बिहार में इन दिनों प्रतियोगी परीक्षाओं का मौसम है और इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो ने हलचल मचा दी है। इस वीडियो को बिहार पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा से जुड़ा बताया जा रहा है। यह परीक्षा 14 जून को आयोजित हुई थी और आज 17 जून को भी इसका आयोजन हुआ। वायरल क्लिप में एक छात्र ठसाठस भरी ट्रेन के अंदर सांस लेने तक के लिए संघर्ष करता नजर आता है। यह दृश्य देखते ही लोगों ने रेलवे की व्यवस्था और परीक्षा के दिनों में पैदा होने वाली अफरातफरी पर तीखे सवाल खड़े कर दिए।
वीडियो के साथ कई यूजर्स ने यह भी दावा किया कि भीषण गर्मी और हद से ज्यादा भीड़ की वजह से छात्र की दम घुटने से जान चली गई। हालांकि इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है।
राहुल गांधी ने भी साझा किया वीडियो
TrendKia के अनुसार यह वीडियो जल्द ही राजनीतिक मुद्दा बन गया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया और लिखा कि यह नजारा उन्हें भीतर तक झकझोर गया। उन्होंने कहा कि देश के नौजवान मजबूरी में जी रहे हैं और सरकार अपने नागरिकों, खासकर छात्रों के लिए एक सुरक्षित सफर तक का इंतजाम नहीं कर पा रही।
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में तंज कसते हुए कहा कि चुनाव के समय तो विशेष ट्रेनें दौड़ने लगती हैं, मगर परीक्षा देने जा रहे विद्यार्थियों के हिस्से में भीड़, घुटन और बदइंतजामी ही आती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की पुकार अनसुनी कर रही है और छात्रों के हक की यह लड़ाई जारी रहेगी।
रेलवे ने मौत के दावे को नकारा
वीडियो के तेजी से फैलने के बाद रेलवे की ओर से भी सफाई आई। रेलवे ने राहुल गांधी की पोस्ट का जवाब देते हुए साफ किया कि इस घटना में किसी छात्र की मौत होने की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर घूम रहे मौत के दावे सच्चाई से परे हैं और ऐसी किसी घटना की कोई आधिकारिक जानकारी मौजूद नहीं है। रेलवे के इस बयान के बाद वीडियो से जुड़ी कई अफवाहों पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
14 लाख अभ्यर्थियों के सफर ने बिगाड़ी व्यवस्था
दरअसल यह पूरा मामला 14 जून को बिहार में हुई पुलिस कांस्टेबल और वार्डर भर्ती परीक्षाओं से जुड़ा है। इन परीक्षाओं में बैठने के लिए राज्यभर से बड़ी तादाद में अभ्यर्थी अलग-अलग शहरों की ओर निकल पड़े थे। एक अनुमान के मुताबिक करीब 14 लाख उम्मीदवार परीक्षा देने के लिए यात्रा कर रहे थे। इसी का नतीजा था कि पटना जंक्शन, पाटलिपुत्र स्टेशन और आसपास के रेलवे स्टेशनों पर ऐसी भीड़ उमड़ी जैसी पहले कभी नहीं देखी गई।
स्टेशनों और ट्रेनों में बेकाबू हुए हालात
छात्रों की इतनी बड़ी संख्या ने स्टेशनों और ट्रेनों के माहौल को बेहद तनावपूर्ण बना दिया। कई ट्रेनों में क्षमता से कहीं ज्यादा यात्री ठूंस-ठूंसकर सवार हो गए, तो प्लेटफॉर्म भी लोगों से खचाखच भर गए। इसका सीधा असर ट्रेनों के संचालन पर पड़ा और कई जगहों पर गाड़ियां देरी से चलीं। कुछ स्थानों पर तो भीड़ इतनी हो गई कि रेलवे ट्रैक तक जाम हो गए।
पत्थरबाजी और पुलिस से भिड़ंत तक पहुंची बात
हालात इस कदर बिगड़े कि कई इलाकों में कानून-व्यवस्था की समस्या तक खड़ी हो गई। रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ जगहों पर पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं और भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज का भी सहारा लिया, जिसके बाद धीरे-धीरे माहौल शांत हो सका।
फिर सुलगा छात्रों की यात्रा का सवाल
इस घटना ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं के दिनों में छात्रों की यात्रा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। हर साल लाखों छात्र सरकारी नौकरी और प्रवेश परीक्षाओं के लिए लंबा सफर तय करते हैं और ऐसे मौकों पर अचानक उमड़ने वाली भीड़ रेलवे तथा प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बन जाती है। जानकारों का मानना है कि परीक्षा के दिनों में अतिरिक्त ट्रेनों और बेहतर प्रबंधन की सख्त जरूरत है, ताकि छात्र सुरक्षित और सहूलियत भरा सफर कर सकें। गौरतलब है कि 17 जून को होने वाली बिहार पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के लिए रेलवे ने कई जगहों से ट्रेनें चलाई हैं।
रेलवे भले ही छात्र की मौत के दावों को सिरे से खारिज कर चुका हो, लेकिन इस वायरल वीडियो ने देशभर में एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है। वीडियो में दिखती भीड़ और छात्रों की बेबसी ने यह सवाल दोबारा सामने ला दिया है कि लाखों उम्मीदवारों की परीक्षा यात्रा को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए आखिर कौन से ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है और रेलवे व्यवस्था, परीक्षा प्रबंधन तथा छात्रों की सुरक्षा को लेकर बहस थमने का नाम नहीं ले रही।













