पाकिस्तान से सटे गुजरात के कच्छ जिले के दुर्गम और दलदली इलाके में अब भारत ने अपनी सुरक्षा घेराबंदी कई गुना मजबूत कर दी है। रक्षा मंत्रालय ने सर क्रीक सेक्टर की निगरानी के लिए 11 स्वदेशी हाई-स्पीड एम्फिबियस कॉम्बैट बोट्स, यानी पानी और जमीन दोनों जगह चलने में सक्षम लड़ाकू नौकाओं की खरीद प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है। भारत-पाकिस्तान सीमा पर सामरिक रूप से सबसे संवेदनशील माने जाने वाले इस मुहाने पर अब हर संदिग्ध हरकत पर भारतीय सेना की सीधी और पैनी नजर रहेगी।
पिछले साल के ड्रोन हमले का करारा जवाब
यह फैसला अचानक नहीं आया है। पिछले साल पाकिस्तानी सेना ने ड्रोन के जरिए भारतीय बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की कोशिश की थी, जिसे भारत ने बेहद गंभीरता से लिया। हालिया खुफिया इनपुट बताते हैं कि पाकिस्तान इस विवादित दलदली इलाके में अपने सैनिकों की तैनाती और बुनियादी ढांचा लगातार बढ़ा रहा है। इसी बढ़ते खतरे को समय रहते रोकने के लिए भारत ने अपनी मारक क्षमता दोगुनी करने का रास्ता चुना है, ताकि सरहद पार से होने वाली किसी भी घुसपैठ या साजिश को उसकी शुरुआत में ही कुचला जा सके।
1947 से सुलग रहा है सर क्रीक विवाद
सर क्रीक को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनातनी 1947 के बंटवारे के समय से ही चली आ रही है, जब सिंध पाकिस्तान का हिस्सा बना और गुजरात भारत में बना रहा। 1968 में हुए ट्रिब्यूनल अवॉर्ड ने कच्छ से जुड़े ज्यादातर सीमा विवादों को तो सुलझा दिया था, लेकिन सर क्रीक का यह मुहाना कई दौर की बातचीत के बावजूद आज तक अनसुलझा बना हुआ है, और यही वजह है कि यह इलाका बार बार तनाव की वजह बनता रहा है।
थलवेग सिद्धांत बना विवाद की असली जड़
असल विवाद 1914 के एक पुराने प्रस्ताव की अलग अलग व्याख्याओं से जुड़ा है। पाकिस्तान पूरे क्रीक पर अपना दावा जताता है और पूर्वी तट को ही सीमा मानता है। वहीं भारत अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत मान्य थलवेग सिद्धांत की बात करता है, जिसके मुताबिक सीमा नौगम्य चैनल के ठीक बीचोंबीच से गुजरनी चाहिए। पाकिस्तान यह कहकर इस सिद्धांत को खारिज करने की कोशिश करता रहा है कि सर क्रीक एक ज्वारीय मुहाना है, कोई नदी नहीं। लेकिन भारत का रुख साफ है कि नक्शे और पुराने ऐतिहासिक बाउंड्री मार्कर ही उसकी सीमाओं की रक्षा का अंतिम और निर्णायक आधार हैं।
अब अमेरिका, चीन, रूस के क्लब में शामिल भारत
उथले पानी, कीचड़ और दलदली जमीन पर सेना को तेज और घातक तरीके से आगे बढ़ाने वाली एम्फिबियस लड़ाकू नौकाओं और होवरक्राफ्ट का इस्तेमाल अब तक दुनिया के चुनिंदा देशों तक ही सीमित रहा है। इनमें संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, रूस, दक्षिण कोरिया, जापान और खुद पाकिस्तान भी शामिल हैं, जो अपनी तटीय सीमाओं और नदी डेल्टाओं की हिफाजत के लिए इसी तरह की खास सैन्य क्षमताओं का सहारा लेते हैं। 11 नई स्वदेशी नौकाओं की तैनाती के साथ भारत भी अब इसी खास और चुनिंदा सैन्य क्लब में शामिल हो गया है, जो उसकी बढ़ती सैन्य ताकत का बड़ा प्रमाण है।
घुसपैठ की हर कोशिश पर अब लगेगी रोक
इन नौकाओं की तैनाती के बाद सर क्रीक इलाके की पूरी डेमोग्राफी और निगरानी पूरी तरह भारत के हाथ में आ जाएगी। दलदल के रास्ते चोरी छिपे घुसने की कोशिश करने वाला कोई भी पाकिस्तानी सैनिक या आतंकी अब भारतीय सुरक्षा घेरे से बचकर नहीं निकल पाएगा। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि यह कदम सर क्रीक सेक्टर में भारत की सामरिक बढ़त को और पक्का करेगा और सीमा पार से होने वाली किसी भी साजिश को उसकी शुरुआत में ही नाकाम कर देगा।





















