पारंपरिक खेती से इतर आय बढ़ाने के इच्छुक किसानों के लिए मीठे पानी में मोती तैयार करने का विकल्प एक नए अवसर के रूप में सामने आया है। इस तकनीक के तहत प्राकृतिक तालाबों अथवा कृत्रिम पानी के टैंकों में विशेष मीठे पानी की सीपों का पालन किया जाता है। एक निर्धारित वैज्ञानिक प्रक्रिया के माध्यम से इन सीपों के भीतर उच्च गुणवत्ता के मोती विकसित किए जाते हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से जुड़े संस्थान भी इस पूरे तरीके पर किसानों को व्यवस्थित तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराते हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में इसका दायरा बढ़ रहा है।
चालू वित्तीय वर्ष में शुरू हुए तीन स्तरीय प्रोजेक्ट
मोती पालन विशेषज्ञ डॉ. अयूब हुसैन के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने इसी चालू वित्तीय वर्ष के दौरान मोती संवर्धन योजना की शुरुआत की है। इस सरकारी योजना के तहत किसानों की जोत और जल संसाधनों के आकार को देखते हुए तीन अलग-अलग श्रेणियों में प्रोजेक्ट तय किए गए हैं। पहला मॉडल उन छोटे किसानों के लिए तैयार किया गया है जिनके पास उत्तर प्रदेश खेत तालाब योजना के तहत बने तालाब उपलब्ध हैं। ऐसे जलस्रोतों में 2000 सीपों के साथ मोती पालन की शुरुआत की जा सकती है।
दूसरी श्रेणी उन किसानों को ध्यान में रखकर बनाई गई है जिनके पास एक एकड़ से कम रकबे वाले जलस्रोत हैं। इस श्रेणी के किसान 5000 सीपों का सेटअप लगाकर उत्पादन कर सकते हैं। वहीं तीसरी श्रेणी बड़े किसानों अथवा पहले से मछली पालन कर रहे पशुपालकों के लिए निर्धारित की गई है। जिन किसानों के पास बड़े या खाली पड़े तालाब मौजूद हैं, वे 15000 सीपों की क्षमता वाला बड़ा प्रोजेक्ट स्थापित कर सकते हैं। पूरे उत्तर प्रदेश में इस वित्तीय बजट के तहत कुल 175 ऐसे प्रोजेक्ट लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
डेढ़ बीघा जमीन पर भी संभव, 40 फीसदी अनुदान का प्रावधान
इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि जिन काश्तकारों के पास मात्र डेढ़ बीघा जमीन है, वे भी अपने खेतों में छोटा तालाब या टैंक बनाकर मोती उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। राज्य सरकार इस पूरे उपक्रम को बढ़ावा देने के लिए निर्धारित लागत पर 40 प्रतिशत तक का वित्तीय अनुदान दे रही है। इससे किसानों पर शुरुआती पूंजीगत खर्च का बोझ काफी कम हो जाता है और सीमित जमीन से भी नियमित तथा बेहतर मुनाफा कमाना मुमकिन होता है।
आवेदन और तकनीकी मार्गदर्शन की प्रक्रिया
जो भी किसान इस सरकारी सहायता का लाभ उठाकर मोती उत्पादन शुरू करना चाहते हैं, वे अपने जिले के विकास भवन स्थित मत्स्य पालन विभाग कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। विभाग में तैनात मत्स्य अधिकारी योजना के पात्रता नियमों, आवेदन प्रक्रिया, तकनीकी शर्तों और सीपों के रखरखाव से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराते हैं। इस व्यवस्था के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ही किसानों को आवश्यक प्रशासनिक और व्यावहारिक मार्गदर्शन मिल जाता है।
















