरे को जड़ से खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देकर इसे एक सशक्त सामाजिक आंदोलन का रूप देने पर जोर दिया। यह पदयात्रा राज्यपाल के उस व्यापक क्षेत्रीय संपर्क कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके जरिए नशीले पदार्थों के सेवन के खिलाफ समाज को जागरूक करने और नशा मुक्त वातावरण तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
कछार से शुरू होकर ऊपरी असम तक पहुंची पदयात्रा
राज्यपाल का यह पदयात्रा अभियान सबसे पहले कछार जिले से शुरू हुआ था। इसके बाद यह यात्रा श्रीभूमि से गुजरी और फिर ऊपरी असम के डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिलों में पहुंची। तिनसुकिया में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने 'नशा मुक्त भारत संकल्प पदयात्रा' को हरी झंडी दिखाई। इस दौरान उन्होंने सैकड़ों स्कूली छात्रों, स्थानीय निवासियों और आम नागरिकों के साथ तिनसुकिया कॉलेज से लेकर महात्मा गांधी पार्क तक पैदल मार्च किया। इस पैदल मार्च से पहले तिनसुकिया के जिला आयुक्त सुमित सत्तवान ने वहां मौजूद सभी लोगों को 'नशा मुक्त भारत संकल्प' की शपथ दिलाई।
विरासत, आत्मसंयम और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी
पदयात्रा की शुरुआत से पहले तिनसुकिया कॉलेज में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने इस जिले को असम की समृद्ध विरासत, पहचान और औद्योगिक क्षमता का एक प्रमुख प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'नशा मुक्त भारत' के संकल्प के अनुरूप इस अभियान को एक सच्चे जनआंदोलन के तौर पर मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने आत्मसंयम, अनुशासन और उच्च नैतिक आचरण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ये मूल्य भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत धरोहर में गहराई से समाए हुए हैं।
सरकारी नीतियों और युवा कल्याण योजनाओं की सराहना
राज्यपाल ने इस बात पर विशेष ध्यान दिलाया कि नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए कानून का सख्ती से पालन बेहद जरूरी है। इसके साथ ही एक नशा मुक्त समाज के निर्माण के लिए परिवारों, शैक्षणिक संस्थानों, नागरिक समाज के संगठनों और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता होगी। उन्होंने असम सरकार की नशीले पदार्थों के प्रति जीरो-टॉलरेंस नीति और नशाखोरी पर अंकुश लगाने के सक्रिय कदमों की सराहना की। इसके अलावा उन्होंने 'निजुत मोइना' और 'निजुत बाबू' जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख किया और कहा कि इस तरह की पहल युवाओं को सशक्त बनाती हैं तथा उन्हें एक उद्देश्यपूर्ण और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं।



















