प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन के एक साथी को प्रशासनिक दखल और मुलाकात के बाद बड़ी राहत हासिल हुई है। प्रधानमंत्री से मुलाकात के फौरन बाद उनके 81 साल पुराने सहपाठी की जमीन से जुड़ा विवाद अचानक सुलझता हुआ नजर आया। असगर अली वोरा ने प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर भायंदर में स्थित अपनी लगभग 2810 वर्ग मीटर जमीन पर कथित अवैध कब्जे की गुहार लगाई थी। इस मुलाकात के कुछ ही दिनों के भीतर भारतीय जनता पार्टी के विधायक नरेंद्र मेहता ने इस विवादित भूमि का कब्जा छोड़ने की सार्वजनिक घोषणा कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री के क्लासमेट असगर अली वोरा के विरुद्ध पुलिस में दर्ज कराई गई अपनी शिकायत को भी वापस लेने का औपचारिक फैसला लिया है।
वडनगर के दिनों की पुरानी दोस्ती और मुलाकात
यह पूरा मामला मीरा रोड निवासी 81 वर्षीय असगर अली वोरा से जुड़ा है, जिन्होंने हाल ही में अपने बचपन के स्कूल के साथी और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट की थी। इस खास मुलाकात के दौरान उन्होंने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया था कि भायंदर में उनकीमती जमीन पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक नरेंद्र मेहता की कंस्ट्रक्शन कंपनी ने कब्जा जमा लिया है। इस उच्च स्तरीय मुलाकात के कुछ ही दिनों बाद मंगलवार को भाजपा नेता ने खुद आगे आकर यह घोषणा की कि वह उस विवादित जमीन के कब्जे को पूरी तरह छोड़ रहे हैं और उस भूखंड पर निर्माण कार्य के लिए दी गई स्वीकृतियों को भी सरकार के समक्ष सरेंडर कर रहे हैं।
सालों पुराना जमीन विवाद और खरीद-फरोख्त
असगर अली वोरा ने अपने शुरुआती जीवन में गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक ही कक्षा में शिक्षा प्राप्त की थी। पुरानी दोस्ती का यह हवाला देते हुए वह बीते 8 सितंबर को प्रधानमंत्री से मिले थे और इस भूमि विवाद में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था। उन्होंने मीडिया और अधिकारियों को जानकारी दी थी कि उन्होंने वर्ष 1989 में भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में लगभग 2810 वर्ग मीटर जमीन के इस टुकड़े को खरीदा था। हालांकि उनके अनुसार साल 2011 में इस प्लॉट पर स्वयं बिल्डर्स और मेहता की कंपनी सेवन-इलेवन कंस्ट्रक्शन्स ने बलपूर्वक कब्जा कर लिया था जिसके बाद से यह कानूनी पचड़े में फंसा हुआ था।
प्रशासनिक बैठक और समाधान की ओर कदम
अपनी इस लंबी लड़ाई के बारे में बताते हुए असगर अली वोरा ने कहा कि वह करीब 15 वर्षों से लगातार विभिन्न सरकारी दफ्तरों और अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई उस मुलाकात के दौरान उन्हें अत्यंत सकारात्मक प्रतिक्रिया और आश्वासन मिला था। इस मुलाकात के तुरंत बाद प्रशासनिक अमले और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने इस पेचीदे मामले पर त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी। इसी सिलसिले में मंगलवार को राज्य के मंत्रालय भवन में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी द्वारा एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में असगर अली वोरा स्वयं उपस्थित रहे और उनके साथ विधायक नरेंद्र मेहता, मीरा-भायंदर म्युनिसिपल कमिश्नर राधा बिनोद शर्मा तथा टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे ने भी हिस्सा लिया।
विधायक का लिखित पत्र और शिकायत वापसी
बैठक की कार्यवाही के दौरान विधायक नरेंद्र मेहता ने टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट को एक लिखित पत्र सौंपा। इस पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि वह विवादित जमीन का कब्जा छोड़ रहे हैं और इस प्लॉट पर मिली हुई समस्त कंस्ट्रक्शन मंजूरियों को वापस लेते हैं। मेहता ने अपने पत्र में यह भी सफाई दी थी कि यह जमीन उन्होंने वर्ष 2019 में मर्विन फर्नांडीस नामक व्यक्ति से खरीदी थी। इसके अलावा पुलिस कमिश्नर को संबोधित एक अन्य अलग पत्र में विधायक ने यह भी पुष्ट किया कि वह वोरा के खिलाफ की गई अपनी पुरानी पुलिस शिकायत को वापस ले रहे हैं क्योंकि दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से समझौता हो गया है।















