गुवाहाटी में स्थानीय निर्यातकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को वैश्विक व्यापार प्रक्रियाओं से परिचित कराने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम को फिक्की और फीयो द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया गया था, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के एक सौ से अधिक कारोबारियों ने हिस्सा लिया। इस सत्र का मुख्य जोर सीमा पार माल ढुलाई को सुगम बनाने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों को सरल करने पर रहा।
व्यापारिक संभावनाओं को बढ़ावा देने पर जोर
कार्यक्रम की शुरुआत में फिक्की असम स्टेट काउंसिल के अध्यक्ष घनश्याम दास धनुका ने स्थानीय کاروبारी समुदाय से एटीए कार्नेट और संयुक्त राष्ट्र टीआईआर व्यवस्थाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इन व्यापारिक माध्यमों में निर्यात को नई ऊंचाइयां देने, क्षेत्रीय आर्थिकी को मजबूत करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिकने की अपार क्षमता छिपी हुई है।
सीमा शुल्क विभाग गुवाहाटी जोन के डिप्टी कमिश्नर नवीन कुमार दे ने सीमा पार से माल के आवागमन को आसान बनाने में इन प्रणालियों की भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं, विदेश व्यापार महानिदेशालय गुवाहाटी के डिप्टी डायरेक्टर जनरल हिमांशु धर पांडे ने भारत सरकार के एक्सपोर्ट प्रमोशन Mission के मुख्य पहलुओं को रेखांकित करते हुए देश के निर्यात तंत्र को मजबूती देने के उपायों की जानकारी दी।
पारंपरिक उद्योगों और सिल्क सेक्टर के लिए अवसर
उद्योग एवं वाणिज्य आयुक्तालय गुवाहाटी की संयुक्त निदेशक मंजू रानी तालुकदार ने इस बात पर जोर दिया कि ये प्रणालियां असम के पारंपरिक उद्योगों, विशेष रूप से एरी और मूंगा सिल्क के साथ-साथ हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों के लिए कितनी फायदेमंद साबित हो सकती हैं। उन्होंने उद्यमियों को इन प्रणालियों के फायदों को समझकर नए बाजारों की खोज करने के लिए प्रेरित किया।
फिक्की के वरिष्ठ सलाहकार और सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण के पूर्व सदस्य पी. एस. प्रुथी ने दोनों प्रणालियों की बारीकियों को समझाया। उन्होंने इसे सार्वजनिक और निजी भागीदारी का एक सफल उदाहरण करार दिया। फिक्की असम स्टेट काउंसिल के सह-अध्यक्ष जॉयदीप गुप्ता ने अंत में सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
एटीए कार्नेट और संयुक्त राष्ट्र टीआईआर प्रणाली की कार्यप्रणाली
एटीए कार्नेट एक अंतरराष्ट्रीय सीमा शुल्क दस्तावेज है, जो पेशेवर उपकरणों, प्रदर्शन सामग्री और व्यावसायिक नमूनों को बिना किसी आयात शुल्क के अस्थायी रूप से भाग लेने वाले देशों में ले जाने की अनुमति देता है। इस व्यवस्था को अक्सर माल के लिए पासपोर्ट कहा जाता है, जिसकी वैधता आमतौर पर एक वर्ष तक होती है।
दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र टीआईआर प्रणाली सीमा शुल्क सील के तहत देशों के बीच माल के परिवहन को आसान बनाती है। यह पारगमन के दौरान करों और शुल्कों की गारंटी देती है, जिससे सीमा पर होने वाली औपचारिकताएं और परिवहन लागत कम होती है। भारत सरकार द्वारा फिक्की को देश में इन दोनों प्रणालियों के संचालन के लिए नेशनल इश्यूइंग एंड गारेंटींग एसोसिएशन नियुक्त किया गया है।



















