बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में प्यार और भरोसे का कत्ल करने वाला एक खौफनाक मामला सामने आया है। शादी का सपना दिखाकर घर से भगाई गई एक लड़की को उसके ही प्रेमी ने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता ले जाकर 2 लाख 30 हजार रुपये में जिस्मफरोशी के बाजार में बेच दिया। नरक में धकेली गई इस पीड़िता ने किसी तरह हिम्मत जुटाकर अपनी मां को गुप्त रूप से फोन लगाया और रोते-बिलखते कहा कि अगर मुझे जल्द नहीं बचाया गया तो मैं मर जाऊंगी। इस बदहवास कॉल के बाद हरकत में आई पुलिस टीम ने रणनीतिक कदम उठाते हुए ग्राहक का भेष धारा और कोलकाता के बदनाम रेड लाइट इलाके से युवती को सकुशल बचा लिया।
मां को आया बेबसी भरा फोन और दर्ज हुई शिकायत
जब पीड़िता की मां के पास अपनी बेटी की दर्दभरी पुकार पहुंची, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। बेटी ने रोते हुए फोन पर खुलासा किया कि उसे धोखा देकर कोलकाता के एक वैश्यालय में बेच दिया गया है। बिना कोई वक्त गंवाए बदहवास मां केसरिया पुलिस स्टेशन पहुंची और पूरे मामले से अधिकारियों को अवगत कराया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केसरिया के थाना प्रभारी राहुल कुमार ने तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया। इसके बाद पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) के पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर एक विशेष जांच दल का गठन किया गया। इस टीम की कमान अपर थाना प्रभारी राजकुमार राजू को सौंपी गई और पीड़िता की मां को साथ लेकर पुलिस बल कोलकाता के लिए रवाना हो गया।
जासूस बनकर रेड लाइट एरिया में घुसे पुलिस अफसर
कोलकाता पहुंचने के बाद पुलिस टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती घनी आबादी और भीड़भाड़ वाले इलाके में पीड़िता को खोजना था। पुलिस ने उस मोबाइल नंबर के लोकेशन डेटा को ट्रैक किया जिससे पीड़िता ने अपनी मां को कॉल किया था। लोकेशन पोशीपारा थाना क्षेत्र के रेड लाइट इलाके की पाई गई। भीड़ भरे क्षेत्र में सीधी छापेमारी से अपराधी सतर्क हो सकते थे और लड़की की जान को खतरा हो सकता था। इसी को ध्यान में रखते हुए अपर थाना प्रभारी राजकुमार राजू ने एक रणनीतिक चाल चली। वह खुद एक ग्राहक का रूप धारण कर रेड लाइट एरिया की गलियों में दाखिल हुए। काफी मशक्कत के बाद उन्होंने गुप्त इशारों और संकेतों से युवती की मौजूदगी की पुष्टि की।
स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन
जैसे ही युवती की सही लोकेशन की पुष्टि हुई, मोतिहारी पुलिस ने तुरंत कोलकाता के स्थानीय पोशीपारा थाने से संपर्क किया। दोनों पुलिस टीमों ने संयुक्त रूप से रणनीति बनाकर निर्धारित ठिकाने पर अचानक छापेमारी की। इस मुस्तैद कार्रवाई के दौरान पीड़िता को वैश्यालय के चंगुल से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। सभी आवश्यक कानूनी और पुलिस कागजी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 10 अक्टूबर को बिहार पुलिस की टीम युवती को लेकर मोतिहारी वापस लौट आई। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में थानाध्यक्ष राहुल कुमार, अपर थानाध्यक्ष राजकुमार राजू के अलावा जांच अधिकारी एसआई मनोज ठाकुर और एसआई कोमल कुमारी समेत अन्य पुलिस कर्मियों ने मुख्य भूमिका निभाई।
एक साल की जान-पहचान और तीन महीने का प्रेम संबंध
पुलिस जांच में इस सनसनीखेज मानव तस्करी के पीछे की पूरी कहानी उजागर हुई है। यह घटनाक्रम पूर्वी चंपारण के केसरिया थाना क्षेत्र से जुड़ा है। मुख्य आरोपी की पहचान पड़ोसी जिले मुजफ्फरपुर के साहेबगंज थाना अंतर्गत शाहपुरपट्टी निवासी रोहित कुमार के रूप में हुई है। आरोपी रोहित की बहन का ससुराल पीड़िता के ही गांव में स्थित था, जिसके कारण उसका अक्सर वहां आना-जाना होता था। लगभग एक साल पहले दोनों की पहली बार मुलाकात हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातें बढ़ने लगीं और पिछले तीन महीनों से उनका प्रेम-प्रसंग चल रहा था। दोनों बालिग थे और उन्होंने शादी करने का फैसला किया था। परिवार वाले इस संबंध से अनजान थे, इसलिए शुरुआत में उन्होंने गुमशुदगी की शिकायत दर्ज नहीं कराई थी।
स्टेशन बुलाकर साथियों के हवाले किया, फिर 2.30 लाख में बेचा
पूछताछ में आरोपी रोहित कुमार ने कबूल किया कि उसने युवती को शादी का पूरा भरोसा दिया और उसे घर छोड़ने के लिए राजी कर लिया। साजिश के तहत उसने युवती को एक तय रेलवे स्टेशन पर बुलाया, जहां उसके दो साथी पहले से घात लगाए मौजूद थे। रोहित ने पीड़िता को यह कहकर अपने साथियों के साथ कोलकाता की ट्रेन में बिठा दिया कि वह खुद अगली ट्रेन या किसी काम को निपटाकर पीछे से आ रहा है। भोली-भाली युवती उसके झांसे में आ गई और कोलकाता पहुंच गई। वहां पहुंचते ही आरोपियों ने उस बेबस लड़की का सौदा 2 लाख 30 हजार रुपये में रेड लाइट इलाके में कर दिया और पैसे समेटकर फरार हो गए।
अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह के जुड़े तार, पुलिस की छापेमारी
रोहित को गिरफ्तार करने के बाद जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने इस मानव तस्करी नेटवर्क में शामिल अपने तीन अन्य साथियों के नामों का खुलासा किया। इसमें मुजफ्फरपुर के रहने वाले दो युवक पंकज और प्रिंस शामिल हैं, जबकि पूर्णिया की रहने वाली सोनी नाम की महिला का नाम भी सामने आया है। पुलिस को मजबूत संदेह है कि पूर्णिया की सोनी ही वह मुख्य दलाल है जिसने कोलकाता में लड़की को बेचने की पूरी डील सेट की थी। थाना प्रभारी राहुल कुमार ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी के आपराधिक इतिहास की पड़ताल की जा रही है। गिरोह के अन्य फरार सदस्यों को पकड़ने के लिए पुलिस संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है। फिलहाल बरामद युवती को उसके परिवार को सौंप दिया गया है, जहां उसकी काउंसलिंग और मेडिकल जांच की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
























