वाहन के इंजन को उचित तापमान पर बनाए रखने में कूलेंट की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यह तरल पदार्थ न केवल इंजन को अत्यधिक गर्म होने से बचाता है बल्कि सर्दियों के मौसम में इसे जमने से भी रोकता है। गाड़ी के सुचारू संचालन और इंजन की लंबी उम्र के लिए समय-समय पर कूलेंट का स्तर जांचना और जरूरत पड़ने पर उसे बदलना आवश्यक है। यदि कूलेंट का स्तर कम हो जाए या वह खराब हो जाए, तो इंजन ओवरहीट हो सकता है जिससे भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कूलेंट बदलने का सही समय और आवश्यक सावधानियां
आमतौर पर अधिकांश गाड़ियों में कूलेंट को हर 30,000 से 50,000 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद या फिर दो से तीन साल के अंतराल पर बदलने की सलाह दी जाती है। इस प्रक्रिया में हमेशा सही प्रकार के कूलेंट का ही उपयोग करना चाहिए क्योंकि गलत या निम्न गुणवत्ता वाला कूलेंट इंजन के आंतरिक हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया को घर पर भी आसानी से अंजाम दिया जा सकता है, बशर्ते सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए। हमेशा इस बात का विशेष ध्यान रखें कि इंजन पूरी तरह से ठंडा होने के बाद ही किसी प्रकार का काम शुरू करें।
कूलेंट के स्तर और स्थिति की जांच कैसे करें
सबसे पहले अपनी कार को किसी समतल स्थान पर पार्क करें और इंजन को अच्छी तरह से ठंडा होने दें। इसके बाद बोनट खोलकर कूलेंट रिजर्वायर यानी पारदर्शी प्लास्टिक टैंक को ढूंढें जिस पर न्यूनतम और अधिकतम यानी MIN और MAX के निशान बने होते हैं। कूलेंट का स्तर हमेशा इन दोनों निशानों के बीच रहना चाहिए। यदि स्तर MIN के निशान से नीचे चला गया है, तो वाहन के मैनुअल में बताए गए निर्देशानुसार सही प्रकार का कूलेंट डालें। इसके अलावा कूलेंट के रंग पर भी ध्यान दें जो कि साफ हरा, लाल या नारंगी रंग का होना चाहिए। यदि इसका रंग गंदा, जंग जैसा या तेल जैसा नजर आए, तो समझ लें कि इसे तुरंत बदलने की आवश्यकता है।
कूलेंट बदलने के लिए जरूरी सामान और प्रारंभिक तैयारी
कूलेंट बदलने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले सभी आवश्यक सामानों को एक जगह इकट्ठा कर लें। इनमें नया कूलेंट, डिस्टिल्ड पानी, ड्रेन पैन, सुरक्षा के लिए दस्ताने, चश्मा और फनल जैसी चीजें शामिल होनी चाहिए। यदि आवश्यकता महसूस हो तो गाड़ी को जैक स्टैंड की मदद से ऊपर उठा सकते हैं। इसके अलावा कार के हीटर को हाई पर सेट कर दें ताकि कूलिंग सिस्टम से पूरा पुराना तरल पदार्थ बाहर निकल सके।
पुराना कूलेंट निकालने की प्रक्रिया
जब इंजन पूरी तरह ठंडा हो जाए, तब रेडिएटर या रिजर्वायर के कैप को बहुत धीरे-धीरे खोलें ताकि दबाव निकल सके। अब रेडिएटर के ठीक नीचे ड्रेन पैन रखें और ड्रेन प्लग को खोलकर पूरा पुराना कूलेंट बाहर निकाल दें। यदि जरूरत पड़े तो इंजन ब्लॉक का ड्रेन बोल्ट भी खोला जा सकता है। निकाले गए पुराने कूलेंट का निपटान हमेशा पर्यावरण के अनुकूल तरीके से करें ताकि प्रकृति को नुकसान न पहुंचे।
नया कूलेंट भरने और एयर निकालने का तरीका
पुराना तरल निकलने के बाद ड्रेन प्लग को वापस अच्छी तरह बंद कर दें। अब 50:50 के अनुपात में कूलेंट और डिस्टिल्ड पानी को आपस में मिलाकर धीरे-धीरे टैंक में भरें और रिजर्वायर को MAX के निशान तक भर दें। इसके बाद इंजन को चालू करें और हीटर ऑन करके इसे कुछ देर के लिए चलाएं ताकि सिस्टम के अंदर फंसी हवा बाहर निकल सके। अंत में कूलेंट के स्तर को दोबारा चेक करें और यदि आवश्यकता हो तो थोड़ा और कूलेंट मिला दें।
कैप बंद करने और अंतिम जांच
सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद टैंक या रेडिएटर के कैप को कसकर बंद कर दें। इसके बाद किसी भी तरह के लीकेज यानी रिसाव की जांच करें और गाड़ी को कुछ किलोमीटर तक चलाकर कूलेंट के स्तर को फिर से परख लें। इस प्रकार की नियमित जांच और रखरखाव से आपकी कार हमेशा सुरक्षित रहेगी और उसका इंजन लंबे समय तक बिना किसी परेशानी के सुचारू रूप से चलता रहेगा।



















