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अरब सागर में भारतीय युद्धपोत से टकराया पाकिस्तानी नौसेना का जहाज, नई दिल्ली ने दर्ज कराया कड़ा विरोधभारत
16 सित॰ 2026, 4:27 pm (25 मिनट पहले)· 0

अरब सागर में भारतीय युद्धपोत से टकराया पाकिस्तानी नौसेना का जहाज, नई दिल्ली ने दर्ज कराया कड़ा विरोध

अरब सागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नियमित गश्त कर रहे भारतीय नौसेना के युद्धपोत से पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज टकरा गया। भारत ने इस गैर-पेशेवर हरकत पर पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

अरब सागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक बेहद संवेदनशील घटना सामने आई है, जहां गश्त लगा रहे भारतीय नौसेना के एक युद्धपोत से पाकिस्तानी नौसेना का जहाज टकरा गया। मंगलवार की शाम को घटी इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, नियमित निगरानी मिशन पर तैनात भारतीय जहाज के पास पाकिस्तानी पोत अचानक खतरनाक गति से आया और असुरक्षित तरीके से दिशा बदलते हुए टक्कर मार दी। हालांकि, इस हादसे में किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन भारत सरकार ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है।

नई दिल्ली और इस्लामाबाद में कूटनीतिक विरोध दर्ज

घटना के अगले ही दिन, यानी बुधवार को भारत ने कूटनीतिक मोर्चे पर त्वरित कार्रवाई की। विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के प्रभारी (प्रभारी राजदूत) को तलब किया और पाकिस्तानी नौसैनिकों के इस गैर-पेशेवर तथा अस्वीकार्य व्यवहार पर कड़ा विरोध पत्र सौंपा। इसके साथ ही, भारत ने इस्लामाबाद स्थित अपने प्रभारी राजदूत को भी यह निर्देश दिया कि वे पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के समक्ष इस मामले को लेकर आधिकारिक विरोध दर्ज कराएं। भारत ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमाओं में इस तरह की हरकतें कतई स्वीकार्य नहीं हैं।

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1991 के द्विपक्षीय समझौते के उल्लंघन का मुद्दा

इस पूरे घटनाक्रम में भारत ने अप्रैल 1991 में दोनों देशों के बीच हुए ऐतिहासिक सैन्य समझौते का विशेष रूप से उल्लेख किया है। इस द्विपक्षीय समझौते को सैन्य गतिविधियों और अभ्यासों के दौरान गलतफहमियों और सम्भावित हादसों को रोकने के उद्देश्य से लागू किया गया था। इस संधि के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं

  • अनुच्छेद 10 का प्रावधान: इस समझौते के अनुच्छेद 10 में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में दोनों देशों के युद्धपोतों और पनडुब्बियों को एक-दूसरे से सुरक्षित दूरी बनाकर रखनी होगी।
  • 3 नॉटिकल मील का नियम: नियमों के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के सैन्य जहाजों को एक-दूसरे के 3 नॉटिकल मील के दायरे में आने से बचना चाहिए।
  • सुरक्षा का उद्देश्य: इस दूरी को बनाए रखने का मूल मकसद यही है कि समंदर में अचानक पैदा होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति या सैन्य टकराव के खतरे को टाला जा सके।

सैन्य हमला नहीं, लेकिन गंभीर लापरवाही

सरकारी सूत्रों ने यह स्पष्ट किया है कि इस घटना को किसी सैन्य हमले या उकसावे के रूप में नहीं देखा जा रहा है। हालांकि, इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री नौवहन नियमों का खुला उल्लंघन और पाकिस्तानी नौसेना की गंभीर लापरवाही माना गया है। अंतरराष्ट्रीय समुद्र में जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य होता है, लेकिन पाकिस्तानी जहाज की तेज रफ्तार और अचानक दिशा बदलने की वजह से यह टक्कर हुई।

जून 2011 की पुरानी घटना की यादें

अरब सागर में दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आमने-सामने आने का यह कोई पहला मामला नहीं है। जून 2011 में भी इसी तरह का एक विवाद सामने आया था, जब भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस गोदावरी और पाकिस्तानी नौसेना के जहाज पीएनएस बाबर के बीच समुद्र में जोखिम भरी स्थिति बन गई थी। उस समय भी भारत ने पाकिस्तान पर खतरनाक तरीके से जहाज चलाने का आरोप लगाया था और 1991 के समझौते के अनुच्छेद 10 के तहत अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया था।

आगामी स्थिति और समुद्री सुरक्षा

वर्तमान घटना के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पाकिस्तान कूटनीतिक विरोध के जवाब में क्या कदम उठाता है। परमाणु हथियारों से लैस दोनों पड़ोसियों के बीच द्विपक्षीय संबंध पहले से ही तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इस तरह की असावधानी बड़े विवाद का रूप ले सकती है। भारत ने पाकिस्तान से आग्रह किया है कि वह अपने सैन्य बेड़ों को सख्त निर्देश जारी करे ताकि भविष्य में 1991 के समझौते की मर्यादा का पालन हो और समुद्री क्षेत्र में शांति बना रहे।

सवाल-जवाब

अरब सागर में भारतीय युद्धपोत और पाकिस्तानी जहाज की टक्कर कब हुई?
यह घटना मंगलवार शाम को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में घटी जब भारतीय युद्धपोत नियमित निगरानी मिशन पर था।
क्या इस हादसे में कोई बड़ा नुकसान हुआ है?
अधिकारियों के अनुसार, इस घटना में किसी बड़े नुकसान या जनहानि की कोई सूचना नहीं है।
भारत ने इस घटना पर क्या कूटनीतिक कदम उठाया?
भारत ने नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के प्रभारी को तलब किया और इस्लामाबाद में भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सामने औपचारिक विरोध दर्ज कराया।
अप्रैल 1991 का समझौता क्या कहता है?
1991 के समझौते का अनुच्छेद 10 कहता है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में दोनों देशों के युद्धपोतों और पनडुब्बियों को एक-दूसरे से कम से कम 3 नॉटिकल मील की सुरक्षित दूरी बनाकर रखनी होगी।
क्या पहले भी दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच ऐसी स्थिति बनी है?
हां, जून 2011 में भारतीय युद्धपोत आईएनएस गोदावरी और पाकिस्तानी जहाज पीएनएस बाबर के बीच भी समुद्र में खतरनाक स्थिति पैदा हुई थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·13 मिनट पहले

1991 के द्विपक्षीय समझौते का उल्लंघन यह दर्शाता है कि समंदर में सैन्य संवाद और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन कितना आवश्यक है। यद्यपि इसे जानबूझकर किया गया हमला नहीं माना गया है, फिर भी अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ऐसी नौसैनिक लापरवाही दो परमाणु संपन्न पड़ोसियों के बीच अवांछित तनाव बढ़ा सकती है। राजनयिक विरोध दर्ज कराने के साथ-साथ यह ज़रूरी है कि स्थापित समुद्री सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू किया जाए ताकि भविष्य में किसी भी आकस्मिक सैन्य टकराव की आशंका को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·12 मिनट पहले

रोहन की बात बिल्कुल सटीक है। कानूनी और सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से देखें तो अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में निर्धारित नेविगेशन नियमों की अनदेखी केवल एक नौसैनिक चूक नहीं, बल्कि कूटनीतिक और समुद्री कानूनों का उल्लंघन है। यद्यपि इसे सैन्य उकसावा नहीं माना गया है, फिर भी ऐसी गंभीर लापरवाही पर संस्थागत जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है। यदि अप्रैल 1991 के समझौते के तहत दोनों देश तकनीकी जांच और द्विपक्षीय समीक्षा तंत्र को सक्रिय नहीं करते हैं, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं बड़ी समुद्री सुरक्षा चुनौती बन सकती हैं। नियमों का सख्त कानूनी पालन ही शांति बनाए रख सकता है।

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