जैव विविधता संरक्षण और जेनेटिक विज्ञान के क्षेत्र में पूर्वोत्तर भारत के कार्यों को वैश्विक स्तर पर एक बड़ा सम्मान मिला है। असम से ताल्लुक रखने वाले संरक्षण आनुवंशिकीविद् (कंजर्वेशन जेनेटिसिस्ट) उदयन बोरठाकुर को प्रतिष्ठित लिनियन सोसाइटी ऑफ लंदन का फेलो (FLS) नामित किया गया है। प्राकृतिक इतिहास के अध्ययन और संरक्षण को समर्पित यह अंतरराष्ट्रीय संस्था दुनिया के सबसे पुराने वैज्ञानिक मंचों में गिनी जाती है, जिसकी नींव वर्ष 1788 में रखी गई थी। बोरठाकुर का यह चयन वन्यजीव अनुसंधान और पारिस्थितिकी रक्षा में उनके बीस वर्षों से अधिक के सतत योगदान को मान्यता देता है।
पूर्वोत्तर में डीएनए आधारित वन्यजीव संरक्षण की शुरुआत
पर्यावरण और जैव विविधता को बचाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल में बोरठाकुर की अहम भूमिका रही है। उन्होंने वर्ष 2008 में अरण्यक संस्था के भीतर वाइल्डलाइफ जेनेटिक्स लेबोरेटरी (WGL) की स्थापना करके इस क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल की थी। यह पूर्वोत्तर के राज्यों में पहला ऐसा प्रयास था जहां वन्यजीवों की सुरक्षा और अपराधों की कानूनी जांच के लिए सीधे डीएनए तकनीक को अपनाया गया। इससे पहले वह प्रतिष्ठित भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के साथ-साथ शिकागो विश्वविद्यालय में भी वैज्ञानिक अनुसंधान पूरा कर चुके हैं।
संकटापन्न प्रजातियों की ट्रैकिंग और गैर-आक्रामक तकनीक
बोरठाकुर का वैज्ञानिक शोध कई संकटग्रस्त और दुर्लभ प्रजातियों पर केंद्रित रहा है। उनकी प्रमुख परियोजनाओं में एक सींग वाले बड़े भारतीय गैंडे, बाघ, एशियाई हाथी, तेंदुए और बेहद दुर्लभ सफेद पेट वाले बगुले (व्हाइट-बेलिड हेरॉन) का आनुवंशिक अध्ययन शामिल है। उनके निर्देशन में काम करने वाली वैज्ञानिक टीम ने गैंडों की सटीक आबादी का पता लगाने के लिए एक अनूठी नॉन-इनवेसिव जेनेटिक गणना पद्धति विकसित की। इस आधुनिक तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ कि वन्यजीवों को जाल में पकड़े या शारीरिक रूप से छुए बिना, केवल उनके जैविक नमूनों के डीएनए परीक्षण से उनकी सटीक संख्या और स्वास्थ्य की निगरानी संभव हो सकी।
फॉरेंसिक जांच और दृश्य माध्यमों से प्रकृति का संदेश
पूर्वोत्तर के वनों में शिकार और अवैध वन्यजीव व्यापार की घटनाओं को सुलझाने में उनकी प्रयोगशाला केंद्रीय भूमिका निभाती है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 329(4) के तहत राज्य सरकारों द्वारा अधिसूचित यह इस पूरे क्षेत्र की एकमात्र फॉरेंसिक लैब है, जिसकी वैज्ञानिक रिपोर्ट अदालतों में कानूनी सुबूत के रूप में स्वीकार की जाती है। प्रयोगशाला की वैज्ञानिक रिपोर्टों के जरिए शिकारियों और तस्करों के खिलाफ वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जाते हैं। प्रयोगशाला के दायित्वों से आगे बढ़कर बोरठाकुर एक कुशल वन्यजीव फोटोग्राफर और वृत्तचित्र निर्माता भी हैं, जो दृश्य माध्यमों और कहानियों के जरिए आम जनता को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक करते हैं।



















