दरभंगा जिले में केला उगाने वाले किसानों के लिए सितंबर का महीना खासा जोखिम भरा साबित हो सकता है, क्योंकि इन दिनों खेतों में नमी बढ़ने से पौधों पर बीमारियों का हमला तेज हो जाता है. यही वजह है कि कृषि विशेषज्ञों ने फसल बचाने के लिए किसानों को कुछ अहम सुझाव दिए हैं.
लाखों किसानों की कमाई से जुड़ी फसल
केला बिहार समेत देश के बड़े हिस्से में लाखों परिवारों की रोज़ी-रोटी का जरिया बना हुआ है. डॉ.राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में अनुसंधान के पूर्व सह निदेशक रहे और केला अनुसंधान संस्थान, गोरौल के प्रोफेसर इंचार्ज प्रोफेसर (डॉ.) एस.के. सिंह ने यह सलाह किसानों तक पहुंचाई है. उनका कहना है कि APEDA की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि 2026 में देश में केले का उत्पादन करीब 39.9 मिलियन टन तक पहुंच सकता है, जबकि निर्यात का आंकड़ा 462 मिलियन डॉलर तक जा चुका है. इसी वजह से अब सिर्फ ज्यादा केला उगाना काफी नहीं है, बाजार और निर्यात दोनों के लिहाज से बिना दाग वाला और अच्छी क्वालिटी का फल तैयार करना जरूरी हो गया है.
ज्यादा नमी से जड़ों को खतरा
सितंबर में खेतों की मिट्टी लंबे समय तक गीली रहती है, जिसका सीधा असर केले की जड़ों पर पड़ता है. जड़ें कमजोर पड़ने लगती हैं और इससे जड़ सड़न के साथ-साथ फ्यूजेरियम विल्ट जैसी बीमारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है. विशेषज्ञों की सलाह है कि खेत में पानी जमा दिखते ही सिंचाई तुरंत रोक दें और निकासी वाली नालियां खोल दें. अगर बाढ़ जैसे हालात बन जाएं तो पौधों की कतारों के बीच गहरी नाली खोदकर पानी बाहर निकालना सबसे पहला कदम होना चाहिए.
भारी घौद वाले पौधों को सहारा जरूरी
भारी घौद, गीली और मुलायम मिट्टी तथा तेज हवा मिलकर पौधों के गिरने का खतरा बढ़ा देते हैं. जिन पौधों में फल आ चुका है, उन्हें दो बांस या मजबूत रस्सी से बांधकर सहारा देना चाहिए, ताकि घौद पर ज्यादा दबाव न पड़े और पौधा टूटने से बच जाए. आखिरी हथ्था निकलने के बाद नर फूल को हटा देना और घौद पर स्लीव चढ़ाना फल की गुणवत्ता को और बेहतर बनाता है.
हरी पत्तियां न काटें, TR-4 से रहें सतर्क
सूखी और रोगग्रस्त पत्तियों को हटाना ठीक है, लेकिन हरी पत्तियों को बिल्कुल न काटा जाए क्योंकि यही पत्तियां घौद को पोषण देती हैं. फ्यूजेरियम विल्ट TR-4 को लेकर खास सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है. अगर किसी पौधे की निचली पत्तियां पीली पड़ने लगें और तने के भीतर भूरी-लाल धारियां नजर आएं, तो उस पौधे से सकर बिल्कुल न लिया जाए, वरना बीमारी दूसरे पौधों तक फैल सकती है.
नाइट्रोजन, खरपतवार और कटाई पर भी सलाह
इस महीने खेत में जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन, खरपतवार और अतिरिक्त सकर रखने से बचने को कहा गया है. फल की कटाई कैलेंडर की तारीख देखकर नहीं, बल्कि फल के पकने और परिपक्वता को देखकर करनी चाहिए. काटे गए घौद को धूप में खुला न छोड़ें और फल पकाने के लिए प्रतिबंधित कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल हरगिज न करें, क्योंकि यह सेहत और फसल दोनों के लिए नुकसानदेह है.



















