तेलंगाना में सड़कों पर चलने वाले हजारों ऑटो-रिक्शा अब पेट्रोल-डीजल छोड़कर बैटरी से दौड़ेंगे. राज्य सरकार ने प्रदूषण कम करने और ऑटो चालकों की रोजाना की ईंधन लागत घटाने के मकसद से तेलंगाना ऑटोरिक्शा इलेक्ट्रिक रूपांतरण योजना के तहत 200 करोड़ रुपए की योजना को हरी झंडी दे दी है. परिवहन विभाग के मुताबिक इस योजना से राज्य के प्रमुख शहरी इलाकों में चलने वाले कुल 18,766 ऑटो-रिक्शा इलेक्ट्रिक में तब्दील होंगे.
कितने ऑटो बदलेंगे, बजट कैसे तय हुआ
इनमें से 11,254 डीजल ऑटो और 7,512 पेट्रोल ऑटो को हटाकर या बदलकर इलेक्ट्रिक किया जाएगा. हर ऑटो चालक को अधिकतम 1.5 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता यानी सब्सिडी दी जाएगी. 200 करोड़ रुपए के इस बजट को अकेले परिवहन विभाग नहीं बल्कि चार अलग-अलग विभाग मिलकर वहन करेंगे, अनुसूचित जाति कल्याण विभाग 50 करोड़ रुपए, जनजाति कल्याण विभाग 50 करोड़ रुपए, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग 50 करोड़ रुपए और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग 50 करोड़ रुपए खर्च करेगा. यानी योजना को सामाजिक कल्याण से जुड़े विभागों के भरोसे लागू किया जा रहा है, जिससे अलग-अलग समुदायों के ऑटो चालकों को इसका सीधा फायदा मिल सके.
पुराने ऑटो में ही लगवाएं इलेक्ट्रिक किट
जो चालक अपना मौजूदा ऑटो बेचना नहीं चाहते, उनके पास पुराने वाहन में ही सरकार द्वारा प्रमाणित AIS-123 इलेक्ट्रिक किट लगवाने का विकल्प है. इस किट की लागत और फिटिंग पर सरकार 1.5 लाख रुपए तक की मदद देगी. चालक अपनी सुविधा के मुताबिक फिक्स्ड बैटरी या स्वैपेबल बैटरी में से कोई एक चुन सकते हैं, यानी बैटरी खत्म होने पर उसे बदलने या चार्ज करने का विकल्प चालक की जरूरत पर निर्भर करेगा.
नया इलेक्ट्रिक ऑटो खरीदने का रास्ता भी खुला
जो चालक पुराना ऑटो बदलकर बिल्कुल नया वाहन लेना चाहते हैं, वे फैक्ट्री में बना नया L5M इलेक्ट्रिक ऑटो खरीद सकते हैं. ऐसे मामलों में 1.5 लाख रुपए की सब्सिडी सीधे डीलर के जरिए ऑन-रोड कीमत में से घटा दी जाएगी, बाकी बची रकम चालक को अपनी जेब से चुकानी होगी.
कीमत पर कोई सीमा नहीं, लेकिन एक साल तक स्थिरता जरूरी
सरकार ने नए इलेक्ट्रिक ऑटो की अधिकतम कीमत तय नहीं की है, यानी चालक अपनी जरूरत के हिसाब से रेंज, बैटरी क्षमता, वारंटी और कीमत देखकर मॉडल और डीलर खुद चुन सकते हैं. हालांकि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी डीलरों को अपनी तय कीमतें एक साल तक स्थिर रखनी होंगी, ताकि चालकों को ठगे जाने का डर न रहे. सरकार का दावा है कि यह योजना सिर्फ तेलंगाना के शहरों की हवा साफ नहीं करेगी, बल्कि महंगे पेट्रोल-डीजल का खर्च बचाकर ऑटो चालकों की रोजाना की कमाई भी बढ़ाएगी.


















