बिहार में यातायात और बुनियादी ढांचे के विकास के लिहाज से एक बड़े और ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी हो रही है। राज्य के पहले ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट यानी आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण ने अब काफी रफ्तार पकड़ ली है। किसी भी राज्य की तरक्की वहां की सड़कों पर निर्भर करती है और यह नया एक्सप्रेसवे इसी दिशा में उठाया गया एक बेहद मजबूत कदम है। एक ग्रीनफील्ड परियोजना होने का मतलब यह है कि इसे पूरी तरह से नए सिरे से, नई जमीन का अधिग्रहण करके बनाया जा रहा है, ताकि पुराने रास्तों की भारी भीड़भाड़ से बचा जा सके। हालिया रिपोर्ट के अनुसार इस विशाल और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का लगभग 25 प्रतिशत निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है।
उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच मिटेगी दूरी
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की देखरेख में बन रहा यह एक्सप्रेसवे कुल 189 किलोमीटर लंबा होगा। यह सिर्फ एक साधारण सड़क नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से एक एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे होगा, जिसका सीधा अर्थ यह है कि इस पर गाड़ियां बिना किसी स्थानीय ट्रैफिक या रुकावट के अपनी पूरी रफ्तार से दौड़ सकेंगी। वर्तमान योजना के तहत इसे चार लेन का बनाया जा रहा है, लेकिन इसमें इस बात का पूरा ख्याल रखा गया है कि भविष्य में गाड़ियों का भारी दबाव बढ़ने पर इसे आसानी से छह लेन में तब्दील किया जा सके। इस सड़क का सबसे बड़ा फायदा मुसाफिरों के समय की बचत के रूप में दिखेगा। उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार की भौगोलिक दूरी को पाटते हुए, यह एक्सप्रेसवे दोनों सिरों के बीच यात्रा के समय में कम से कम 4 से 5 घंटे की भारी कमी लाएगा। अधिकारी इस पूरी परियोजना को साल 2027 तक हर हाल में पूरा करके जनता को समर्पित करने के लक्ष्य के साथ काम कर रहे हैं।
इन सात प्रमुख जिलों की बदल जाएगी किस्मत
रूट और कनेक्टिविटी के मामले में यह एक्सप्रेसवे बेजोड़ साबित होने वाला है। इसकी शुरुआत दक्षिण बिहार के गया जिले में NH-2 पर स्थित आमस नाम की जगह से होगी। वहां से शुरू होकर यह शानदार सड़क जहानाबाद, राजधानी पटना, ऐतिहासिक वैशाली और कृषि प्रधान समस्तीपुर को पार करते हुए अंततः दरभंगा तक का लंबा सफर तय करेगी। अपने रास्ते में यह कुल सात प्रमुख जिलों को एक मजबूत सूत्र में पिरोएगी। इन जिलों के लाखों लोगों के लिए यह सड़क किसी जीवनरेखा से कम नहीं होगी। इसके साथ ही, इसे NH-27 और NH-322 जैसे अन्य बेहद महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गों से भी सीधे तौर पर जोड़ा जाएगा। इस बेहतरीन नेटवर्क के कारण ट्रकों, मालवाहक वाहनों और आम यात्रियों को एक हाईवे से दूसरे हाईवे पर जाने के लिए किसी गांव या शहर की तंग गलियों से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा।
पैकेज 4 पर केंद्रित है सबसे ज्यादा ध्यान
निर्माण की गति को तेज बनाए रखने के लिए इस महाप्रोजेक्ट को कई अलग-अलग पैकेजों में बांटा गया है। फिलहाल सबसे ज्यादा ध्यान 'पैकेज 4' पर दिया जा रहा है, जिसका काम दिन-रात तेजी से चल रहा है। इस विशेष सेक्शन की कुल लंबाई करीब 42 किलोमीटर है और यह सीधे तौर पर समस्तीपुर जिले को दरभंगा जिले के साथ जोड़ता है। इस 42 किलोमीटर के दायरे में इंजीनियरिंग की कई जटिल चुनौतियों को पार किया जा रहा है और यहां निर्माण कार्य का स्तर बहुत ही विशाल है। केवल इसी एक हिस्से के भीतर आठ बड़े मेजर ब्रिज, 11 छोटे माइनर ब्रिज, छह विशाल फ्लाईओवर और रेलवे लाइनों को पार करने के लिए दो रेल ओवर ब्रिज (ROB) का निर्माण किया जा रहा है। इसी पैकेज की सीमा के भीतर उत्तर बिहार की दो सबसे खतरनाक और प्रमुख नदियों, बागमती और बूढ़ी गंडक, के ऊपर भी ऊंचे और बेहद मजबूत पुल बनाए जा रहे हैं, जो हर मौसम में निर्बाध यातायात सुनिश्चित करेंगे।
यात्रियों के लिए वर्ल्ड-क्लास वे-साइड एमेनिटीज
इस नए एक्सप्रेसवे का डिजाइन केवल गाड़ियों की तेज रफ्तार को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि यात्रियों की सुख-सुविधाओं को केंद्र में रखकर भी तैयार किया गया है। लंबे सफर की थकान मिटाने के लिए इस पूरे मार्ग पर दो बेहद अत्याधुनिक वे-साइड एमेनिटीज का निर्माण किया जा रहा है। इनमें से एक सुविधा दरभंगा जिले की सीमा में और दूसरी समस्तीपुर जिले में बनाई जा रही है। इन परिसरों में मुसाफिरों की हर जरूरत का पूरा ध्यान रखा जाएगा। यहां सुरक्षित फ्यूल स्टेशन, गाड़ियों को खड़ी करने के लिए विशाल पार्किंग एरिया, स्वादिष्ट भोजन के लिए प्रीमियम रेस्टोरेंट और आराम करने के लिए आरामदायक रेस्ट फैसिलिटीज विकसित की जा रही हैं। साल 2027 में जब यह 189 किलोमीटर लंबा सफर जनता के लिए खुलेगा, तो यह राज्य में औद्योगिक विकास, पर्यटन, भारी व्यापार और लॉजिस्टिक्स के लिए एक बहुत बड़ा गेम-चेंजर साबित होगा।



















