असम के कार्बी आंगलोंग जिले में एक बड़ी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने चार पशु कल्याण संगठनों के साथ मिलकर कुल 26 कुत्तों को बचाया है। इन मूक प्राणियों को कथित तौर पर अवैध मांस व्यापार के लिए एक ट्रक में भरकर ले जाया जा रहा था। बुधवार को जारी किए गए आधिकारिक बयानों के अनुसार, ये सभी कुत्ते असम के विभिन्न इलाकों से चुराए गए थे, जिन्हें बेरहमी से जूट के बोरों में ठूंसकर रखा गया था और उनके मुंह कसकर बांधे गए थे।
बचाव अभियान और संगठनों की भूमिका
इस संयुक्त बचाव अभियान को सफल बनाने में जस्ट बी फ्रेंडली, ह्यूमन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया, यूसीआई फाउंडेशन और अनाजोरी नामक संगठनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन सभी ने स्थानीय पुलिस के साथ तालमेल बिठाकर इस अवैध परिवहन को बीच रास्ते में ही रोक लिया।
अस्पताल और पुनर्वास की व्यवस्था
ट्रक से मुक्त कराने के तुरंत बाद इन सभी कुत्तों को कार्बी आंगलोंग के पशु चिकित्सा विभाग की निगरानी में पुलिस हिरासत में रखा गया था। इसके कुछ घंटों के भीतर ही उन्हें गुवाहाटी स्थित जस्ट बी फ्रेंडली के इंटीग्रेटेड केयर एंड रिसोर्स सेंटर फॉर एनिमल वेलफेयर में सुरक्षित पहुंचा दिया गया, जहां वर्तमान में उनका इलाज और देखभाल की जा रही है। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद स्थानीय संगठन गोद लेने की प्रक्रिया के जरिए इनके लिए स्थायी घरों की तलाश करेंगे।
मांस व्यापार का व्यापक नेटवर्क
मानव कल्याण और पशु अधिकार संगठनों द्वारा किए गए अध्ययनों से यह सामने आया है कि हर साल असम की सड़कों से हजारों की संख्या में कुत्ते चुराए जाते हैं। इन्हें राज्य की सीमाओं से पार ले जाकर मिजोरम और नागालैंड जैसे पड़ोसी राज्यों में मांस के कारोबार के लिए सप्लाई किया जाता है। इस तरह की अवैध गतिविधियों से पशु कल्याण पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं और इनकी रोकथाम के लिए कड़े प्रशासनिक कदमों की आवश्यकता महसूस की जाती है।
विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएं
ह्यूमन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया की सीनियर डायरेक्टर केरेन नजारथ ने इस ऑपरेशन को एक ऐतिहासिक सफलता बताया है। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है जब इतने सारे संगठनों ने पुलिस के साथ मिलकर इस तरह का साझा अभियान चलाया है। जस्ट बी फ्रेंडली के संस्थापक डॉक्टर शशांक दत्ता ने जानकारी दी कि यह उनकी संस्था का इस साल का तीसरा ऐसा अभियान है, जिसके बाद कुल बचाए गए कुत्तों की संख्या बढ़कर 69 हो गई है। उन्होंने लोगों से आगे आकर इन बेसहारा जानवरों को गोद लेने की अपील की है।
व्यापार से जुड़े लोगों का पुनर्वास
संगठन केवल बचाव कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि नागालैंड में इस व्यापार से जुड़े लोगों को वैकल्पिक आजीविका के अवसर भी प्रदान कर रहा है। इस साल 50 से अधिक वेंडर स्वेच्छा से इस कारोबार को छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं। इसके अलावा पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल को प्रशिक्षित करने का काम भी चल रहा है ताकि ऐसे अवैध परिवहन को समय रहते रोका जा सके।



















