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हाजीपुर में उफनाई गंडक नदी ने तोड़ा तटबंध, दर्जनों गांव डूबे, प्रशासन नदारदबिहार
6 सित॰ 2026, 8:19 pm (18 मिनट पहले)· 1

हाजीपुर में उफनाई गंडक नदी ने तोड़ा तटबंध, दर्जनों गांव डूबे, प्रशासन नदारद

बिहार के हाजीपुर में गंडक नदी का रिंग बांध टूटने से दर्जनों गांवों में पानी घुस गया, हजारों लोग प्रभावित हुए और केले की फसल तबाह हो गई, लेकिन घंटों बाद भी कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।

बिहार के वैशाली जिले में हाजीपुर के पास गंडक नदी का रिंग बांध देर रात भरभराकर टूट गया, जिससे आसपास के दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी घुसने लगा। नदी में लगातार बढ़ रहे जलस्तर के चलते बांध पर दबाव बढ़ता जा रहा था और आखिरकार करीब 25 फीट हिस्सा बहने से हालात बेकाबू हो गए।

अचानक मची अफरा-तफरी

बांध टूटते ही पानी तेज रफ्तार से गांवों की तरफ बढ़ा, जिससे लोगों को भागने का मौका ही नहीं मिला। सैकड़ों घरों में देखते ही देखते पानी घुस गया और शुरुआती जानकारी के अनुसार करीब 10 हजार से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हुए हैं। हाजीपुर अपनी केले की खेती के लिए मशहूर है और इस बाढ़ में कई एकड़ में लगी केले की फसल पूरी तरह डूब गई। किसानों को आशंका है कि उनका करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है। हालात इतने बिगड़ गए कि कई परिवारों को अपने मवेशी और घर का सामान वहीं छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तरफ भागना पड़ा।

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दो दिन पहले से हो रहा था रिसाव, फिर भी नहीं चेता प्रशासन

गांव वालों का कहना है कि बांध में पिछले दो दिनों से पानी रिसना शुरू हो गया था और उन्होंने समय रहते इसकी जानकारी स्थानीय प्रशासन को भी दे दी थी। आरोप है कि इसके बावजूद मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिसका नतीजा यह हुआ कि आखिरकार बांध पूरी तरह टूट गया। ग्रामीणों का मानना है कि अगर समय पर रिसाव को रोका जाता तो इतनी बड़ी तबाही से बचा जा सकता था।

बांध टूटने के बाद भी नहीं पहुंचे अधिकारी

सबसे बड़ी बात यह है कि बांध टूटने और गांवों में पानी भरने के इतने घंटों बाद भी कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर हालात का जायजा लेने नहीं पहुंचा है। सरकार की तरफ से पहले ही हाई अलर्ट जारी किया जा चुका था, बावजूद इसके स्थानीय प्रशासन की गैरमौजूदगी को लेकर ग्रामीणों में गुस्सा है। न तो राहत सामग्री बांटी गई है और न ही बचाव दल मौके पर उतारा गया है, जिससे बाढ़ में फंसे लोग खुद अपने बलबूते सुरक्षित जगह पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

घरों में फंसे लोग, डूबी हुई हैं फसलें

मौके से सामने आई तस्वीरों में बाढ़ की भयावहता साफ झलक रही है। कई घर चारों तरफ से पानी से घिरे नजर आ रहे हैं और कुछ परिवार अब भी घरों के भीतर ही फंसे हुए हैं। केले के बगीचे पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं, जिससे किसानों की सालभर की मेहनत बर्बाद होती दिख रही है। स्थानीय लोगों में प्रशासनिक सुस्ती को लेकर भारी नाराजगी है, उनका कहना है कि रिसाव की सूचना समय पर देने के बावजूद न मरम्मत हुई और न अब राहत पहुंच रही है।

सवाल-जवाब

गंडक नदी का रिंग बांध कहां टूटा?
बिहार के वैशाली जिले के हाजीपुर के पास गंडक नदी का रिंग बांध टूटा।
बांध कितने फीट हिस्से में टूटा?
करीब 25 फीट रिंग बांध टूटा।
इस बाढ़ से कितने लोग प्रभावित हुए हैं?
शुरुआती जानकारी के मुताबिक करीब 10 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं।
बांध टूटने से पहले क्या कोई चेतावनी मिली थी?
स्थानीय लोगों के मुताबिक बांध में पिछले दो दिनों से रिसाव हो रहा था और उन्होंने प्रशासन को इसकी सूचना भी दी थी।
बांध टूटने के बाद क्या प्रशासन मौके पर पहुंचा?
ग्रामीणों के मुताबिक बांध टूटने और पानी घुसने के काफी समय बाद भी कोई अधिकारी मौके पर स्थिति देखने नहीं पहुंचा।
किस फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ?
हाजीपुर की मशहूर केले की कई एकड़ फसल बाढ़ के पानी में डूब गई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 मिनट पहले

यह घटना सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और आपदा प्रबंधन की घोर विफलता को दर्शाती है। दो दिन पहले रिसाव की चेतावनी मिलने के बावजूद कार्रवाई न होना और हाई अलर्ट के बाद भी अधिकारियों का मौके से नदारद रहना गंभीर आपराधिक उपेक्षा के दायरे में आ सकता है। यदि समय पर जवाबदेही तय नहीं की गई, तो प्रभावितों की मुश्किलें और बढ़ेंगी तथा कानूनी कार्रवाई की मांग जोर पकड़ेगी।

Rohan Verma@rohan-verma·2 मिनट पहले

यह घटना बाढ़ पूर्व तैयारियों और ज़मीनी स्तर पर निगरानी तंत्र की पोल खोलती है। जलस्तर बढ़ने के बावजूद मरम्मत कार्यों में देरी और हाई अलर्ट के बाद भी अधिकारियों का मौके पर न पहुँचना यह साबित करता है कि कागजी योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर है। यदि तुरंत बचाव दल और राहत सामग्री नहीं पहुँची, तो जनहानि का खतरा और बढ़ जाएगा।

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