बिहार के बेगूसराय जिले में स्थित एक सरकारी बालिका गृह में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रतनपुर थाना क्षेत्र में बने इस बालिका गृह से हाल ही में एक साथ पांच लड़कियां रहस्यमय परिस्थितियों में फरार हो गईं। इस घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया और स्थानीय पुलिस तुरंत एक्शन में आ गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य की समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता गुरुवार, 30 जुलाई को राजधानी पटना से अचानक बेगूसराय पहुंचीं। उन्होंने बालिका गृह के परिसर का बारीकी से निरीक्षण किया, स्थानीय प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों से घटनाक्रम की पूरी जानकारी हासिल की और वहां मौजूद बच्चियों से व्यक्तिगत रूप से अलग-अलग बातचीत की। पुलिस और प्रशासन की ओर से चलाए गए शुरुआती तलाशी अभियान में गायब हुई पांच में से तीन लड़कियों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया है, जबकि दो अन्य बच्चियों की तलाश अब भी बड़े पैमाने पर जारी है। इस बीच, बालिका गृह के अंदर से प्रताड़ना की शिकायतें सामने आने के बाद इस पूरे मामले ने और अधिक तूल पकड़ लिया है।
एक साथ पांच बच्चियों का गायब होना और पुलिस की कार्रवाई
बेगूसराय के रतनपुर थाना क्षेत्र स्थित बालिका गृह से एक ही समय में पांच बालिकाओं का गायब हो जाना सुरक्षा तंत्र में एक बेहद बड़ी चूक माना जा रहा है। इतने बड़े पैमाने पर बच्चियों के अचानक गायब होने की खबर फैलते ही पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई। घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देश पर स्थानीय पुलिस ने तुरंत नाकाबंदी कर विशेष तलाश अभियान शुरू कर दिया। पुलिस टीम ने आसपास के इलाकों, संभावित ठिकानों और परिवहन साधनों की बारीकी से पड़ताल की। लगातार जारी पुलिस कार्रवाई के परिणामस्वरूप अब तक तीन बालिकाओं को सुरक्षित ट्रैक करके वापस ला लिया गया है। हालांकि, दो अन्य लड़कियां अब भी लापता हैं, जिनकी सलामती और सुरक्षित वापसी के लिए पुलिस टीमें लगातार प्रयासरत हैं और जगह-जगह छापेमारी कर रही हैं।
खिड़की की ग्रिल तोड़कर बाहर निकलने की बात आई सामने
बेगूसराय पहुंचने के बाद समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने पुलिस द्वारा सुरक्षित बरामद की गई तीनों बालिकाओं से आमने-सामने बातचीत की और उनके अनुभव सुने। मंत्री के अनुसार, पूछताछ के दौरान बरामद बालिकाओं ने इस बात का खुलासा किया कि वे बालिका गृह की एक खिड़की की लोहे की ग्रिल तोड़कर बाहर निकली थीं। खिड़की की ग्रिल तोड़कर इतनी आसानी से बाहर निकल जाने की बात सामने आने के बाद बालिका गृह की बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था और वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों की मुस्तैदी पर गहरे सवाल खड़े हो रहे हैं। समाज कल्याण विभाग अब इस बात की गहन जांच कर रहा है कि आखिर इतनी मजबूत मानी जाने वाली ग्रिल को बच्चियों ने कैसे तोड़ दिया, उस वक्त वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी कहां थे और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों से सुरक्षा में इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई।
प्रताड़ना की शिकायतों ने बढ़ाई प्रशासनिक चिंता
बालिका गृह से बच्चियों के भागने की घटना सिर्फ एक सुरक्षा चूक तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें प्रताड़ना के गंभीर पहलू भी जुड़ गए हैं। बच्चियों के गायब होने के बाद बालिका गृह के अंदर शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने के आरोप भी सामने आए। जब इस संबंध में समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें भी बालिका गृह में प्रताड़ना से जुड़ी शिकायतें मिली हैं। मंत्री ने बताया कि उन्होंने बालिका गृह में रह रही बच्चियों से अकेले में अलग-अलग बातचीत की है, ताकि वे बिना किसी डर या दबाव के अपनी बात रख सकें। निरीक्षण और बातचीत के दौरान जो भी महत्वपूर्ण तथ्य और बातें सामने आई हैं, उन्हें आधिकारिक विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया गया है। मंत्री ने स्पष्ट किया है कि इन सभी शिकायतों की पूरी निष्पक्षता के साथ उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी।
हाल ही में हुई थी बच्चियों की शिफ्टिंग और ट्रांसफर पर विचार
मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता के बयान के मुताबिक, शुरुआती जांच-पड़ताल में यह तथ्य भी सामने आया है कि फरार हुई पांचों बालिकाएं हाल ही में इस बेगूसराय स्थित बालिका गृह में शिफ्ट की गई थीं। वे यहां नई आई थीं, इसलिए जांच टीम इस बिंदु पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है कि इन बच्चियों को यहां किस तारीख को, किन परिस्थितियों में और किस आदेश के तहत लाया गया था। इसके साथ ही, उनके आगमन के बाद से बालिका गृह प्रबंधन द्वारा उनकी देखभाल, भोजन, आवास और सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए थे, इसकी भी व्यापक समीक्षा की जा रही है। वहीं दूसरी ओर, विभाग अब बालिकाओं की सुरक्षा, मानसिक स्थिति और बेहतर माहौल को प्राथमिकता देते हुए एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। मंत्री ने बताया कि बरामद की गई बच्चियों समेत अन्य सभी बालिकाओं को किसी अधिक सुरक्षित, सर्वसुविधायुक्त और उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने पर विचार किया जा रहा है।
पटना से बेगूसराय पहुंचने की वजह और लापरवाही पर सख्त चेतावनी
एक साथ पांच बालिकाओं का गायब हो जाना और साथ ही प्रताड़ना के आरोपों का सामने आना केवल एक सामान्य पुलिस जांच का विषय नहीं रह गया था। यह मामला सीधे तौर पर राज्य सरकार के समाज कल्याण विभाग के तहत चलने वाले बालिका गृहों की समग्र सुरक्षा, देखरेख और आंतरिक व्यवस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा था। यही वजह थी कि स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए समाज कल्याण मंत्री को खुद पटना से बेगूसराय का रुख करना पड़ा। मंत्री ने जिले के उच्च अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरे घटनाक्रम की सिलसिलेवार जानकारी ली। डॉ. श्वेता गुप्ता ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के दौरान यदि किसी भी स्तर पर अधिकारियों या कर्मचारियों की लापरवाही, ढिलाई या अनियमितता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले में तीन मुख्य बिंदु जांच का केंद्र बने हुए हैं: पहला, पांचों बच्चियां एक साथ बाहर निकलने में कैसे सफल हुईं; दूसरा, सुरक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी चूक कहां और किससे हुई; और तीसरा, प्रताड़ना के आरोपों में कितनी सच्चाई है। इन सभी सवालों के जवाब आधिकारिक जांच रिपोर्ट पूरी होने के बाद ही पूरी तरह साफ हो पाएंगे।



















