ईंधन की लगातार बदलती दरों के बीच एक नई कार चुनते समय खरीदारों के मन में सबसे बड़ी उलझन यह रहती है कि किफायती सफर के लिए सीएनजी मॉडल पर भरोसा किया जाए या फिर भविष्य की तकनीक मानी जाने वाली इलेक्ट्रिक कार की ओर कदम बढ़ाया जाए। सीएनजी गाड़ियां दशकों से भारतीय सड़कों पर कम खर्च में यात्रा का एक आजमाया हुआ माध्यम बनी हुई हैं। दूसरी तरफ, शहरों और राजमार्गों पर तेजी से विस्तृत होते चार्जिंग नेटवर्क, साइलेंट केबिन और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक फीचर्स के चलते इलेक्ट्रिक गाड़ियों की स्वीकार्यता भी बहुत तेजी से बढ़ रही है। दोनों ही विकल्पों की अपनी विशेषताएं और व्यावहारिक सीमाएं हैं, जिन्हें समझने के बाद ही सही निर्णय लिया जा सकता है।
शुरुआती खरीद मूल्य का अंतर
किसी भी वाहन को खरीदने की योजना बनाते समय सबसे पहला कारक उसका एक्स-शोरूम और ऑन-रोड बजट होता है। जब एक ही गाड़ी के पेट्रोल, सीएनजी और इलेक्ट्रिक मॉडल की तुलना की जाती है, तो कीमतों में बड़ा अंतर साफ दिखाई देता है। आमतौर पर सीएनजी मॉडल अपने संबंधित पेट्रोल वेरिएंट के मुकाबले 80 हजार से 1 लाख रुपये तक महंगे मिलते हैं। इसके विपरीत, उसी गाड़ी के इलेक्ट्रिक मॉडल को खरीदने के लिए लगभग 3 से 4 लाख रुपये तक का अतिरिक्त बजट तैयार रखना पड़ता है।
इसे टाटा पंच के अलग-अलग मॉडल्स के जरिए सीधे तौर पर समझा जा सकता है। टाटा पंच आईसीएनजी की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत ₹7.25 लाख तय की गई है। वहीं, टाटा पंच ईवी के शुरुआती वेरिएंट का एक्स-शोरूम मूल्य करीब ₹9.99 लाख से शुरू होता है। इसका सीधा मतलब यह है कि शोरूम से गाड़ी घर लाते समय ही इलेक्ट्रिक मॉडल के लिए ग्राहक को करीब ₹2.5 लाख से ₹3 लाख तक अधिक अग्रिम पूंजी खर्च करनी पड़ती है। यह अंतर उन खरीदारों के लिए काफी अहम हो जाता है जिनका शुरुआती बजट बेहद सीमित होता है।
रनिंग कॉस्ट और दैनिक खर्च का गणित
हर दिन के आवागमन में पेट्रोल और डीजल के मुकाबले सीएनजी और इलेक्ट्रिक दोनों ही तकनीकें जेब पर काफी हल्की पड़ती हैं, लेकिन प्रति किलोमीटर खर्च के मामले में इलेक्ट्रिक तकनीक काफी आगे निकल जाती है। टाटा पंच सीएनजी से सामान्य तौर पर 25 से 27 किमी/किग्रा का माइलेज हासिल होता है। यदि बाजार में सीएनजी की दर ₹80 से ₹85 प्रति किलो के आसपास मानी जाए, तो इस गाड़ी को चलाने का खर्च तकरीबन ₹3.00 से ₹3.50 प्रति किलोमीटर के बीच बैठता है।
दूसरी ओर, टाटा पंच ईवी को यदि घर पर लगे एसी स्लो चार्जर से चार्ज किया जाए, तो बिजली की सामान्य घरेलू खपत और टैरिफ दरों के हिसाब से इसका रनिंग खर्च सिर्फ ₹1.20 से ₹1.50 प्रति किलोमीटर ही आता है। यदि किसी चालक का दैनिक आवागमन 50 से 70 किलोमीटर या उससे अधिक है, तो हर किलोमीटर पर होने वाली यह बचत 3 से 4 साल के भीतर दोनों गाड़ियों की शुरुआती खरीद कीमत के अंतर की भरपाई कर सकती है। लंबी दैनिक ड्राइविंग करने वालों के लिए यह एक बड़ा आर्थिक फायदा साबित होता है।
सर्विसिंग और मेंटेनेंस खर्च की तुलना
किसी भी गाड़ी के पूरे जीवनकाल का खर्च केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसकी आवधिक सर्विसिंग भी कुल लागत का एक बड़ा हिस्सा होती है। सीएनजी गाड़ी में पारंपरिक इंटरनल कम्बशन इंजन लगा होता है, जिसमें सैकड़ों गतिशील पुर्जे काम करते हैं। इसके चलते गाड़ी में नियमित अंतराल पर इंजन ऑयल, ऑयल फिल्टर, कूलेंट, स्पार्क प्लग, एयर फिल्टर और वाल्व क्लीयरेंस की जांच और रिप्लेसमेंट अनिवार्य होता है। इसके साथ ही सुरक्षा नियमों के तहत हर 3 साल में सीएनजी सिलेंडर की हाइड्रो-टेस्टिंग कराना भी जरूरी प्रक्रिया है।
इसके विपरीत, इलेक्ट्रिक कार में चलने वाले यांत्रिक पुर्जों की संख्या बेहद कम होती है। इसमें न तो इंजन ऑयल बदलने की जरूरत पड़ती है, न पिस्टन होते हैं और न ही किसी जटिल गियरबॉक्स का झंझट रहता है। ईवी की नियमित सर्विस में मूल रूप से ब्रेक पैड्स, केबिन एसी फिल्टर और सस्पेंशन सिस्टम की ही सामान्य जांच की जाती है। इसी कारण इलेक्ट्रिक कार की रूटीन सर्विसिंग सीएनजी की तुलना में 30 से 40% तक कम खर्चीली साबित होती है।
ड्राइविंग रेंज, चार्जिंग समय और बूट स्पेस
लंबी दूरी के सफर और सामान रखने की क्षमता के लिहाज से भी दोनों गाड़ियों में महत्वपूर्ण अंतर देखने को मिलता है। टाटा पंच सीएनजी में पेट्रोल और सीएनजी दोनों फ्यूल विकल्पों को मिलाकर 700+ किमी से अधिक की कुल रेंज मिल जाती है, और पंप पर गैस भरवाने में महज 5 मिनट का वक्त लगता है। वहीं दूसरी ओर, टाटा पंच ईवी (जिसमें 30 kWh से 40 kWh की बैटरी मिलती है) वास्तविक परिस्थितियों में 230 से 320 किमी तक की ड्राइविंग रेंज उपलब्ध कराती है। इसके साथ ही हाईवे पर लंबी यात्राओं के दौरान डीसी फास्ट चार्जर तलाशना और वाहन को चार्ज करने के लिए 30 से 45 मिनट तक रुकना अनिवार्य हो जाता है।
सामान रखने के स्थान के मामले में, टाटा पंच आईसीएनजी में आधुनिक ट्विन-सिलेंडर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे लगभग 210 लीटर का उपयोगी लगेज स्पेस मिल जाता है। दूसरी तरफ, टाटा पंच ईवी में बैटरी पैक फ्लोर के नीचे सेट होने की वजह से पूरा 366 लीटर का रेगुलर बूट स्पेस मिलता है और बोनट के नीचे आगे की तरफ एक छोटा फ्रंक भी दिया गया है। अंततः, यदि बजट सीमित है और लंबी यात्राओं में तुरंत रिफ्यूलिंग प्राथमिकता है तो सीएनजी एक व्यावहारिक विकल्प है, जबकि घर पर चार्जिंग सुविधा और 40 से 50 किमी की नियमित दैनिक ड्राइविंग होने पर इलेक्ट्रिक वाहन लंबे समय में ज्यादा बचत और शांत ड्राइविंग अनुभव प्रदान करता है।



















