असम के डिब्रूगढ़ जिला प्रशासन ने मोरन राजस्व चक्र के भीतर सुअर के मांस और उससे संबंधित सभी उत्पादों की बिक्री पर अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगा दिया है। यह सख्त कदम स्थानीय बाजारों से लिए गए कुल 10 ऊतक नमूनों में अफ्रीकी स्वाइन फीवर की पुष्टि होने के बाद उठाया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर हड़कंप मच गया है।
नमूनों की जांच और रिपोर्ट
जिला पशुपालन और पशुचिकित्सा अधिकारी की ओर से सौंपी गई एक रिपोर्ट के आधार पर, डिब्रूगढ़ के जिला आयुक्त ने 25 अक्टूबर को यह प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया। ये सभी नमूने मोरन राजस्व चक्र के अंतर्गत आने वाले विभिन्न दैनिक और साप्ताहिक बाजारों से जुटाए गए थे। इसके बाद इन्हें गुवाहाटी स्थित उत्तर पूर्वी क्षेत्रीय रोग निदान प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया था, जहां संक्रमण की पुष्टि हुई।
रोक और रोकथाम के उपाय
संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के तहत, मोरन राजस्व चक्र में सुअर के मांस का कारोबार करने वाली सभी दुकानों को अगले आदेश तक पूरी तरह बंद रखने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, अन्य जिलों से इस क्षेत्र में और इस क्षेत्र से बाहर सुअर तथा सुअर के मांस उत्पादों के आने-जाने पर भी पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। प्रशासन ने यह एहतियाती कदम एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी को फैलने से रोकने के लिए उठाया है, जो मुख्य रूप से सूअरों को प्रभावित करती है। जिला प्रशासन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि यह रोक तब तक प्रभावी रहेगी जब तक कि प्रशासनिक स्तर पर कोई नया निर्देश जारी नहीं किया जाता है।
कानूनी कार्रवाई और दिशा-निर्देश
नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी चेतावनी जारी करते हुए प्रशासन ने कहा है कि ऐसा करने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। यह निर्देश आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 और अफ्रीकी स्वाइन फीवर की तैयारी, नियंत्रण तथा रोकथाम के लिए राज्य सरकार की कार्य योजना के तहत लागू किया गया है। संबंधित विभागों और अधिकारियों को इन प्रतिबंधों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने और नागरिकों तथा व्यापारियों को इस बारे में जागरूक करने के लिए व्यापक सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।



















