असम के नगांव जिले में सोमवार को एक चुनावी रैली के लिए जा रहे कांग्रेस के प्रचार काफिले पर कथित तौर पर पथराव की घटना सामने आई है। इस काफिले में असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सवार थे। यह घटना समागुड़ी विधानसभा क्षेत्र के बरमा इलाके में उस समय हुई, जब कांग्रेस नेता 6 अक्टूबर को होने वाले नगांव लोकसभा उपचुनाव के सिलसिले में प्रचार अभियान चला रहे थे। इस प्रचार कार्यक्रम में कांग्रेस उम्मीदवार शिबामोनी बोरा और धुबरी सांसद रकीबुल हुसैन भी शामिल थे।
नेताओं के वाहनों पर हमले और सुरक्षा में लापरवाही का आरोप
गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उस गाड़ी को निशाना बनाकर पत्थर और बोतलें फेंकीं, जिसमें वह और भूपेश बघेल यात्रा कर रहे थे। गोगोई का कहना है कि पुलिस प्रशासन को इस स्थिति के संबंध में पहले ही सचेत कर दिया गया था, लेकिन भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि एक पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी चूक कैसे होने दी गई।
सोशल मीडिया पर अपने विचार रखते हुए गौरव गोगोई ने कहा, “Just now while heading to an election rally in Nagaon, Assam BJP workers attacked the car in which former Chief Minister Bhupesh Baghel and myself were travelling with stones and bottles.” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस से काफी पहले अनुरोध किया गया था, लेकिन हालात को बिगड़ने दिया गया। इसके अलावा उन्होंने चुनाव आयोग के रुख पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस प्रत्याशी शिबामोनी बोरा की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की और पूछा कि असम सरकार और चुनाव आयोग इस मामले पर क्या कदम उठाएंगे।
मास्क पहने उपद्रवियों द्वारा पथराव और पत्रकारों से बदसलूकी
गोगोई ने आगे आरोप लगाया कि कुछ अज्ञात लोग चेहरे पर मास्क लगाकर दूर से वाहनों पर पत्थरबाजी कर रहे थे, जिसमें लोरीगामुख के पास हुई घटनाएं भी शामिल हैं। सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी शिबामोनी बोरा के वाहन को हुए नुकसान की तस्वीर भी दिखाई। उन्होंने बताया कि उस समय गाड़ी के अंदर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव मनोज चौहान मौजूद थे, जिनकी पसलियों में पत्थर लगने से चोट आई है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद तनाव को देखते हुए इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों के जवानों की तैनाती कर दी गई है। स्थानीय टकराव और घटनाक्रम को कवर कर रहे कुछ पत्रकारों के साथ भी बदसलूकी और मारपीट किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इस टकराव के पीछे की सटीक परिस्थितियों और हिंसा की शुरुआत के लिए कौन जिम्मेदार था, इसकी आधिकारिक और स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।




















