सड़कों पर जब भी चौड़े पहियों और आक्रामक बनावट वाली एसयूवी गाड़ियां दौड़ती हैं, तो उनका मस्कुलर लुक हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है। ऑटोमोबाइल जगत में लंबे समय से यह धारणा रही है कि भारी-भरकम और दमदार गाड़ियों की डिजाइनिंग पुरुषों के नजरिए से ही संचालित होती है। हालांकि, भारतीय ऑटोमोटिव इतिहास की कई सबसे चर्चित गाड़ियों के पीछे असल रचनात्मक सोच एक महिला इंजीनियर की रही है। महिंद्रा की थार, स्कॉर्पियो और XUV700 जैसी लोकप्रिय गाड़ियों को उनका बोल्ड और दबंग रूप देने वाली प्रमुख डिजाइनर रामकृपा अनंतन हैं।
प्रकृति के करीब बीता बचपन और रचनात्मक सोच
रामकृपा के शुरुआती जीवन का उनकी रचनात्मक दृष्टि पर गहरा प्रभाव पड़ा। उनके पिता की नौकरी ऐसी थी जिसमें लगातार तबादले होते रहते थे। इस वजह से उनका परिवार कई अलग-अलग छोटे कस्बों और गांवों में रहा। हरियाली से भरे धान के खेतों, नदियों, ऊंचे पहाड़ों और घने जंगलों के बीच बड़े होने के कारण उन्हें प्राकृतिक बनावट और वातावरण को बहुत नजदीक से समझने का अवसर मिला। प्रकृति के विभिन्न रूपों और जीवों की शारीरिक संरचना के यही गहरे अनुभव बाद में उनके व्हीकल डिजाइनिंग के काम में खुलकर सामने आए।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई से महिंद्रा के डिजाइन प्रमुख बनने तक
शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत आधार बनाते हुए रामकृपा अनंतन ने प्रतिष्ठित संस्थान BITS पिलानी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की। इंजीनियरिंग के तकनीकी पहलुओं को समझने के बाद उन्होंने डिजाइनिंग में विशेषज्ञता हासिल करने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने आईआईटी बॉम्बे के मशहूर इंडस्ट्रियल डिजाइन सेंटर (IDC) में दाखिला लिया और वहां से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की।
साल 1997 में वह महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी में शामिल हुईं। करियर के शुरुआती दौर में उन्हें बोलेरो, स्कॉर्पियो और जायलो जैसी लोकप्रिय गाड़ियों के केबिन और इंटीरियर डिजाइन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग की बारीकियों और अनोखी रचनात्मकता के संगम की बदौलत वह संगठन में लगातार आगे बढ़ती रहीं। उनकी काबिलियत को देखते हुए कंपनी ने साल 2005 में उन्हें अपने पूरे डिजाइन विभाग का प्रमुख नियुक्त कर दिया।
XUV500 और चीते की शारीरिक बनावट से मिली प्रेरणा
रामकृपा अनंतन के करियर में सबसे बड़ा और युगांतरकारी मोड़ साल 2011 में आया, जब महिंद्रा अपनी पहली मोनोकॉक चेसिस वाली एसयूवी XUV500 को तैयार कर रही थी। इस बिल्कुल नए प्रोजेक्ट के लिए जब डिजाइनिंग बोर्ड पर विचार-मंथन शुरू हुआ, तब कई अलग-अलग विचारों की पड़ताल की गई। टीम ने प्रसिद्ध मार्शल आर्टिस्ट ब्रूस ली की फुर्ती, आधुनिक लड़ाकू हेलीकॉप्टर की धारदार संरचना, स्पाइडर-मैन के लचीलेपन और हॉलीवुड फिल्म 'ग्लैडिएटर' में रसेल क्रो के दमदार चरित्र से प्रेरणा ली।
गहन विचार-विमर्श के बाद, रामकृपा और उनकी पूरी टीम ने शिकार पर झपटने की मुद्रा में तैयार चीते के शरीर की प्राकृतिक बनावट को अंतिम रूप से चुना। गाड़ी के उभरे हुए शोल्डर्स, आक्रामक व्हील आर्च और तीखी फ्रंट ग्रिल में उसी शिकारी चीते की गति, संतुलन और ताकत को ढाला गया। जब यह गाड़ी बाजार में उतरी, तो ग्राहकों ने इसके आक्रामक लुक को हाथों-हाथ लिया और यह एसयूवी बेहद सफल साबित हुई।
थार का कायाकल्प और डिजाइन की दुनिया में विशिष्ट पहचान
XUV500 की जबरदस्त कामयाबी के बाद उन्होंने भारतीय एसयूवी बाजार को कई और मील के पत्थर दिए। साल 2020 में लॉन्च की गई दूसरी पीढ़ी की ऑल-न्यू महिंद्रा थार के डिजाइन को उन्होंने इस तरह संवारा कि वह केवल ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने वाली ऑफ-रोडर ही नहीं रही, बल्कि शहरी युवाओं की पहली पसंद और लाइफस्टाइल गाड़ी बन गई। इसके बाद 2021 में पेश की गई XUV700 के साथ-साथ KUV100, TUV300, मराजो और हालिया थार रॉक्स के डिजाइन डीएनए को आकार देने में भी उनकी प्रमुख भूमिका रही। भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में उनके इस ऐतिहासिक योगदान को सम्मानित करते हुए BITS पिलानी ने साल 2021 में उन्हें 'डिस्टिंग्विश्ड एलुम्नस अवॉर्ड' प्रदान किया।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और नए दौर की दिशा में कदम
महिंद्रा के साथ दो दशकों से भी अधिक का शानदार समय बिताने के बाद, उन्होंने नए रचनात्मक क्षेत्रों की तलाश शुरू की। ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में अपने व्यापक अनुभव के आधार पर उन्होंने 'क्रक्स स्टूडियो' (KRUX Studio) नाम से अपनी स्वतंत्र डिजाइन कंसल्टेंसी फर्म की स्थापना की। तेजी से बढ़ते और ट्रैफिक से भरे भारतीय शहरों की जरूरतों को समझते हुए उन्होंने 'Two2' नाम से एक कॉम्पैक्ट टू-सीटर इलेक्ट्रिक कार का कॉन्सेप्ट तैयार किया। इसके बाद साल 2022 में वह ओला इलेक्ट्रिक कंपनी से हेड ऑफ डिजाइन के रूप में जुड़ गईं। अब वह पारंपरिक पेट्रोल और डीजल एसयूवी से आगे बढ़कर भविष्य के आधुनिक इलेक्ट्रिक दोपहिया और चारपहिया वाहनों को नया रूप देने में जुटी हैं।



















