अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के प्रारंभिक नतीजों से वॉशिंगटन में राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ने के कारण अमेरिकी डॉलर में तेज बिकवाली देखी गई है, जिसका सीधा लाभ यूरो को मिला है। विदेशी मुद्रा बाजार में EUR/USD की जोड़ी 1.1200 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई है। दैनिक तकनीकी चार्ट पर 1.1100 के स्तर के पास एक संभावित डबल बॉटम बनावट उभरती दिख रही है, जहां लिवालों ने 1.1250 से 1.1270 के नेकलाइन प्रतिरोध क्षेत्र का परीक्षण शुरू कर दिया है। इस तकनीकी सुधार के साथ ही मुद्रा जोड़ी 1.1196 पर स्थित 21-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) के ऊपर बंद होने में सफल रही है, जिससे खरीदारों को अल्पकालिक बढ़त हासिल हुई है।
ताजा बाजार आंकड़ों के मुताबिक EUR/USD 1.13 पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले 1.12 के बंद स्तर के मुकाबले 0.61% की दैनिक बढ़त दर्शाता है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान इस जोड़ी का दायरा 1.11 से 1.20 के बीच रहा है। हालांकि अल्पावधि में खरीदारों ने नियंत्रण हासिल किया है, लेकिन लंबी अवधि के तकनीकी ढांचे में 100-दिवसीय और 200-दिवसीय मूविंग एवरेज अभी भी मौजूदा भाव से काफी ऊपर बने हुए हैं। 50-दिवसीय SMA 1.14 और 200-दिवसीय SMA 1.16 पर स्थित हैं, जबकि 50-दिवसीय EMA 1.13 और 200-दिवसीय EMA 1.15 पर मौजूद हैं। इसके अलावा 50-दिवसीय EMA का 200-दिवसीय EMA से नीचे रहने वाला डेथ क्रॉस लंबी अवधि में मंदी का ढांचा बरकरार रहने की चेतावनी दे रहा है।
तकनीकी मोमेंटम संकेतक और अहम कारोबारी स्तर
तकनीकी मोमेंटम के मोर्चे पर सुधार के संकेत स्पष्ट रूप से सामने आए हैं। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI 14) 52 के स्तर पर पहुंच गया है, जो तटस्थ क्षेत्र से सकारात्मक दिशा में बढ़ने का संकेत देता है। इसके साथ ही मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) में भी मजबूती देखी गई है, जहां यह अपने सिग्नल स्तर -0.01 के मुकाबले -0.00 पर पहुंचकर शून्य रेखा से ऊपर निकलने का प्रयास कर रहा है और इसका हिस्टोग्राम 0.00 पर सकारात्मक बना हुआ है। स्टोकेस्टिक ऑसिलेटर में तेज रेखा 91 और सिग्नल रेखा 57 पर दर्ज की गई है। 14-दिवसीय एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX 14) 39 पर है, जो मौजूदा दिशात्मक रुझान की मजबूती की पुष्टि करता है। वहीं बोलिंजर बैंड (20, 2) की निचली सीमा 1.11, मध्य रेखा 1.12 और ऊपरी सीमा 1.13 पर स्थित है, जिसके भीतर भाव सीमित है।
कारोबारी रणनीतियों के लिए प्रमुख स्तरों पर नजर डालें तो दैनिक पिवट 1.12 पर स्थित है। ऊपर की ओर पहला प्रतिरोध R1 1.13 और दूसरा प्रतिरोध R2 भी 1.13 के आसपास केंद्रित है। नीचे की ओर शुरुआती समर्थन 1.1200 के स्तर और 21-दिवसीय SMA के पास S1 व S2 के रूप में मौजूद है। यदि यह जोड़ी 1.1200 के नीचे फिसलती है, तो हालिया सुधार की रफ्तार कमजोर पड़ जाएगी और ध्यान फिर से 1.1100 के आधार पर केंद्रित हो जाएगा। 1.1100 के नीचे लगातार कमजोरी बने रहने पर डबल बॉटम का यह ढांचा निष्प्रभावी हो जाएगा और EUR/USD में भारी गिरावट का खतरा बढ़ जाएगा। दैनिक अस्थिरता को मापने वाला एवरेज ट्रू रेंज (ATR 14) 0.01 पर है, जिसे स्टॉप-लॉस बफर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
यूरोपीय संघ की साझी मुद्रा और वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में उसकी हैसियत
यूरो यूरोपीय संघ के उन 20 सदस्य देशों की आधिकारिक मुद्रा है जो यूरो क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के बाद यूरो दुनिया की दूसरी सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, कुल विदेशी मुद्रा लेन-देन में यूरो की हिस्सेदारी 31% रही थी, जिसमें दैनिक औसत कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक दर्ज किया गया था। इस विशाल बाजार में EUR/USD दुनिया की सबसे प्रमुख करेंसी जोड़ी है, जो सभी वैश्विक विदेशी मुद्रा लेन-देन के लगभग 30% हिस्से का प्रतिनिधित्व करती है। इसके बाद अन्य प्रमुख यूरो जोड़ियों में EUR/JPY की हिस्सेदारी 4%, EUR/GBP की हिस्सेदारी 3% और EUR/AUD की हिस्सेदारी 2% दर्ज की जाती है।
जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) पूरे यूरो क्षेत्र के लिए केंद्रीय बैंक के रूप में कार्य करता है। ईसीबी ही ब्याज दरों का निर्धारण करता है और मौद्रिक नीति का पूरा संचालन संभालता है। बैंक का प्राथमिक अधिदेश कीमतों में स्थिरता बनाए रखना है, जिसका मुख्य अर्थ मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखना या जरूरत पड़ने पर आर्थिक विकास को गति देना होता है। अपने इस लक्ष्य को साधने के लिए ईसीबी ब्याज दरों को बढ़ाने या घटाने के प्राथमिक साधन का इस्तेमाल करता है। सामान्य तौर पर अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें या भविष्य में दरें बढ़ने की प्रत्याशा यूरो को मजबूती प्रदान करती है, जबकि दरों में कटौती की स्थिति मुद्रा को कमजोर करती है। ईसीबी की गवर्निंग काउंसिल वर्ष में आठ बार मौद्रिक नीति बैठकें आयोजित करके ये महत्वपूर्ण फैसले लेती है। इन बैठकों में यूरो क्षेत्र के सभी राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के प्रमुख और ईसीबी की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड सहित छह स्थायी सदस्य शामिल होते हैं।
आर्थिक आंकड़ों की भूमिका: एचआईसीपी, जीडीपी और व्यापार संतुलन
यूरो के मूल्यांकन में मुद्रास्फीति के आंकड़ों की अहम भूमिका होती है, जिसे हार्मोनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेज (HICP) के जरिए मापा जाता है। जब मुद्रास्फीति अपेक्षा से अधिक बढ़ती है और विशेष रूप से ईसीबी के 2% के आधिकारिक लक्ष्य को पार करती है, तो केंद्रीय बैंक को महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। अन्य वैश्विक समकक्षों की तुलना में यूरो क्षेत्र में अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को अपनी पूंजी लगाने के लिए आकर्षित करती हैं, जिससे यूरो की मांग में स्वाभाविक वृद्धि होती है। इसके विपरीत नरम मुद्रास्फीति दरों में कटौती की संभावना बढ़ाकर मुद्रा पर दबाव डालती है।
मुद्रास्फीति के अलावा यूरो क्षेत्र के व्यापक आर्थिक आंकड़े भी साझी मुद्रा की सेहत और दिशा तय करते हैं। ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP), मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI), रोजगार के आंकड़े तथा उपभोक्ता भावना सर्वेक्षण जैसे प्रमुख संकेतक निवेशकों की धारणा को प्रभावित करते हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था न केवल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को खींचती है, बल्कि ईसीबी को दरों में मजबूती बनाए रखने का आधार भी देती है, जिससे सीधे तौर पर यूरो की साख बढ़ती है। यूरो क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन सबसे बड़े भागीदार हैं, जो मिलकर पूरे ब्लॉक की अर्थव्यवस्था का 75% हिस्सा बनाते हैं। इसलिए इन चार प्रमुख देशों से आने वाले आंकड़े विशेष रूप से प्रभावशाली होते हैं।
इसके साथ ही व्यापार संतुलन (ट्रेड बैलेंस) का आंकड़ा भी मुद्रा के लिए बेहद महत्वपूर्ण पैमाना है। यह संकेतक किसी निश्चित अवधि के दौरान निर्यात से होने वाली कुल आय और आयात पर किए जाने वाले खर्च के अंतर को दर्शाता है। जब कोई देश या आर्थिक क्षेत्र ऐसी वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करता है जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग होती है, तो विदेशी खरीदारों द्वारा उन उत्पादों को खरीदने के लिए स्थानीय मुद्रा की मांग बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप एक सकारात्मक शुद्ध व्यापार संतुलन मुद्रा को बुनियादी मजबूती प्रदान करता है, जबकि व्यापार घाटा मुद्रा के अवमूल्यन का कारण बन सकता है।
डॉलर की गिरावट का अन्य वैश्विक बाजारों पर असर
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के आरंभिक नतीजों से वाशिंगटन में नीतिगत गतिरोध की संभावना बढ़ गई है, जिससे ट्रेजरी यील्ड में नई गिरावट दर्ज की गई और अमेरिकी डॉलर इंडेक्स एक महीने के निचले स्तर पर लुढ़क गया। इस राजनीतिक उठापटक का असर केवल यूरो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अन्य मुद्राओं और परिसंपत्ति वर्गों में भी व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। AUD/USD एशियाई कारोबारी सत्र में 0.6965 के पास स्थिर रहा और अपने दो सप्ताह के निचले स्तर से ऊपर बना रहा, हालांकि ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक (RBA) के कम सख्त रुख ने इसकी बढ़त को एक सीमित दायरे में बांधे रखा। दूसरी ओर सुरक्षित निवेश की मांग और डॉलर की कमजोरी के चलते USD/JPY भारी बिकवाली के दबाव में आ गया और एशियाई सत्र के दौरान 158.00 के नीचे फिसल गया।
कमजोर होते डॉलर और गिरती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के साथ कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने कीमती धातुओं को भी सहारा दिया। सोना लगातार दो दिनों की गिरावट के सिलसिले को तोड़ते हुए एक बार फिर 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर पहुंच गया। वित्तीय बाजारों में जोखिम लेने की धारणा सुधरने से डिजिटल परिसंपत्तियों में भी तेजी दर्ज की गई। बुधवार को बिटकॉइन 78,000 डॉलर के पार निकल गया। बिटकॉइन की राह पर चलते हुए एथेरियम 2,300 डॉलर के ऊपर कारोबार करता नजर आया, जबकि एक्सआरपी भी 1.28 डॉलर के ऊपर टिककर लगातार दूसरे दिन बढ़त दर्ज करने में सफल रहा।



















