बिहार की राजधानी पटना में बुधवार का दिन भारी हंगामे और हिंसा का गवाह बना। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) द्वारा आयोजित किया गया लोकभवन मार्च बेकाबू हो गया। मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET के बहुचर्चित पेपर लीक विवाद को लेकर न्याय की मांग कर रहे छात्रों का यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन अचानक उग्र रूप ले लिया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस और प्रदर्शनकारी सीधे तौर पर एक दूसरे से भिड़ गए। सड़क पर हर तरफ चीख पुकार मच गई और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस को अंततः कड़े कदम उठाने पड़े। इस दौरान हुई धक्का मुक्की ने एक बड़े बवाल का रूप ले लिया, जिसके कारण पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा प्रहार
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे खौफनाक और निंदनीय पहलू घटनास्थल पर मौजूद मीडिया कर्मियों पर हुआ जानलेवा हमला था। अफरातफरी के माहौल का फायदा उठाते हुए भीड़ में शामिल कुछ अराजक और उपद्रवी तत्वों ने पत्रकारों को अपना निशाना बनाया। चश्मदीदों ने बताया कि कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। कई राष्ट्रीय समाचार चैनलों से जुड़े रिपोर्टर और कैमरामैन इस बर्बरता का शिकार हुए। उग्र भीड़ ने कई मीडियाकर्मियों के कपड़े तक फाड़ दिए और उनका उपकरण बर्बाद करने की नीयत से कैमरे छीनने की हिंसक कोशिशें कीं। स्थिति इस कदर बेकाबू थी कि कई पत्रकारों के सिर फोड़ दिए गए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आई हैं। कवरेज करने गए लोगों पर इस तरह के हमले ने पूरे प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्यों हिंसक हुआ लोकभवन मार्च
बुधवार को यह प्रदर्शन मुख्य रूप से NEET पेपर लीक मामले को लेकर बुलाया गया था। AISA से जुड़े छात्र इस पूरे घोटाले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे। उनकी प्रमुख मांगों में परीक्षा प्रणाली में पूरी पारदर्शिता लाना और पेपर लीक के असली दोषियों की पहचान कर उन पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करना शामिल था। अपने इन्हीं मुद्दों को लेकर बड़ी संख्या में छात्र लोकभवन की ओर कूच कर रहे थे। प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और छात्रों के जत्थे को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने मजबूत बैरिकेडिंग लगा रखी थी। जब प्रदर्शनकारी छात्रों का हुजूम इन बैरिकेड्स के पास पहुंचा, तो उन्हें रोक दिया गया। इसी रोक टोक के बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई, जिसने देखते ही देखते एक बड़े टकराव का रूप ले लिया।
दिल्ली के जंतर मंतर की घटना का भी आक्रोश
इस विरोध प्रदर्शन के पीछे केवल NEET का मुद्दा ही नहीं था, बल्कि छात्रों के अंदर देश की राजधानी दिल्ली में हुई एक और घटना को लेकर भी गहरा गुस्सा था। AISA के कार्यकर्ता दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज के खिलाफ भी अपना विरोध जता रहे थे। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट तौर पर कहना था कि सरकार को छात्रों की जायज आवाज को पुलिस बल के दम पर दबाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। उनका मानना है कि पेपर लीक जैसे गंभीर और छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों पर सरकार को जिम्मेदारी से जवाब देना चाहिए, न कि विरोध करने वालों पर पुलिसिया कार्रवाई करनी चाहिए।
पुलिस और छात्रों के अपने अपने दावे
इस पूरे बवाल के बाद दोनों पक्षों की ओर से अलग अलग दावे किए जा रहे हैं। छात्रों और AISA कार्यकर्ताओं का सीधा आरोप है कि उनके शांतिपूर्ण मार्च को कुचलने के लिए पुलिस ने बिना किसी उकसावे के उन पर लाठियां बरसाईं। उनका यह भी कहना है कि भीड़ को तितर बितर करने के लिए भारी मात्रा में वाटर कैनन का अंधाधुंध इस्तेमाल किया गया। दूसरी तरफ, स्थानीय पुलिस का पक्ष इससे बिल्कुल अलग है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों का रवैया उग्र था और उन्होंने सुरक्षा के लिए लगाई गई बैरिकेडिंग को जबरन तोड़ने का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार, जब भीड़ ने सुरक्षा व्यवस्था को भंग करने और प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने की कोशिश की, तो मजबूरी में हालात पर काबू पाने के लिए उन्हें हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इस पूरी झड़प में न केवल पत्रकार, बल्कि कई छात्र और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।
छात्रों की चेतावनी और भारी पुलिस बल की तैनाती
हिंसा और पत्रकारों पर हमले के बाद पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए घटनास्थल पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों की कई टुकड़ियों को तुरंत बुला लिया गया है। फिलहाल मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है और हालात पर पैनी नजर रखी जा रही है। प्रशासन और आम जनता को अब इस पूरी घटना पर पुलिस की विस्तृत और आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे यह साफ हो सके कि पत्रकारों पर हमला करने वाले उपद्रवी कौन थे। इस बीच, AISA ने सरकार और प्रशासन को खुली चेतावनी दी है। संगठन का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द से जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे अपने इस आंदोलन को आने वाले दिनों में और भी ज्यादा तेज और व्यापक करेंगे।



















