देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने अपने ग्राहकों को एक बार फिर झटका देते हुए वाहनों के दाम बढ़ाने का निर्णय लिया है। कंपनी ने जानकारी दी है कि आने वाली पहली सितंबर से उसके कुछ चुनिंदा कार मॉडल्स की खरीद20,000 रुपये तक महंगी हो जाएगी। लागत में लगातार आ रही तेजी और आर्थिक दबाव इस फैसले के पीछे की मुख्य वजह बताए गए हैं। पिछले कुछ महीनों में वाहन निर्माताओं द्वारा दाम बढ़ाए जाने का यह सिलसिला लगातार जारी है।
मई के बाद तीसरी बार हुआ ऐलान
इस साल मई के महीने के बाद से वाहन विनिर्माता की तरफ से कीमतों में बढ़ोतरी का यह तीसरा मौका है। इससे पहले की दोनों मूल्यवृद्धियों का असर कंपनी के पूरे वाहन पोर्टफोलियो पर देखा गया था, लेकिन इस बार का यह नया फैसला केवल कुछ चुनिंदा मॉडल्स पर ही लागू होगा। कॉर्पोरेट जगत के जानकारों का मानना है कि निर्माण लागत में हो रही बढ़ोतरी अब कंपनियों के लिए असहनीय होती जा रही है, जिसका सीधा असर खरीदारों की जेब पर पड़ रहा है।
लागत नियंत्रण के प्रयासों के बाद भी बढ़ाए गए दाम
नियामकीय फाइलिंग के जरिए साझा की गई जानकारी के मुताबिक कंपनी खर्चों को थामने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। इसके बावजूद मुद्रास्फीति और महंगे कच्चे माल के कारण कुछ वित्तीय बोझ उपभोक्ताओं तक पहुंचाना अनिवार्य हो गया है। मुंबई शेयर बाजार में सुस्ती का माहौल रहने के बावजूद मारुति सुजुकी के शेयर हरे निशान के साथ कारोबार करते नजर आए। इस घोषणा के समय कंपनी के शेयर 0.6 प्रतिशत की बढ़त के साथ 12,770 रुपये के स्तर पर ट्रेड कर रहे थे, जबकि इसी दौरान सेंसेक्स में लगभग 0.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।
प्रतिद्वंद्वी कंपनियों की भी बढ़ी हुई हैं कीमतें
वाहन उद्योग में केवल मारुति अकेली ऐसी कंपनी नहीं है जिसने हाल ही में अपने उत्पादों के दाम बढ़ाए हों। इस घोषणा से कुछ दिन पहले ही टाटा मोटर्स और हुंडई जैसी दिग्गज वाहन कंपनियों ने भी अपने वाहनों की कीमतें बढ़ाने का आधिकारिक ऐलान किया था। टाटा मोटर्स ने अपने वाहनों के दाम 25,000 रुपये तक बढ़ाने की बात कही थी। ये सभी बड़ी कंपनियां मुख्य तौर पर बढ़ती इनपुट कॉस्ट और आपूर्ति श्रृंखला पर बन रहे दबावों का हवाला दे रही हैं।
विस्तृत पोर्टफोलियो और स्थानीयकरण पर जोर
मारुति के एरिना सेगमेंट में एस-प्रेसो, ऑल्टो के10, सेलेरियो, वैगनआर, ईको, स्विफ्ट, डिजायर, ब्रेजा, अर्टिगा और विक्टोरिस जैसे नाम शामिल हैं। वहीं नेक्सा लाइनअप के तहत ई-विटारा, इनविक्टो, जिम्नी, एक्सएल6, ग्रैंड विटारा, फ्रोंक्स और बलेनो की बिक्री की जाती है। हालांकि, प्रबंधन ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि इनमें से किन विशिष्ट गाड़ियों पर नई कीमतें लागू होंगी। कंपनी के प्रबंध निदेशक और सीईओ हिसाशी ताकेउची ने हाल ही में ऑटोमोटिव आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थानीयकरण पर जोर दिया था। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव के बाद भारत एक विश्वसनीय विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर सकता है, जहां लागत के साथ विश्वसनीयता और निरंतरता सर्वोपरि हैं।



















