केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा से जुड़ी अन्य प्रमुख मांगों पर केंद्र सरकार की सहमति मिलने के बाद दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का 36 दिनों से जारी विशाल आंदोलन समाप्त हो गया है। 25 जुलाई को आंदोलन खत्म होने के बाद धरना स्थल पर मौजूद छात्र अपने अपने राज्यों और घरों की तरफ लौट गए। इसके बाद से ही सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के सार्वजनिक रूप से नजर न आने पर तरह तरह की चर्चाएं होने लगी थीं। हालांकि, अब स्थिति स्पष्ट हो गई है और वे महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर स्थित अपने घर पर विश्राम कर रहे हैं।
20 जून से शुरू हुआ था आंदोलन, सोनम वांगचुक के जुड़ने से पकड़ी थी रफ्तार
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 20 जून को हुई थी, जब नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में जवाबदेही तय करने, देश की परीक्षा प्रणाली में ठोस सुधार करने और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी के बैनर तले छात्रों ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन शुरू किया था। आंदोलन को 28 जून को एक नया मोड़ मिला, जब प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक छात्रों के समर्थन में जंतर मंतर पहुंचे। वांगचुक ने वहां आइसा के 6 कार्यकर्ताओं के साथ अनशन शुरू कर दिया, जिससे यह स्थानीय विरोध प्रदर्शन देखते ही देखते राष्ट्रीय स्तर के जन आंदोलन में बदल गया।
संसद मार्च पर पुलिस कार्रवाई और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
आंदोलन के दौरान स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से जबरन हटाकर सफदरजंग अस्पताल पहुंचा दिया। पुलिस के इस कदम से प्रदर्शनकारी छात्रों और युवाओं में जबरदस्त आक्रोश फैल गया। इसके बाद 20 जुलाई को अपनी मांगों को लेकर संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कार्रवाई की, जो इस आंदोलन का सबसे निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इस दौरान पुलिस पर आंदोलनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग करने के संगीन आरोप भी लगे। आखिरकार, प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों के आगे झुकते हुए सरकार ने उनकी शर्तें स्वीकार कर लीं और धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया, जिसके बाद शनिवार को 36 दिनों का यह लंबा धरना आधिकारिक रूप से समाप्त घोषित कर दिया गया।
महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट ने परिजनों से की मुलाकात, सुरक्षा का दिया भरोसा
आंदोलन की समाप्ति के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भी इस मुद्दे पर हलचल देखने को मिली। 26 जुलाई को महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने छत्रपति संभाजीनगर स्थित अभिजीत दीपके के आवास पर जाकर उनके माता-पिता से मुलाकात की। मंत्री शिरसाट ने परिवार को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया और घोषणा की कि युवा नेता को राज्य सरकार की ओर से सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
मुलाकात के बाद मंत्री संजय शिरसाट ने कहा, "जब वह महाराष्ट्र पहुंचेंगे, तो मैं व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से उन्हें सरकारी सुरक्षा देने का विशेष अनुरोध करूंगा ताकि उनकी जान को कोई खतरा न हो।" उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अभिजीत दीपके अगले दो-तीन दिनों के भीतर अपने गृहनगर पहुंच जाएंगे।



















