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मथुरा के केशव देव मंदिर में जन्माष्टमी पर दिखेंगे 24 अवतार, 5000 साल पुराने पावन धाम में उमड़ेंगे श्रद्धालुधर्म
2 सित॰ 2026, 8:10 am (1 घंटे पहले)· 2

मथुरा के केशव देव मंदिर में जन्माष्टमी पर दिखेंगे 24 अवतार, 5000 साल पुराने पावन धाम में उमड़ेंगे श्रद्धालु

उत्तर प्रदेश के मथुरा में श्री कृष्ण जन्मस्थान के समीप स्थित प्राचीन केशव देव मंदिर में जन्माष्टमी पर भगवान के 24 अवतारों के विशेष दर्शन होंगे। साल में केवल दो बार आयोजित होने वाले इस दिव्य आयोजन के लिए मंदिर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं।

उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी मथुरा में श्री कृष्ण जन्मस्थान के निकट स्थित प्राचीन केशव देव मंदिर में आगामी जन्माष्टमी उत्सव को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को भगवान केशव देव के 24 दिव्य अवतारों के दुर्लभ और अलौकिक दर्शन करने का अवसर प्राप्त होगा। वर्ष में केवल दो बार, अक्षय तृतीया और जन्माष्टमी पर ही भगवान का यह विशेष स्वरूप भक्तों के समक्ष प्रकट किया जाता है। इस पावन अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए पूजा-अर्चना करते हैं और स्वयं को धन्य मानते हैं।

भगवान के 24 अवतारों के दुर्लभ दर्शन और परंपरा

केशव देव मंदिर की परंपराएं और धार्मिक अनुष्ठान अन्य मंदिरों से सर्वथा भिन्न हैं। भगवान केशव देव और श्री कृष्ण के मध्य एक विशेष आध्यात्मिक संबंध माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया तथा जन्माष्टमी के पावन पर्व पर ठाकुर जी का विशेष शृंगार किया जाता है। इस दौरान 24 अवतारों के दर्शन के साथ-साथ भगवान को चंदन का विशेष लेप लगाया जाता है, जिसकी धार्मिक ग्रंथों में बहुत बड़ी महिमा बताई गई है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु इन विशेष स्वरूपों के दर्शन कर प्रभु के चरणों में अपनी आस्था व्यक्त करते हैं और शांति की प्रार्थना करते हैं।

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5000 वर्ष पुराना इतिहास और कंस के कारागार का रहस्य

इस पवित्र धाम का इतिहास अत्यंत प्राचीन और पौराणिक गाथाओं से समृद्ध है। मंदिर के पुजारी गिरिराज शरण गोस्वामी के अनुसार इस मंदिर का प्रथम निर्माण आज से लगभग 5,000 वर्ष पूर्व भगवान श्री कृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने करवाया था। इसके अतिरिक्त ऐतिहासिक संदर्भों में यह भी उल्लेख मिलता है कि राजा अमरीश और भगवान राम के अनुज शत्रुघ्न ने भी इस मंदिर परिसर में दिव्य विग्रहों की स्थापना की थी। जनश्रुति और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह वही पवित्र स्थल है जहां द्वापर युग में कंस के कारागार के भीतर माता देवकी और वासुदेव के घर भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। यही कारण है कि इस मंदिर की महत्ता देश-विदेश के श्रद्धालुओं के बीच अत्यंत उच्च मानी जाती है।

जन्माष्टमी की तैयारियां और श्रद्धालुओं की व्यवस्था

सामान्य दिनों में भी इस ऐतिहासिक मंदिर में प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन हेतु पहुंचते हैं, परंतु पर्वों के समय यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। आगामी जन्माष्टमी पर्व को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन की ओर से विशेष तैयारियां की जा रही हैं। जन्माष्टमी के दौरान मंदिर परिसर में विभिन्न प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। दूर-दराज से आने वाले भक्तों की सुविधा के लिए सुगम दर्शन, सुरक्षा व्यवस्था और कतार प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि हर श्रद्धालु शांतिपूर्वक और श्रद्धाभाव के साथ भगवान केशव देव के दर्शन कर सके।

सवाल-जवाब

मथुरा के केशव देव मंदिर में भगवान के 24 अवतारों के दर्शन कब होते हैं?
केशव देव मंदिर में 24 अवतारों के विशेष दर्शन साल में केवल दो बार, अक्षय तृतीया और श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पर्व पर, होते हैं।
केशव देव मंदिर का निर्माण किसने करवाया था?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस प्राचीन मंदिर का पहला निर्माण लगभग 5,000 वर्ष पूर्व भगवान श्री कृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने करवाया था।
इस मंदिर का श्री कृष्ण के जन्मस्थान से क्या संबंध है?
यह मंदिर श्री कृष्ण जन्मभूमि से चंद कदमों की दूरी पर स्थित है और माना जाता है कि यह वही स्थान है जहां कंस के कारागार में माता देवकी और वासुदेव के घर श्री कृष्ण का जन्म हुआ था।
केशव देव मंदिर में किन अन्य पौराणिक हस्तियों द्वारा विग्रह स्थापित किए गए थे?
मंदिर के इतिहास के अनुसार राजा अमरीश और भगवान राम के भाई शत्रुघ्न ने भी इस पावन मंदिर में विग्रह स्थापित किए थे।
जन्माष्टमी पर मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए क्या व्यवस्थाएं की जा रही हैं?
जन्माष्टमी के दौरान मंदिर परिसर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और भक्तों की भीड़ को देखते हुए दर्शन की सुगम व्यवस्था की गई है।
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