सफर के दौरान दौड़ती हुई गाड़ी में अचानक धुआं उठना और आग सुलग जाना किसी भी मुसाफिर के लिए बेहद डरावना मंजर होता है। इस तरह के हादसे न केवल गाड़ियों को पूरी तरह तबाह कर देते हैं, बल्कि कई बार यात्रियों की जान पर भी भारी पड़ जाते हैं। खासकर झुलसा देने वाली गर्मियों के दिनों में या लंबी दूरी तय करते समय इस तरह के खतरे काफी ज्यादा बढ़ जाते हैं। सही जानकारी और थोड़ी सी समझदारी से इन खतरनाक हादसों को टाला जा सकता है।
कारों और अन्य वाहनों में आग लगने के पीछे कई तकनीकी खामियां और रख-रखाव की कमियां जिम्मेदार होती हैं। अक्सर लोग इन छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में बड़ा संकट बन जाती हैं। आइए जानते हैं कि आखिर चलती गाड़ी अचानक आग की चपेट में कैसे आ जाती है और इस खतरे से खुद को सुरक्षित रखने के लिए क्या उपाय अपनाने चाहिए।
चलती गाड़ी में आग लगने के मुख्य कारण
वाहनों में आग भड़कने की सबसे बड़ी वजहों में इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट, ईंधन या इंजन ऑयल का रिसाव, इंजन का अत्यधिक गर्म होना और लापरवाही से हुआ रख-रखाव शामिल है। तारों का इंसुलेशन घिस जाने, गलत तरीके से वायरिंग करने या बाहर से सस्ते और लोकल एक्सेसरीज़ लगवाने से चिंगारी निकलने का खतरा पैदा हो जाता है। पेट्रोल, डीजल या इंजन ऑयल जब गर्म एग्जॉस्ट या मैनिफोल्ड के संपर्क में आते हैं, तो पलक झपकते ही आग पकड़ लेते हैं। इसके अलावा, कूलेंट की कमी होना या कैटेलिटिक कन्वर्टर के ज्यादा गर्म हो जाने से भी जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। अनाधिकृत रूप से लगवाई गई सीएनजी किट और जरा सी लापरवाही इन मामलों को और भी ज्यादा खतरनाक बना देती है।
नियमित सर्विसिंग और मेंटेनेंस का महत्व
इन भयानक हादसों से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि गाड़ी की समय पर और सही देखभाल की जाए। वाहन निर्माता कंपनी द्वारा तय किए गए निश्चित अंतरालों पर ही कार की सर्विसिंग जरूर करवाएं। इंजन ऑयल, कूलेंट, फ्यूल लाइन्स और होजेस की नियमित अंतराल पर जांच कराते रहना बेहद आवश्यक है। यदि कहीं भी छोटी सी भी लीकेज दिखाई दे या कोई पार्ट घिसा हुआ नजर आए, तो उसे बिना देर किए तुरंत बदलवा लें। हमेशा अधिकृत और भरोसेमंद सर्विस सेंटर पर ही गाड़ी का काम करवाएं ताकि उपकरणों और फिटिंग की गुणवत्ता हमेशा बनी रहे।
वायरिंग और एक्सेसरीज पर विशेष ध्यान दें
गाड़ी में किसी भी प्रकार के अनाधिकृत या बेहद सस्ते म्यूजिक सिस्टम, एलईडी लाइट्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगवाने से बचें। कार की वायरिंग हमेशा सही फ्यूज क्षमता और उच्च गुणवत्ता वाली होनी चाहिए। अगर कभी भी ढीले कनेक्शन या घिसी हुई वायरिंग दिखाई दे, तो उसे तुरंत ठीक करवाएं। किसी भी तरह का आफ्टरमार्केट काम हमेशा प्रशिक्षित और अनुभवी तकनीशियन से ही करवाएं ताकि शॉर्ट सर्किट की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो सके।
फ्यूल और फ्लूइड लीकेज की नियमित जांच करें
जब भी गाड़ी को किसी जगह पार्क करें, तो उसके नीचे जमीन पर तेल या ईंधन के किसी भी निशान की बारीकी से जांच करें। फ्यूल पाइप, इंजेक्टर और ऑयल सील्स की मौजूदा स्थिति की समय-समय पर जांच करवाते रहना चाहिए। किसी भी तरह के मामूली रिसाव को कभी भी अनदेखा न करें क्योंकि गर्म सतह पर ईंधन की एक बूंद गिरते ही भीषण आग लग सकती है।
इंजन ओवरहीटिंग से बचाव के उपाय अपनाएं
गाड़ी में कूलेंट का स्तर हमेशा सही और पर्याप्त बनाए रखें। यदि आप बहुत लंबी यात्रा पर निकल रहे हैं, तो बीच-बीच में गाड़ी को रोककर इंजन को कुछ देर के लिए ठंडा होने का मौका दें। डैशबोर्ड पर दिए गए टेंपरेचर गेज पर लगातार नजर बनाए रखें। इसके अलावा, टायरों और ब्रेक सिस्टम का भी खास ख्याल रखें क्योंकि इनमें अत्यधिक घर्षण होने से भी खतरनाक गर्मी पैदा हो सकती है।
आग लगने की स्थिति में क्या कदम उठाएं
अपनी गाड़ी के अंदर हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाला एक फायर एक्सटिंगुइशर जरूर रखें। यदि सफर के दौरान कभी भी धुआं दिखाई दे या कुछ जलने की अजीब सी गंध महसूस हो, तो बिना घबराए तुरंत किसी सुरक्षित जगह पर गाड़ी को साइड में रोक लें। इंजन को तुरंत बंद कर दें और सभी यात्रियों को गाड़ी से बाहर निकाल लें। इस दौरान गाड़ी का हुड यानी बोनट बिल्कुल न खोलें। वाहन से कम से कम 30 मीटर की सुरक्षित दूरी पर चले जाएं और तुरंत आपातकालीन सेवाओं के लिए कॉल करें।



















