भारत में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया है। अगले एक दशक के दौरान देश भर में 30,000 करोड़ रुपये के निवेश से 100 नए हवाई अड्डों का निर्माण किया जाएगा। यह घोषणा केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने गुजरात स्थित अहमदाबाद हवाई अड्डे पर एक विशेष कार्यक्रम के दौरान की। इस अवसर पर उन्होंने अहमदाबाद में देश की तीसरी 'हब एंड स्पोक' हवाई सेवा का औपचारिक शुभारंभ भी किया। इस खास आयोजन में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उप-मुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी मौजूद रहे।
अहमदाबाद में हब एंड स्पोक मॉडल का आगाज
गुजरात का अहमदाबाद हवाई अड्डा अब भारत का ऐसा तीसरा प्रमुख विमानन केंद्र बन गया है जहां हब एंड स्पोक सेवा की शुरुआत की गई है। इस परिचालन व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य देश के छोटे शहरों और कस्बों से आने वाले यात्रियों को बड़े भारतीय हवाई अड्डों के जरिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से आसानी से जोड़ना है। इससे यात्रियों को विदेश यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
उल्लेखनीय है कि इस आधुनिक सेवा को सबसे पहले उत्तर प्रदेश के वाराणसी हवाई अड्डे पर लागू किया गया था, जो देश का पहला हब एंड स्पोक केंद्र बना। इसके बाद इसी साल जुलाई महीने में पंजाब के अमृतसर हवाई अड्डे पर इस कनेक्टिविटी मॉडल को सफलतापूर्वक शुरू किया गया था। अब अहमदाबाद इस कड़ी में जुड़ने वाला देश का तीसरा हवाई अड्डा बन गया है।
समझिए क्या है हब एंड स्पोक सेवा का गणित
विमानन उद्योग में हब एंड स्पोक सेवा को बेहद कुशल और सुविधाजनक संचालन मॉडल माना जाता है। इस प्रणाली के तहत एक विशाल और सर्वसुविधायुक्त हवाई अड्डे को 'हब' (मुख्य केंद्र) के रूप में विकसित किया जाता है, जबकि छोटे या क्षेत्रीय हवाई अड्डों को 'स्पोक' (संबद्ध शाखा) की तरह संचालित किया जाता है।
इस व्यवस्था को एक आसान उदाहरण से समझा जा सकता है। यदि किसी यात्री को उत्तर प्रदेश के अयोध्या से ब्रिटेन की राजधानी लंदन जाना है, तो अयोध्या यहां एक स्पोक हवाई अड्डे की भूमिका निभाएगा। यात्री सबसे पहले अयोध्या से उड़ान भरकर हब हवाई अड्डे यानी अहमदाबाद पहुंचेगा। इसके बाद वह बिना किसी अतिरिक्त झंझट के अहमदाबाद से सीधे लंदन जाने वाली कनेक्टिंग फ्लाइट में सवार हो सकेगा। यह मॉडल यात्रियों के समय की बचत करता है और उड़ानों की परिचालन दक्षता को बढ़ाता है।
12 वर्षों में 74 से 166 पहुंची एयरपोर्ट्स की संख्या
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने देश में हवाई बुनियादी ढांचे के विकास का ब्योरा साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में पूरे भारत में केवल 74 क्रियाशील हवाई अड्डे थे। हालांकि, बीते 12 वर्षों के दौरान सुनियोजित प्रयासों के कारण देश के एविएशन मैप पर हवाई अड्डों की कुल संख्या बढ़कर 166 हो चुकी है।
मंत्री ने इस उपलब्धि को राष्ट्रीय रिकॉर्ड करार देते हुए कहा कि बीते 12 सालों में औसतन हर 40 दिनों में एक नए हवाई अड्डे या किसी नए टर्मिनल का निर्माण कार्य पूरा किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागर विमानन मंत्रालय की यह 12 वर्षों की यात्रा महज एक शुरुआती पड़ाव है और आने वाले समय में बुनियादी ढांचे के विस्तार की गति को और तेज किया जाएगा।
उड़ान योजना के लिए 28,840 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना 'उड़े देश का आम नागरिक' (उड़ान) ने पिछले 10 वर्षों में भारत के हवाई यातायात परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। इस सफलता को आगे बढ़ाते हुए अगले 10 वर्षों के दौरान 100 नए हवाई अड्डों को विकसित करने के लिए 30,000 करोड़ रुपये का विशाल खाका तैयार किया गया है।
इस रणनीतिक विस्तार की नींव इस साल मार्च महीने में रखी गई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में रीजनल एयर कनेक्टिविटी स्कीम के संशोधित प्रारूप को हरी झंडी दिखाई गई थी। यह संशोधित योजना वित्त वर्ष 2026-27 से लेकर वित्त वर्ष 2035-36 तक कुल 10 साल की अवधि के लिए लागू की जाएगी। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार की तरफ से 28,840 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता का विशेष प्रावधान रखा गया है।


















